मां-बेटी निकली ठग: रेलवे में नौकरी लगाने के नाम पर ठग लिए 15 लाख रुपये, ई-मेल के जरिए भेजा फर्जी नियुक्ति पत्र
CG Crime News: छत्तीसगढ़ बिलासपुर में नौकरी लगाने के नाम पर बड़े फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ है। मां-बेटी ने नौकरी लगाने के नाम पर 15 लाख रुपये ठग लिए। विशाखापट्टनम से ई-मेल के जरिए फर्जी ज्वाइनिंग लेटर भेज दिया। रिटायर्ड कर्मचारी ने बेटे को नौकरी लगाने के नाम पर दिए थे रुपये।

इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News
बिलासपुर। 3 अप्रैल 2026|छत्तीसगढ़ बिलासपुर में नौकरी लगाने के नाम पर बड़े फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ है। मां-बेटी ने नौकरी लगाने के नाम पर 15 लाख रुपये ठग लिए। विशाखापट्टनम से ई-मेल के जरिए फर्जी ज्वाइनिंग लेटर भेज दिया। रिटायर्ड कर्मचारी ने बेटे को नौकरी लगाने के नाम पर दिए थे रुपये। रुपये ना लौटाने पर पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित की शिकायत पर तोरवा पुलिस ने महिला व उसकी बेटी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।
तोरवा क्षेत्र में रहने वाले एन वेंकट सूर्यप्रताप प्राइवेट जॉब करते थे। उन्होंने पुलिस से शिकायत कर बताया, अगस्त 2020 में उन्हें तेनिटी इंद्राणी नाम की महिला ने फोन किया था। महिला ने उनके बेटे को रेलवे में नौकरी दिलाने का दावा किया और शुरुआत में 6 लाख रुपए की मांग की। बातचीत के बाद 4 लाख रुपए देने की बात तय हुई और बेटे के दस्तावेज ईमेल के जरिए भेज दिया।
राजनीतिक कोटे में नियुक्ति दिलाने किया दावा
पीड़ित ने पुलिस को बताया, इंद्राणी ने राजनीतिक कोटे से नियुक्ति लगवाने का दावा किया था। उसने अपनी बेटी वलिवेती वेंकट नागा कीर्ति के बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करने को कहा। पहले 4 लाख रुपए जमा कराए गए, फिर 50-50 हजार की अतिरिक्त रकम ली गई। इसके बाद राजनीतिक कोटा और अन्य बहानों से रकम बढ़ाई गई। जब नौकरी नहीं लगी तो आरोपियों ने कोविड-19 और चुनाव का हवाला देकर समय टाल दिया।
रेल मंत्रालय के नाम से ई-मेल से भेजा फर्जी नियुक्ति भेजा
पीड़ित ने पुलिस को शिकायत में बताया, जून 2024 में आरोपियों ने ई- मेल के जरिए रेल मंत्रालय के नाम से एक फर्जी नियुक्ति पत्र भेजा, जो देखने में बिल्कुल असली जैसा था। इसी भरोसे में आकर पीड़ित ने और रकम देना जारी रखा।
2024-25 में फिर मांगे लाखों रुपए
दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच आरोपियों ने फिर से रकम की मांग की और अलग-अलग तारीखों में यूपीआई, बैंक ट्रांसफर और NEFT के जरिए पैसे जमा कराए गए। पीड़ित के अनुसार, कुल मिलाकर करीब 15 लाख रुपए 18 अलग-अलग ट्रांजेक्शन में आरोपियों के खातों में ट्रांसफर किए गए। पीड़ित की शिकायत पर तोरवा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
