CG रोपवे हादसा में बड़ा खुलसा, ब्लैक लिस्टेड कंपनी कर रही थी रोपवे का संचालन, जांच में सामने आई बड़ी गड़बड़ी
CG News: छत्तीसगढ़ के खल्लारी माता मंदिर में रोपवे का संचालन जो कंपनी कर रही थी वह पहले से ही ब्लैक लिस्टेड है। दुर्घटना में जांच के बाद बड़ा खुलासा हुआ है।

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रायपुर।24 मार्च 2026| छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के प्रसिद्ध खल्लारी माता मंदिर में रोपवे हादसे में बड़ी लापरवाही सामने आई है। जांच में खुलासा हुआ है, कोलकाता की जिस कंपनी को रोपवे का संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी, वह पहले से ही ब्लैक लिस्टेड है।
'रोपवे एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कोलकाता' कंपनी के कर्मचारियों ने इससे पहले डोंगरगढ़ और बिहार में भी हादसे करवा चुके हैं। राजनांदगांव के डोंगरगढ़ में भी इसी कंपनी के कार्यकाल के दौरान 2016 और 2021 में हादसे हुए थे, जिनमें दो लोगों की जान चली गई थी।
महासमुंद जिले के खल्लारी में 22 मार्च को श्रद्धालुओं से भरी रोपवे की ट्रॉली टूटकर 20 फीट नीचे गहरी खाई में जा गिरी थी। हादसे में एक शिक्षिका की मौत हो गई थी, 16 लोग घायल हो गए थे। कंपनी के कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। मामले में जांच जारी है।रोपवे की ट्रॉली गिरने से रायपुर निवासी आयुषी धावरे (28) की मौत हो गई। पति की हालत गंभीर बनी हुई है।
ब्लैक लिस्टेड कंपनी को रोपवे चलाने की जिम्मेदारी
जिला प्रशासन पुलिस अफसरों के अनुसार, खल्लारी मंदिर में रोपवे चलाने की जिम्मेदारी 'रोपवे एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कोलकाता' के पास थी। इस कंपनी ने पूर्व में बिहार के रोहतक और राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में रोपवे चलाने का काम किया है। यहां भी हादसे हो चुके है। 26 दिसंबर 2025 को रोहतास (बिहार) में हुए एक बड़े हादसे के बाद बिहार सरकार ने इस कंपनी को ब्लैक लिस्ट में डाल दिया था।
केबल और मेंटेनेंस में घोर लापरवाही
हादसे के अगले दिन 23 मार्च को PWD और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। प्राथमिक जांच में सामने आया कि रोपवे की केबल और सुरक्षा उपकरणों का तकनीकी परीक्षण लंबे समय से नहीं किया गया था।
विभाग ने कंपनी से सुरक्षा सर्टिफिकेट मांगे हैं। प्रारंभिक जांच पड़ताल के दौरान मेंटेनेंस लॉग बुक में कई खामियां मिली हैं। यहां तैनात 6 कर्मचारी प्रशिक्षित इंजीनियर नहीं हैं। कंपनी उन्हें सीधा वेतन तक नहीं देती, वे टिकट की कमाई से अपना हिस्सा काटकर बाकी पैसा कंपनी को भेजते थे।
हादसे ने सिस्टम की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मार्च 2024 से यह रोपवे संचालित हो रहा था, लेकिन किसी भी सरकारी विभाग ने इसकी सुरक्षा निगरानी की जिम्मेदारी नहीं ली। ट्रस्ट कमेटी के अनुसार, क्षेत्रीय विधायक की पहल पर इस कंपनी को खल्लारी लाया गया था। मंदिर ट्रस्ट में तहसीलदार पदेन सदस्य होते हैं, फिर भी सुरक्षा ऑडिट को लेकर कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
हादसे के बाद पुलिस ने दो स्थानीय कर्मचारियों के खिलाफ FIR किया है। एसडीएम नमिता मारकोले के नेतृत्व में टीम दस्तावेजों को खंगाल रही है।
