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CG Paddy News: जितना धान उगता नहीं, उससे ज्यादा सरकार धान खरीदती है छत्तीसगढ़ में, समझिए इस चमत्कार के पीछे के खेल को

CG Paddy: छत्तीसगढ़ में राइस मिलरों के साथ सांठ-गांठ कर होती है फ़र्ज़ी धान ख़रीदी। लाखों मीट्रिक धान Recycling करके फिर से बेच दिया जाता है। कागजो में भी धान का पैदावार दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया जाता है। जानकारों का दावा है कि वास्तविक धान खरीदी हो तो सरकार का 10 हजार करोड़ बचेगा, जो बिचौलियों, राइस मिलरों और भ्रष्ट अफसरों की जेब मे चला जाता है।

CG Paddy News: जितना धान उगता नहीं, उससे ज्यादा सरकार धान खरीदती है छत्तीसगढ़ में, समझिए इस चमत्कार के पीछे के खेल को
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By Radhakishan Sharma

CG Paddy: रायपुर। किसानों के रकबों का पंजीयन करने के लिए राज्य सरकार ने चुस्त दुरुस्त व्यवस्था की है। पटवारी मौके पर जाकर धान उत्पादन वाले खेतों का मोबाइल से फोटो खींचते हैं और मौके पर से ही अपलोड करते हैं। गिरदावरी के जरिए इसका सत्यापन भी करते हैं। कड़ी चौकसी और निगरानी के बाद भी धान की तस्करी, खरीदी केंद्रों में तैनात कर्मचारियों, मिलर्स और कोचियों की सांठगांठ ऐसी कि सरकारी खजाने को ये सब मिलकर हर साल करोड़ों का चुना लगा रहे हैं।

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान राजस्व अमला से लेकर फर्जीवाड़ा करने वाले सक्रिय हो जाते हैं। जिन खेतों कें किसान धान की खेती करते हैं उसका पंजीयन तो किसान खुद ही करा लेते हैं। टिकरा जमीन को किसान खुद ही छोड़ देते हैं। एक किसान के पास कितनी जमीन है, रकबा कितना है। धान उपज वाले खेत का रकबा क्या है। इन सभी चीजों की जानकारी पटवारी को होती है। किसानों के रकबों का पंजीयन करने के बाद असली खेला शुरू हाेता है। किसानों को कानो-कान भनक तक नहीं लग पाती और टिकरा जमीन का समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए पंजीयन हो जाता है। टिकरा जमीन में किसान सब्जी या फिर दलहन की खेती करते हैं। दलहन की खेती वाली जमीन को किसान धान बेचने के नाम पर पंजीयन नहीं कराते।

टिकरा जमीनों का धान बेचने के नाम पर पंजीयन की जानकारी पटवारी या फिर खरीदी केंद्र के प्रभारी को ही रहती है। यहीं से शुरू होता है सरकारी खजाने को चुना लगाने का खेला। लाखों रुपये की धान किसानों की जमीन से ही बेच लेते हैं और किसानों को कानो-कान भनक तक नहीं लग पाती। फर्जीवाउ़ा करने का यह सबसे बड़ा व प्रभावी तरीका है। मिलर्स से सांठगांठ कर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जाती है। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को लेकर सीमावर्ती राज्यों के किसानों से लेकर कोचियों को भी जानकारी है। यही कारण है कि पड़ोसी राज्यों से बड़े पैमाने पर धान की तस्करी होती है। तस्करी में खरीदी केंद्र के प्रभारी से लेकर इससे जुड़े अमले की मिलीभगत रहती है। इस पूरे खेल में अफसर और बिचौलिए मालामाल हो रहे हैं। बीते साल के आंकड़ों पर नजर डाले तो राज्य सरकार ने समर्थन मूल्य पर 149 लाख मेट्रिक टन धान की खरीदी की थी। यह तय है कि इसमें से तकरीबन 49 लाख मेट्रिक टन फर्जी तरीके से खपाया गया था।

दो खरीदी केंद्रो में सात करोड़ का वारा-न्यारा

छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में धान खरीदी में फर्जीवाड़ा को लेकर बड़ा मामला सामने आया था। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान बाजार चारभांठा और बघर्रा धान खरीदी केंद्र में MSP पर खरीदे गए धान में से करीब 26 हजार क्विंटल धान की कमी पाई गई है। जांच में इस धान की बाजार कीमत 7 करोड़ रुपए आंकी गई थी। जांच के दौरान दोनों धान खरीदी केंद्रों में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई थी। फर्जी एंट्री, फर्जी बिल, मजदूरों की फर्जी हाजिरी और सीसीटीवी कैमरों से छेड़छाड़ की बात सामने आई थी।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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