CG Paddy Purchase: सुगम और भरोसेमंद हुई धान खरीदी व्यवस्था, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में समर्थन मूल्य और त्वरित भुगतान से मजबूत हुआ किसानों का भरोसा
CG Paddy Purchase: राज्य सरकार ने धान खरीदी व्यवस्था को तकनीक आधारित, पारदर्शी और किसान केंद्रित बनाने के लिए कई अहम फैसले किए हैं, जिनका असर सीधे जमीनी स्तर पर दिख रहा है।

CG Paddy Purchase: रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी महापर्व 2025 इस बार केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसानों की सुविधा और भरोसे का प्रतीक बनकर सामने आया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने धान खरीदी व्यवस्था को तकनीक आधारित, पारदर्शी और किसान केंद्रित बनाने के लिए कई अहम फैसले किए हैं, जिनका असर सीधे जमीनी स्तर पर दिख रहा है। राज्य सरकार ने किसानों की मांग और व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए टुंहर टोकन ऐप को 24×7 उपलब्ध करा दिया है। अब किसानों को टोकन काटने के लिए किसी निर्धारित समय की बाध्यता नहीं रहेगी।
किसान दिन हो या रात, अपनी सुविधा के अनुसार मोबाइल से टोकन बुक कर सकते हैं। इससे तकनीकी दबाव, भीड़ और समय की समस्या में उल्लेखनीय कमी आई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर 2 एकड़ और उससे कम रकबा वाले किसानों के लिए टोकन की समय सीमा बढ़ाकर 31 जनवरी तक कर दी गई है। वहीं अन्य किसान 13 जनवरी तक आगामी 20 दिनों के लिए टोकन प्राप्त कर सकते हैं। इस फैसले से लघु और सीमांत किसानों को अपनी उपज बेचने की बेहतर योजना बनाने का अवसर मिला है।
पंजीयन से लेकर भुगतान तक बढ़े आंकड़े
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 14 नवंबर से लगातार जारी है। 22 दिसंबर तक 50 लाख 75 हजार 155 मीट्रिक टन धान की खरीदी हो चुकी थी। अब तक 9 लाख 71 हजार 342 किसानों ने धान विक्रय किया है। इस वर्ष कुल 27 लाख 43 हजार 444 किसानों ने पंजीयन कराया है, जिसमें 32 लाख 64 हजार 598 हेक्टेयर रकबा शामिल है। धान खरीदी के भुगतान के लिए मार्कफेड द्वारा 11 हजार 911 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। धान खरीदी में महासमुंद जिला 31 लाख 9 हजार 299 क्विंटल के साथ पहले स्थान पर है। कांकेर जिले में 16 लाख 81 हजार 985 क्विंटल और बिलासपुर जिले में 15 लाख 24 हजार 686 क्विंटल धान खरीदा गया है। इसके अलावा गरियाबंद, रायगढ़, कोंडागांव, धमतरी, सरगुजा और सूरजपुर जिलों में भी खरीदी तेज गति से जारी है।
निगरानी और पारदर्शिता पर प्रशासन की सख्त नजर
सरकार अपने वादे के अनुसार प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद रही है। किसानों को भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो, इसके लिए राज्य सरकार ने पहले ही मार्कफेड को 26 हजार 200 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी उपलब्ध कराई है। इससे 48 घंटे के भीतर सीधे बैंक खाते में भुगतान संभव हो सका है।
गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के किसान गुलाबचंद साहू, गोवर्धन प्रसाद कैवर्त और अंबिकापुर के किसान अखिलेश कुमार जैसे अनेक किसानों ने बताया कि ऑनलाइन पंजीयन, डिजिटल टोकन और सुव्यवस्थित उपार्जन केंद्रों के कारण धान बेचने की प्रक्रिया आसान हुई है। न लंबी कतारें हैं, न अनावश्यक चक्कर और न ही असमंजस। राज्य और जिला स्तर पर गठित टीमों द्वारा अवैध धान परिवहन, भंडारण और बाहरी धान की आवक पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों में चेकपोस्ट और औचक जांच के माध्यम से व्यवस्था को सुरक्षित रखा गया है। उपार्जन केंद्रों पर बैठने, छाया और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं।
किसान हितैषी नीति से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिली
धान खरीदी महापर्व 2025 ने यह स्पष्ट किया है कि जब नीति, तकनीक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति एक साथ काम करती हैं, तो किसान को सम्मान और भरोसा दोनों मिलता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू यह व्यवस्था न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है।
किसान हितैषी नीतियों के लिए किसानों ने मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
छत्तीसगढ़ में शासन के निर्देशानुसार धान खरीदी कार्य पूरी तरह सुचारू, पारदर्शी और तकनीक आधारित तरीके से संचालित किया जा रहा है। राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों और समर्थन मूल्य में वृद्धि का सीधा लाभ अब प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में किसानों की आर्थिक सशक्तता और कृषि विस्तार के रूप में स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
सरगुजा जिले के ग्राम कतकालो के किसान सुरेश राम रजवाड़े ने नई धान खरीदी व्यवस्था और लाभकारी मूल्य की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल प्रणाली ने धान विक्रय को पहले से कहीं अधिक सरल और सुव्यवस्थित बना दिया है।
रजवाड़े ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन टोकन के माध्यम से धान विक्रय किया, जिससे खरीदी केंद्र पर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अनावश्यक प्रतीक्षा का सामना नहीं करना पड़ा। डिजिटल टोकन प्रणाली से किसानों को अपनी सुविधा के अनुसार तिथि निर्धारित करने का अवसर मिल रहा है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है।
उन्होंने बताया कि इस विपणन वर्ष में उन्होंने लगभग 90 क्विंटल धान का विक्रय किया है। 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्राप्त समर्थन मूल्य ने उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती दी है। इस राशि का उपयोग उन्होंने खेती की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ अपने खेत में सिंचाई हेतु नए कूप (कुएं) के निर्माण में किया है। इससे वे आगे चलकर बहुफसलीय कृषि अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
धान उपार्जन केंद्रों की व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए रजवाड़े ने बताया कि केंद्र पहुंचते ही पंजीयन, तौल और भुगतान संबंधी प्रक्रियाएं सुचारू रूप से पूरी हो रही हैं। समयबद्ध भुगतान और सुव्यवस्थित प्रबंधन से किसानों का भरोसा बढ़ा है। उन्होंने अपनी ओर से तथा समस्त किसान समुदाय की ओर से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार की नीतियों से आज छत्तीसगढ़ का किसान स्वावलंबी, आत्मविश्वासी और सशक्त बन रहा है।
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था से किसान खुश
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में लागू की गई तकनीक आधारित डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था आज केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि किसानों के भरोसे का मजबूत आधार बन चुकी है। यह व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी और भरोसेमंद है, इसका जीवंत उदाहरण मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के अंतर्गत ग्राम कोड़ा के किसान बिहारी सिंह की कहानी से सामने आता है।
किसान बिहारी सिंह ने कोड़ा उपार्जन केंद्र में कुल 77.20 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया। शासन द्वारा निर्धारित 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक खरीदी की नीति के अंतर्गत उन्हें अपनी संपूर्ण उपज का उचित एवं लाभकारी मूल्य प्राप्त हुआ। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सरल और समयबद्ध रही। धान विक्रय हेतु किसान बिहारी सिंह का टोकन ऑफलाइन माध्यम से जारी किया गया था, इसके बावजूद उपार्जन केंद्र पर उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। इससे यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल प्रणाली के साथ-साथ उन किसानों के लिए भी प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, जो ऑनलाइन प्रक्रियाओं से पूर्णतः सहज नहीं हैं।
उपार्जन केंद्र में किसानों के लिए बैठने की समुचित व्यवस्था, पेयजल सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। डिजिटल कांटे से सटीक तौल, सुव्यवस्थित भुगतान प्रणाली तथा भीड़-भाड़ से मुक्त वातावरण ने पूरी प्रक्रिया को भरोसेमंद और सुगम बना दिया। अपने अनुभव साझा करते हुए किसान बिहारी सिंह ने बताया कि पूर्व वर्षों में धान विक्रय के दौरान अनिश्चितता और भुगतान में देरी आम बात थी, किंतु इस वर्ष की तकनीक आधारित व्यवस्था ने उन्हें मानसिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर राहत प्रदान की है। छत्तीसगढ़ की यह डिजिटल धान खरीदी प्रणाली आज किसानों के लिए पारदर्शिता, विश्वास और सुशासन का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभर रही है।
