स्टे ऑर्डर के बाद भी फैमिली कोर्ट ने सुनाया फैसला, नाराज हाई कोर्ट ने प्राेसिडिंग अफसर को नोटिस जारी कर मांगा जवाब....

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु ने पारिवारिक मामले में फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। मौजूदा प्रकरण में हाई कोर्ट के स्थगन आदेश के बाद भी फैमिली कोर्ट द्वारा सुनवाई कर फैसला देने पर नाराजगी जताई है। नाराज हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के प्रोसीडिंग ऑफिसर को शोकाॅज नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है। मामला रायगढ़ फैमिली कोर्ट का है।
याचिकाकर्ता पति ने पारिवारिक विवाद के मामले को रायगढ़ फैमिली कोर्ट से अन्य सक्षम न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग करते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाते हुए बताया था, कोर्ट स्टाफ और प्रतिवादी पत्नी की मिलीभगत से कार्यवाही प्रभावित हो रही है। सुनवाई के लिए कोर्ट द्वारा लगातार छोटी-छोटी तारीखें दी जा रही हैं। उसके दस्तावेजों में जानबुझकर विलंब किया जा रहा है, याचिकाकर्ता ने इन सब कारणों के चलते निष्पक्ष सुनवाई को लेकर संदेह जताया था और अन्य अदालत में स्थानांतरण की मांग की थी। याचिका की सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत देते हुए सिविल सूट की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
स्थगन आदेश के बाद भी फैमिली कोर्ट ने सुनाया अपना फैसला
हाई कोर्ट द्वारा सिविल सूट की कार्रवाई पर रोक लगाने के बाद भी फैमिली कोर्ट ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने पत्नी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए भरण पोषण का आदेश पारित कर दिया। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया, संबंधित जज को स्थगन आदेश की जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने आवेदन पर आदेश पारित करते हुए भरण-पोषण राशि को लेकर याचिकाकर्ता के खिलाफ टिप्पणियां भी की।
पढ़िए हाई कोर्ट ने क्या टिप्पणी की
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, जब उच्च न्यायालय द्वारा कार्यवाही पर रोक लगा दी जाती है, तो निचली अदालत अपना अधिकार खो देता है। ऐसी स्थिति में ट्रायल कोर्ट को आगे की कार्यवाही करने का अधिकार नहीं रहता। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने बताया कि, संबंधित प्रोसीडिंग ऑफिसर का तबादला हो चुका है और नए अधिकारी ने पदभार ग्रहण कर लिया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि अब ट्रांसफर याचिका का कोई औचित्य नहीं बचता, इसलिए इसे निराकृत किया जाता है।
प्रोसीडिंग ऑफिसर से मांगा स्पष्टीकरण
हाई कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है, संबंधित प्रोसीडिंग ऑफिसर से 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण लिया जाए, स्थगन आदेश के बाद भी सुनवाई क्यों जारी रखी। यह रिपोर्ट चीफ जस्टिस के समक्ष प्रशासनिक पक्ष में प्रस्तुत की जाएगी।
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