Begin typing your search above and press return to search.

CG News: मां-नवजात को अस्पताल में बनाया बंधक, तीन साल के बेटे को भी रोक लिया, महज 15 हजार रुपये के लिए पांच दिनों तक रखा बंधक

CG News: ओड़िशा के एक प्राइवेट अस्पताल प्रबंधन ने मानवता की सारी हदें पर कर दी। महज 15 हजार रुपये के लिए मां-नवजात और उसके तीन साल के बेटे को बंधक बना लिया।

CG News: मां-नवजात को अस्पताल में बनाया बंधक, तीन साल के बेटे को भी रोक लिया, महज 15 हजार रुपये के लिए पांच दिनों तक रखा बंधक
X
By Radhakishan Sharma

CG News: गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से लगे ओडिशा के एक प्राइवे हॉस्पिटल में डिलीवरी के बाद गर्भवती, नवजात और उसके तीन साल के बेटे को बंधक बनाने का सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार भुजिया जनजाति से हैं। धर्मगढ़ स्थित मां भंडारणी क्लिनिक में डिलीवरी के बाद 15 हजार नहीं चुकाने पर तीनों को अस्पताल प्रबंधन ने 6 दिनों तक बंधक बनाकर रखा। मैनपुर की नवीना चींदा (23 साल) को लेबर पेन होने पर परिवार के लोग उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। बच्चे की नॉर्मल डिलीवरी हुई। अस्पताल ने 20 हजार रुपये का बिल बनाया। परिवार सिर्फ 5 हजार ही चुका पाया, 15 हजार कहीं से भी लाकर देने की बात कही। सास पैसों के इंतजाम के लिए गांव वापस लौटी।

ये है पूरा मामला

गरियाबंद जिले के आदिवासी ब्लॉक मैनपुर के मूचबहल के मालिपारा वार्ड की नवीना चींदा को 18 जनवरी को लेबर पेन उठा। जिसके बाद कालाहांडी के धर्मगढ़ स्थित मां भंडारणी क्लिनिक में भर्ती कराया गया था।

उसी दिन नॉर्मल डिलीवरी के बाद उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया। अस्पताल में भर्ती के समय परिजनों ने 5,000 रुपए जमा कराया था। अस्पताल प्रबंधन ने 20 हजार रुपये का बिल बनाया और 15 हजार रुपये जमा कराने की बात कही। प्रसूता की सास दोषो बाई ने बताया कि पैसे का इंतजाम करने के लिए वह 21 जनवरी को गांव लौट आईं। उन्होंने बताया कि उनका बेटा पोड़ा आंध्र प्रदेश में ईंट भट्ठे पर मजदूरी करता है और वह भी पैसे का इंतजाम नहीं कर पा रहा था। अस्पताल ने पूरी राशि का भुगतान होने तक बहू, 3 साल के पोते और नवजात को ले जाने से मना कर दिया था। फिर पैसे के इंतजाम के लिए मैं गांव वापस लौटी।

ऑपरेशन से डिलीवरी होने पर बनाया था 85 हजार का बिला

दोषो बाई ने बताया कि, नवीना का पहला बच्चा तीन साल पहले धर्मगढ़ के इसी अस्पताल में ऑपरेशन से पैदा हुआ था। उस समय इलाज में 85,000 रुपए खर्च हुए थे, जिसे चुकाने के लिए परिवार को सोना-चांदी तक बेचनी पड़ी थी। इस बार प्रसव पीड़ा होने पर उन्होंने स्थानीय उपस्वास्थ्य केंद्र से संपर्क नहीं किया, क्योंकि पिछली बार वहां भर्ती करने से इनकार कर दिया गया था। ऐसे में परिवार ने दोबारा ऑपरेशन से बचने की उम्मीद में ओडिशा जाने का फैसला किया।

जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप ने बताया कि प्रसूता की सास बीते दो दिनों से पैसों की व्यवस्था करने में लगी हुई थी। जानकारी मिलते ही उन्होंने अस्पताल में अपना प्रतिनिधि भेजा, जहां पीड़ित परिवार को लगभग दो घंटे तक इंतजार कराया गया।

इसके बाद मां और नवजात को देवभोग की एंबुलेंस में बैठाकर वापस लाया गया।

मामले में अस्पताल संचालक चैतन्य मेहेर ने सफाई देते हुए कहा कि, उन्हें किसी भी प्रकार से पैसे की मांग नहीं की गई। परिवार ने हमें दिक्कतों की कोई जानकारी नहीं दी थी। डिलीवरी के बाद मां और नवजात जब तक रहे स्टाफ ने उनका पूरा ख्याल रखा। अगर वे पैसों की दिक्कत बताते तो उन्हें पहले ही जाने दे दिए होते, पर उन्होंने अंतिम समय तक कुछ भी नहीं बताया।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

Read MoreRead Less

Next Story