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CG News: अस्पतालों के लिए फायर एनओसी के प्रावधानों के युक्तिकरण की मांग, एएचपीआई छत्तीसगढ़ चैप्टर के अध्यक्ष ने लिखा गृह विभाग के सचिव को पत्र...

CG News: अस्पतालों के लिए फायर एनओसी के प्रावधानों के युक्तिकरण की मांग की गई है। एएचपीआई छत्तीसगढ़ चैप्टर के अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने गृह विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता को पत्र भी लिखा है।

CG News: अस्पतालों के लिए फायर एनओसी के प्रावधानों के युक्तिकरण की मांग, एएचपीआई छत्तीसगढ़ चैप्टर के अध्यक्ष ने लिखा गृह विभाग के सचिव को पत्र...
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By Sandeep Kumar

CG News: रायपुर। मध्यप्रदेश की तरह छत्तीसगढ़ में भी अस्पतालों के फायर एनओसी के नियमों के प्रावधानों में युक्तिकरण करने की मांग की जा रही है। एएचपीआई छत्तीसगढ़ चैप्टर के अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने मांग को लेकर गृह विभाग के सचिव आईएएस हिमशिखर गुप्ता को पत्र लिखा है।

एएचपीआई छत्तीसगढ़ चैप्टर के अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने कहा कि हाल ही में परिवर्तित गाइडलाइन के अनुसार अस्पतालों को प्रति वर्ष फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र (फायर एनओसी) प्राप्त करने में हो रही कठिनाइयों के गंभीर विषय को आपके संज्ञान में लाना चाहता हूँ। 25 नवंबर 2025 को राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार छत्तीसगढ़ में डॉक्टर के एकल क्लिनिक से लेकर बड़े अस्पताल को अग्निशमन विभाग द्वारा अधिकृत तृतीय पक्ष अंकेक्षक (थर्ड पार्टी ऑडिटर) से निरीक्षण पश्चात फायर एनओसी लेना और प्रति वर्ष नवनीकरण करवाना अनिवार्य है।

थर्ड पार्टी ऑडिटर द्वारा लगभग 10 रूपए वर्ग फुट (जीएसटी शुल्क अलग) नर्सिंग होम और चिकित्सक संस्थानों से लिया जा रहा है।औसत 200 बिस्तर अस्पताल के लिए प्रतिवर्ष 4 लाख रूपए प्रति वर्ष नवीनीकरण शुल्क इस पर आयेगा जिसे किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता है।

बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र के स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्लिनिक, नर्सिंग होम, अस्पतालों को नर्सिंग होम एक्ट के तहत संचालन का लाइसेंस नवीनीकरण नहीं दिया जा रहा है जबकि राज्य नर्सिंग होम एक्ट का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा संबंधी गुणवत्ता पर ध्यान देना है।फायर अनापत्ति प्राप्त करने की विभागीय जटिलताओं और आर्थिक कारणों के कारण स्वास्थ्य सुविधाप्रदाता विशेषकर ऐसे संस्थान जो पहले से बने हुए हैं, उन्हें संचालन में कठिनाइयां आ रही हैं।

इस संदर्भ में मध्यप्रदेश एवं आंध्र प्रदेश शासन द्वारा उठाये गए कदमों को आपके संज्ञान में लाना चाहता हूँ:

मध्यप्रदेश: दिनांक 16 दिसंबर 2022 को जारी आदेश अनुसार 50 बिस्तरों से कम वाले अस्पताल, अग्नि सुरक्षा संबंधित प्रावधानों का स्वयं पालन करते हुए पंजीकृत फायर इंजीनियर का प्रमाणीकरण प्रस्तुत करेंगे जिसके आधार पर उन्हें संचालन का लाइसेंस दिया जाएगा। इस प्रावधान से डॉक्टरों के क्लिनिक एवं छोटे संस्थानों को संचालन में सहायता मिलेगी। साथ ही फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट की वैधता 3 वर्ष रहेगी, नवीनीकरण भी 3 वर्षों के लिए किया जाएगा। यह भी बिल्डिंग आकार और बिस्तर संख्या अपरिवर्तित होने पर आसान नवीनीकरण शपथ पत्र के आधार पर हो पाएगा।

आंध्र प्रदेश: अगस्त एवं अक्टूबर 2021 में जारी आदेश के अनुसार फायर एनओसी का नवीनीकरण 5 वर्षों के लिए किया जाएगा। संचालक द्वारा एक स्व शपथ प्रमाणपत्र (सेल्फ सर्टिफिकेट) दिया जाएगा जिसके तहत संचालित संस्थान में अग्निशमन यंत्र लगे होने एवं अग्निशमन वीडियो मॉक ड्रिल किये जाने का स्व प्रमाणपत्र देगा जिस पर संस्थान के कम से कम 60% कर्मचारियों के प्रशिक्षण सहित हस्ताक्षर होंगे। सेल्फ सर्टिफिकेट का फॉर्मेट अग्निशमन विभाग द्वारा दिया जाएगा।

आपसे निवेदन है कि इस विषय पर व्यापक जनहित को देखते हुए अन्य प्रदेशों द्वारा उठाये गए कदमों की तरह छत्तीसगढ़ में भी अस्पतालों के फायर एनओसी के नियमों के प्रावधानों में युक्तिकरण किया जाए जिसकी समय अवधि नर्सिंगहोम एक्ट के लाइसेंस के बराबर 5 साल तक किया जाना तर्कसम्मत एवं उचित होगा जिससे निर्बाध रूप से मरीजों को स्वास्थ्य सुविधायें मिल सकें। साथ ही थर्ड पार्टी ऑडिट के शुल्क का भी युक्तिकरण किया जाए।

Sandeep Kumar

संदीप कुमार कडुकार: रायपुर के छत्तीसगढ़ कॉलेज से बीकॉम और पंडित रवि शंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी से MA पॉलिटिकल साइंस में पीजी करने के बाद पत्रकारिता को पेशा बनाया। मूलतः रायपुर के रहने वाले हैं। पिछले 10 सालों से विभिन्न रीजनल चैनल में काम करने के बाद पिछले सात सालों से NPG.NEWS में रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

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