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CG Kanker District: कांकेर का है गौरवशाली इतिहास,जानिए कांकेर के बारे में पूरी जानकारी

CG Kanker District:कांकेर जिला राज्य की राजधानी रायपुर से लगभग 140 किलोमीटर दूर स्थित है और यहां की पहाड़ी सुंदरता और बहती नदियां जिले के आकर्षण का मुख्य कारण हैं. कांकेर नदियों और पहाड़ों की गोद में बसा हुआ है, और यहां से पांच प्रमुख नदियां बहती हैं- महानदी, दूध नदी, हटकुल नदी, सिंदूर नदी और तुरु नदी, जो जिले की जलवायु और कृषि के लिए महत्वपूर्ण हैं.आइए जानते हैं कांकेर जिले की पूरी जानकारी

कांकेर का है गौरवशाली इतिहास,जानिए कांकेर के बारे में पूरी जानकारी
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By Anjali Vaishnav

CG Kanker District: कांकेर (Kanker), छत्तीसगढ़ राज्य का एक प्रमुख जिला है, जो नक्सलवाद से प्रभावित होने के बावजूद अपनी सांस्कृतिक धरोहर, प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यह जिला राज्य की राजधानी रायपुर से लगभग 140 किलोमीटर दूर स्थित है और यहां की पहाड़ी सुंदरता और बहती नदियां जिले के आकर्षण का मुख्य कारण हैं. कांकेर नदियों और पहाड़ों की गोद में बसा हुआ है, और यहां से पांच प्रमुख नदियां बहती हैं- महानदी, दूध नदी, हटकुल नदी, सिंदूर नदी और तुरु नदी, जो जिले की जलवायु और कृषि के लिए महत्वपूर्ण हैं.आइए जानते हैं कांकेर जिले की पूरी जानकारी

कांकेर का इतिहास

कांकेर(Kanker) का इतिहास पाषाण युग से जुड़ा हुआ है. यहां के गोटीटोला, खैरखेड़ा और चंदेली जैसे स्थानों पर पुरापाषाण काल के शैल चित्र पाए गए हैं. इन चित्रों से यह प्रमाणित होता है कि इस क्षेत्र में प्राचीन मानव सभ्यता का अस्तित्व था. कांकेर का उल्लेख रामायण और महाभारत में भी मिलता है, जहां इसे दंडकारण्य वन के रूप में दर्शाया गया है. यह क्षेत्र प्राचीन ऋषियों की तपोभूमि भी रहा है, जहां कंक, लोमेश, श्रृंगी और अंगिरा जैसे ऋषियों ने तपस्या की थी.

कांकेर पर सातवाहन, नाग, वाकाटक, गुप्त, नल और चालुक्य वंशों का शासन रहा है. मध्यकाल में सोम, कंदरा और चंद्र वंशों ने भी यहां शासन किया. इस क्षेत्र में बौद्ध धर्म का प्रभाव छठी शताब्दी ईसा पूर्व से ही दिखाई देने लगा था. 1800 ई. से पहले कांकेर रियासत के राजा धर्म देव ने गढ़िया पहाड़ पर अपनी राजधानी स्थापित की थी, जो बाद में कांकेर शहर में स्थानांतरित की गई.

कांकेर में स्वतंत्रता संग्राम की भूमिका

कांकेर(Kanker) का इतिहास स्वतंत्रता संग्राम से भी जुड़ा हुआ है. 1857 के पहले कांकेर में परलकोट विद्रोह हुआ था, जिसे 1825 में आदिवासियों के नेतृत्व में अंग्रेजों और मराठों के खिलाफ शुरू किया गया था. जमींदार गेंद सिंह के नेतृत्व में आदिवासियों ने अंग्रेजों और मराठा अधिकारियों के खिलाफ युद्ध छेड़ा था. हालांकि, यह विद्रोह भी कुचला गया था और गैंद सिंह को फांसी दे दी गई थी.

इसके अलावा, कांकेर के ठाकुर रामप्रसाद पोटाई को बस्तर का गांधी माना जाता है. पं. नेहरू ने उनसे प्रभावित होकर उन्हें भारतीय संविधान सभा का सदस्य बनाया था. डॉ. पोटाई को 1950 में कांकेर का पहला मनोनीत सांसद बनने का भी सम्मान प्राप्त था.

कांकेर पहले बस्तर जिले का हिस्सा था, लेकिन 1998 में बस्तर जिले के उत्तरी भाग को अलग कर कांकेर जिला बनाया गया था. कांकेर का अधिकांश हिस्सा नक्सलवाद के प्रभाव में रहा है, जिससे यहां का लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र अतिसंवेदनशील बना हुआ है. नक्सलियों की गतिविधियों को नियंत्रित करने के प्रयास अब भी जारी हैं, और इस क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है. हालांकि, विकास के लिहाज से कांकेर ने कुछ कदम उठाए हैं और यहां के लोग अपने संसाधनों को बेहतर तरीके से उपयोग करने की दिशा में काम कर रहे हैं.

कांकेर में कृषि

कांकेर जिले में धान, मक्का, कोदो-कुटकी और अन्य छोटे अनाज की खेती प्रमुख रूप से होती है, इसके साथ ही दलहन (तुअर, कुल्थी), तिलहन (मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी), और विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ भी उगाई जाती हैं. यहां आम और केले जैसे फल भी पैदा होते हैं, जबकि कुछ किसान हल्दी और जिमी कंद की खेती भी करते हैं. जिले में सेमियालता और कुसुम वृक्ष में लाख उत्पादन मॉडल को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया गया है. इसके अलावा, कांकेर के कुछ स्थानों पर जनजातियाँ मरहम या डिप्पा खेती का अभ्यास करती हैं, जिसमें वे बरसात के मौसम से पहले पेड़ों को काटकर जंगल की जमीन पर खेती करते हैं.

कांकेर की जनसंख्या और प्रशासन

कांकेर(Kanker) जिले का क्षेत्रफल 6,432 वर्ग किमी है और यहां की जनसंख्या लगभग 7,48,941 है. जिले का जनसंख्या घनत्व 120 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है, जबकि लिंगानुपात 1007 है. जिले में साक्षरता दर 70.97% है, जो विकास के दिशा में एक सकारात्मक संकेत है.

कांकेर जिले में सात तहसीलें हैं: कांकेर, चारामा, नरहरपुर, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़, दुर्गुकोंदल, और कोयलीबेडा. यहां तीन विधानसभा क्षेत्र हैं- भानुप्रतापपुर (ST), अंतागढ़ (ST), और कांकेर (ST).

कांकेर के पर्यटन स्थल

कांकेर(Kanker) सिर्फ एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर ही नहीं, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है. यहां के प्रमुख आकर्षण स्थलों में शामिल हैं:

1. कांकेर पैलेस – यह महल 12वीं शताब्दी का है और यहां के शाही परिवार का निवास स्थान था. अब इस महल का एक हिस्सा होटल में बदल चुका है, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है.

2. चर्रे-मर्रे जलप्रपात – यह जलप्रपात अपनी सुंदरता और प्राकृतिक नजारों के लिए प्रसिद्ध है.

3. मलांजकुडूम झरना – यह झरना भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है.

4. गड़िया पर्वत – यह पर्वत एक ऐतिहासिक स्थल है, जहां एक गुप्त गुफा और तालाब है, जिसमें पानी कभी कम नहीं होता.

5. मां शिवानी मंदिर – इस मंदिर में मां काली और मां दुर्गा का एकाकार रूप देखने को मिलता है.

6. परसु तोला – यहां पर बोटिंग और सर्फिंग का आनंद लिया जा सकता है.

7. सीता नदी वन्यजीव अभ्यारण्य – प्रकृति प्रेमियों के लिए यह एक प्रमुख स्थल है, जहां वन्यजीवों को देखा जा सकता है.

FAQS

प्रश्न 1. कांकेर जिले में कितनी तहसीलें हैं?

उत्तर: कांकेर जिले में कुल 7 तहसीलें कांकेर, चारामा, नरहरपुर, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़, दुर्गुकोंदल, कोयलीबेडा हैं.

प्रश्न 2. कांकेर जिला कब बना था?

उत्तर: कांकेर को 1998 में जिला घोषित किया गया.

प्रश्न 3. कांकेर जिले के कलेक्टर कौन है?

उत्तर: कांकेर जिले का वर्तमान कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर हैं

प्रश्न 4. कांकेर का पिन नंबर क्या है?

उत्तर: कांकेर का पिन कोड 494334 है.

प्रश्न 5. कांकेर का पुराना नाम क्या था?

उत्तर: काँकेर का पुराना नाम शीला और तामपत्र लेखों में काकरय, काकैर्य, कंकर व काँकेर बताया गया है

Anjali Vaishnav

अंजली वैष्णव मैंने छत्तीसगढ़ के कल्याण कॉलेज भिलाई से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म करने के बाद रायपुर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में M.sc Electronic Media की पढ़ाई की. इस दौरान मैने 2021 से TCP News, फिर TV 24 MPCG में बतौर कंटेट राइटर और बुलेटिन प्रोड्यूसर का कार्य किया, वर्तमान में मैं NPG.NEWS में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं, कंटेंट राइटिंग के साथ मुझे रिपोर्टिंग करना पसंद है.

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