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CG School Exam: आंदोलन की राह पर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन : DPI को पत्र लिखकर वार्षिक परीक्षा के लिए जारी आदेश को रद्द करने की मांग

CG School Exam: स्कूल शिक्षा विभाग ने कक्षा पहली से लेकर 11 वीं तक (5 वीं, 8 वीं, 10 वीं एवम 12 वीं को छोडकर) की वार्षिक परीक्षाओं के संचालन और परीक्षा परिणाम को लेकर आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश को लेकर अब छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने विरोध शुरू कर दिया है।

CG School Exam: आंदोलन की राह पर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन : DPI को पत्र लिखकर वार्षिक परीक्षा के लिए जारी आदेश को रद्द करने की मांग
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इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

By Radhakishan Sharma

4 February 2026|रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग ने कक्षा पहली से लेकर 11 वीं तक (5 वीं, 8 वीं, 10 वीं एवम 12 वीं को छोडकर) की वार्षिक परीक्षाओं के संचालन और परीक्षा परिणाम को लेकर आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश को लेकर अब छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने विरोध शुरू कर दिया है। एसोसिएशन ने डीपीआई को पत्र लिखकर जारी आदेश को रद्द करने की मांग की है। आदेश रद्द ना करने की स्थिति में एसोसिएशन ने आंदोलन की चेतावनी तक दे दी है।

एसोसिएशन ने डीपीआई को पत्र में लिखा है,लोक शिक्षण संचालनालय का आदेश 03 फरवरी .2026 द्वारा प्रदेश के स्कूलों में 1 ली से लेकर 11 वीं तक (5 वीं, 8 वीं, 10 वीं एवम 12 वीं को छोडकर) की वार्षिक परीक्षाओं के दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। इस संबंध में छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन प्रदेश में संचालित समस्त निजी स्कूलों (CBSE, ICSE एवं भारतीय शिक्षा बोर्ड पाठ्यक्रम वाले स्कूलों की छोडकर) की ओर से इस आदेश को रद्द करने की मांग की है।

प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने ये दिया तर्क

  • शिक्षा के अधिकार कानून में इस तरह की किसी परीक्षा का उल्लेख नहीं है. ये परीक्षाएं नियमों के विरुद्ध है. मान्यता नियमों में भी इन कक्षाओं में किसी परीक्षा करवाए जाने का उल्लेख नहीं है।
  • निजी स्कूल ऐसे बहुत से विषय पढ़ाते हैं जिनकी परीक्षा भी वह स्वयं लेते हैं. ऐसे सभी विषय स्कूल शिक्षा विभाग नहीं लेता. उन विषयों के मूल्यांकन का क्या होगा इस पत्र में उल्लेख नहीं है।
  • बोर्ड के अलावा किसी भी तरह की परीक्षाएं निजी स्कूलों में लेना यह सरासर निजी स्कूलों की स्वायत्तता पर हमला है. इस पत्र को तुरंत प्रभाव से रद्द किए जाने की आवश्यकता है।
  • सत्र के अंतिम माह में परीक्षाओं की घोषणा करना विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव डालने वाला फैसला है. इस फैसले से विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ेगा. पालक का अधिकार है वो बच्चों को किस तरह से पढ़वाना चाहते है इसलिए किसी प्रकार से जबरदस्ती किया जाना मौलिक अधिकारों का हनन है।
  • 03 फरवरी 2026 को जारी आदेश के बाद एक महीने में विभाग किस तरह लाखों विद्यार्थियों की परीक्षा का इंतजाम कर पायेगा? पत्र के अनुसार जिला स्तरीय कमेटी का गठन किया जाना है एवं अन्य दिशानिर्देश हैं. संज्ञान हो कि अभी तक किसी भी जिले में इस समिति का गठन नहीं किया गया है तो ऐसा माना जा रहा है कि पत्र जारी होने के अलावा किसी तरह की कोई भी तैयारी स्कूल शिक्षा विभाग अभी तक नहीं कर पाया है।
  • अभी तक परीक्षा का कोई भी ब्लूप्रिंट, परीक्षा का पाठ्यक्रम (सिलेबस) आदि जारी नहीं किया गया है. परीक्षा निर्धारित पाठ्यक्रम में से कितने प्रतिशत पाठ्यक्रम पर ली जाएगी यह अभी तक स्पष्ट नहीं है।
  • दसवीं एवं बारहवीं में जिस तरह से बोर्ड परीक्षाओं के आवेदन अक्टूबर माह तक जमा कर लिए गए हैं और उनकी परीक्षाएं भी मार्च-अप्रैल में होना तय है लेकिन इन परीक्षाओं का अभी तक आवेदन की अधिसूचना ही जारी नहीं की गई है. आदेश में परीक्षाओं का आयोजन मार्च में होने का उल्लेख है।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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