CG Teacher News: युक्तियुक्तकरण के बाद भी बस्तर के 978 स्कूल सिंगल शिक्षक के भरोसे, बीजापुर के 12 स्कूलों में शिक्षक नहीं!
CG Teacher News: लाल आतंक के चलते बस्तर संभाग में शिक्षा व्यवस्था भी छिन्न- भिन्न रही है। अब चूंकि नक्सल उन्मूलन का दावा किया गया है, तो उम्मीद की जा रही है कि संभाग के सभी स्कूलों के बच्चों को पढ़ाई के लिए पर्याप्त शिक्षक मिल सकेंगे। ताजा रिपोर्ट के अनुसार बस्तर संभाग के 978 स्कूलों में केवल एक ही शिक्षक पदस्थ हैं, जबकि बीजापुर जिले के 12 स्कूल अब भी बिना शिक्षक के चल रहे हैं।

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CG Teacher News: रायपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलियों के सफाए का संकल्प लिया था। इसके एक दिन पहले ही उन्होंने संसद में छत्तीसगढ़ के नक्सल मुक्त होने की घोषणा कर दी। इसके बाद उम्मीद जताई जा रही है कि बस्तर के घनघोर नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में विकास की गति बढ़ेगी। शिक्षा सहित सभी व्यवस्था पटरी पर लौट आएगी। आदिवासी इलाकों में स्कूल भवनों को भी नक्सलियों ने बम से उड़ा दिया था, इसके कारण बच्चों का भविष्य अंधकारमय ही रहा और केवल सुरक्षा बलों के कैम्प में रहकर पढ़ाई करते रहे। बीते दो- तीन साल में जैसे- जैसे नक्सली सिमटते गए, राज्य सरकार ने खंडहर में तब्दील स्कूल भवनों के पुनर्निमाण का सिलसिला शुरू किया था। अब नक्सल उन्मूलन के बाद इसमें तेजी आने की संभावना है। फिलहाल राज्य सरकार ने एक रिपोर्ट जारी की है, उसमें बस्तर संभाग के स्कूलों की हालत चिंतनीय है। स्कूलों में शिक्षक ही नहीं हैं, जिसके कारण बच्चे पढ़ नहीं पा रहे हैं।
सर्वाधिक नक्सल प्रभावित रहे बीजापुर जिले की हालत सबसे खराब है। यहां के 324 स्कूलों में केवल एक शिक्षक पदस्थ है यानी अगर शिक्षक अवकाश पर जाता है तो स्कूल ही बंद हो जाता है। जबकि इसकी जिले में 12 स्कूलों में शिक्षक ही नहीं हैं, जाहिर है वहां बच्चे पढ़ने के लिए नहीं जाते। इसी तरह बस्तर जिले में 297, कांकेर में 74, दंतेवाड़ा में 10, कोंडागांव में 19, सुकमा में 186 और नारायणपुर में 68 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे हैं। हैरत की बात यह है कि कांकेर में इस वक्त 341 और कोंडागांव में 192 शिक्षक अतिशेष घोषित किए गए हैं।
दूसरे आदिवासी जिले भी
बस्तर के अतिरिक्त दूसरे आदिवासी इलाके में भी हालत ठीक नहीं है। बलरामपुर- रामानुजगंज जिले में 113 स्कूलों में केवल एक शिक्षक है और पांच स्कूल शिक्षकविहीन हैं। इस जिले में भी 128 शिक्षक अतिशेष हैं। जशपुर में दो स्कूलों में शिक्षक नहीं है और 42 स्कूल एकल शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। यहां 262 शिक्षक अतिशेष घोषित किए गए हैं। सूरजपुर में 87, कोरिया में 18, सरगुजा में 8, सारंगढ़ बिलाईगढ़ में 14, रायगढ़ में 82, गौरेला पेंड्रा मरवाही में 18, मुंगेली में 10 स्कूलों में एक ही शिक्षक पदस्थ है।
राजधानी में एकल शिक्षक स्कूल
आदिवासी इलाके के अलावा राजधानी का हाल भी जुदा नहीं है। इतने अतिशेष शिक्षक होने के बाद भी रायपुर जिले में एक स्कूल ऐसा है, जो एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहा है। जबकि रायपुर जिले में 304 अतिशेष शिक्षक इस वक्त हैं। इसी तरह महासमुंद में 38, धमतरी में 55, बलौदाबाजार भाटापारा में पांच, गरियाबंद में 77, दुर्ग में 13, बालोद में 38, बेमेतरा में तीन, राजनांदगांव में 31, खैरागढ़ में 10 स्कूल एकल शिक्षकीय हैं। जबकि एक और नक्सल प्रभावित रहे मानपुर मोहला अंबागढ़ चौकी जिले में 149 स्कूलों में सिर्फ एक- एक शिक्षक पदस्थ हैं। इसी तरह कबीरधाम में 14, बिलासपुर में 27, जांजगीर चांपा में 3, सक्ती में पांच और कोरबा में 95 स्कूलों के बच्चे एक ही शिक्षक के सहारे पढ़ाई कर रहे हैं।
