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CG School Exam: परीक्षा या मजाक: शिक्षा विभाग ने परीक्षा के नाम पर बच्चों को दे दिया घटिया क्वालिटी का पेपर, कॉपियों से आरपार हो जा रही लिखावट! घटिया आंसरशीट के पीछे कमीशनखोरी या फिर कुछ और?

CG School Exam: स्कूल शिक्षा विभाग की देखरेख में शुरू हुई पांचवीं और आठवीं की केंद्रीयकृत परीक्षा का हाल बेहाल है। विभाग के अफसरों ने सात लाख बच्चों के साथ मजाक कर दिया है। परीक्षा के लिए बच्चों को दी जा रही उत्तर पुस्तिका, आंसरशीट की क्वालिटी बेहद खराब है। घटिया क्वालिटी के आंसरशीट के कारण बच्चों को ना तो ठीक से उत्तर लिखते बन रहा है।

CG School Exam
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इमेज- इंटरनेट 

By Radhakishan Sharma

रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग की देखरेख में शुरू हुई पांचवीं और आठवीं की केंद्रीयकृत परीक्षा का हाल बेहाल है। विभाग के अफसरों ने सात लाख बच्चों के साथ मजाक कर दिया है। परीक्षा के लिए बच्चों को दी जा रही उत्तर पुस्तिका, आंसरशीट की क्वालिटी बेहद खराब है। घटिया क्वालिटी के आंसरशीट के कारण बच्चों को ना तो ठीक से उत्तर लिखते बन रहा है और ना ही समय पर सवाल हल हो पा रहे हैं। भारी भरकम बजट के बाद गुणवत्ताविहीन आंसरशीट बांटने को लेकर विभाग के अफसरों के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं।

पांचवीं और आठवीं दोनों ही केंद्रीयकृत परीक्षा का कमोबेश एक जैसा हाल है। प्रश्न और उत्तर लिखने के लिए बच्चों को एक ही शीट दी जा रही है। शीट ऐसी कि गुणवत्ता में कहीं भी ठीक नहीं पा रही है। बच्चे इस बात को लेकर परेशान हैं, सवालों का जवाब लिखे तो कैसे। बॉल पाइंट पेन से लिखने पर स्याही फैल जा रही है। आंसरशीट ऐसी कि एक तरफ लिखने से दूसरी तरफ भी स्याही उसी तरह उभरकर आ जा रही है। ऐसे में उत्तर पुस्तिका की जांच कैसे होगी, इसे लेकर भी अब सवाल उठने लगे हैं। जाहिर सी बात है, घटिया क्वालिटी के आंसरशीट की वजह से स्याही फैल रही है और पेपर से आरपार दिखाई देने के कारण उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन करने वाले शिक्षक को भी उत्तर को पढ़ने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में शिक्षा की गुणवत्ता कैसे और किस स्तर पर जांचेंगे, यह भी एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है।

ऐसी है आंसरशीट की क्वालिटी

आसंरशीट की गुणवत्ता कुछ इस तरह है, पेन व पेंसिल का जरा सा दबाव पड़ते ही पेपर उस जगह से फट जा रहा है। पेपर में पेन की नीब या पेंसिल के नोक के कारण छेद हो जा रहा है। बॉल पाइंट पेन की स्याही लिखते ही फैलने लगती है। स्याही फैलने के कारण अक्षरों को साफ-साफ पढ़ना भी मुश्किल हो जा रहा है।

लापरवाही या बड़ी चूक?

इसे लापरवाही कहें या फिर बड़ी चूक। गणित विषय में सवालों को हल करने के लिए रफ कार्य की जरुरत होती है। अचरज की बात ये,आंसरशीट में रफ कार्य के लिए भी अलग से पेपर नहीं दिया गया। इसे छोड़िए चार पेज की आंसरशीट में 20 सवाल पूछे गए, जवाब लिखने के लिए छोड़ी गई जगह भी कम पड़ गई। गुणवत्ता ऐसी कि गणित के आंसरशीट में पेंसिल से रेखा खींचते समय जगह-जगह छेद भी हो जा रहा था।

केंद्रीयकृत परीक्षा के लिए भारी-भरकम शुल्क, आंसरशीट की क्वालिटी घटिया

पांचवीं व आठवीं के केंद्रीयकृत परीक्षा के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूलों से भारी भरकम राशि भी जमा की है। 5वीं के परीक्षार्थियों के लिए 55 रुपए, तो 8वीं के बच्चों का परीक्षा शुल्क 60 रुपए है। सरकारी स्कूलों ने यह राशि खुद जमा की है। प्राइवेट स्कूल मैंनेजमेंट यह राशि छात्रों से वसूल ली है। जानकारी के अनुसार 5वीं और 8वीं मिलाकर लगभग 7 लाख बच्चे परीक्षा दे रहे हैं और परीक्षा में प्रश्नपत्र, परीक्षा केन्द्र से लेकर उत्तरपुस्तिका जांच और परिणाम और आंसरशीट में तकरीबन 4 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जा रही है। भारी भरकम राशि खर्च करने के बाद भी घटिया क्वालिटी के आंसरशीट को लेकर अब चर्चा भी शुरू हो गई है। कहीं कमीशनखोरी के चलते केंद्रीयकृत परीक्षा के नाम पर बच्चों के साथ मजाक तो नहीं किया जा रहा है।

बता दें,प्रदेश में पांचवीं के छात्र 3.40 लाख और आठवीं के छात्र तकरीबन 3.59 लाख बच्चे परीक्षा दे रहे हैं। जाहिर है इस तरह की अव्यवस्था के चलते बच्चों के मन में दबाव बना हुआ है।

मापदंड का नहीं किया पालन

प्रश्नपत्र व उत्तर पुस्तिका के लिए तय मानक प्रश्नपत्र 60 से 80 GSM ग्राम प्रति वर्ग मीटर के मैपलिथो पेपर, व आंसरशीट के लिए 80 या उससे अधिक गुणवत्ता के होने चाहिए। अगर इससे कम गुणवत्ता के पेपर होंगे तो कमोबेश ऐसी ही स्थिति बनेगी जैसे दिखाई दे रही है। जानकारों की मानें तो, ऐसी कागज की क्वालिटी 40 से 50 जीएसएम के बीच होती है। यही सबसे खराब कागज माना जाता है। 70 जीएसएम के नीचे के कागज में रेशे ढीले होते हैं, जिससे स्याही आसानी से दूसरी तरफ फैल जाती है और पेपर पर कोटिंग की कमी के कारण वह स्याही को सोख लेता है, जिससे कागज कमजोर होकर फट जाता है।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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