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CG Highcourt News: हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: वेतन निर्धारण सरकार की जिम्मेदारी, कर्मचारियों की जेब से नहीं की जा सकती रिकवरी

CG Highcourt News: हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि विभागीय गलती के कारण कर्मचारियों को अधिक वेतन का भुगतान हो गया हो तो उन कर्मचारियों से अधिक वेतन की वसूली नहीं की जा सकती।

CG Highcourt News: हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: वेतन निर्धारण सरकार की जिम्मेदारी
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By Radhakishan Sharma

CG Highcourt News: बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट ने राज्य के तृतीय श्रेणी शासकीय कर्मचारियों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि विभागीय गलती के कारण किसी कर्मचारी को अधिक वेतन प्राप्त हुआ है, तो उससे वह राशि वापस नहीं ली जा सकती। बेंच ने दुर्ग जिले के बघेरा एसटीएफ में पदस्थ आरक्षक दिव्य कुमार साहू एवं अन्य कर्मियों से वसूली किए जाने के आदेश को निरस्त कर दिया है।

यह था मामला

आरक्षक दिव्य कुमार साहू सहित अन्य कर्मचारियों के वेतन निर्धारण में विभागीय स्तर पर त्रुटि हो गई थी, जिसके कारण उन्हें तय वेतन से अधिक भुगतान किया गया। इस गलती का संज्ञान लेने के बाद पुलिस अधीक्षक, बघेरा ने आदेश जारी कर उक्त राशि की वसूली उनके वेतन से शुरू कर दी। इस पर आपत्ति जताते हुए कर्मचारियों ने अधिवक्ता अभिषेक पांडेय एवं स्वाति कुमारी के माध्यम से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने कर्मचारियों के पक्ष में निर्णय देते हुए वसूली आदेश को निरस्त कर दिया था। राज्य सरकार ने इस निर्णय के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की थी।

डिवीजन बेंच ने क्या कहा

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी. गुरु की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया। बेंच ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी से वह राशि वापस नहीं ली जा सकती जो विभागीय चूक के कारण अधिक मिली हो। आरक्षक की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट के State of Punjab vs. Rafiq Masih (2015) के ऐतिहासिक निर्णय का हवाला दिया, जिसमें साफ कहा गया है कि यदि तृतीय या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को अधिक वेतन विभागीय गलती के कारण मिला हो, तो उस वेतन की वसूली नहीं की जा सकती।

डिवीजन बेंच ने इस तर्क को स्वीकारते हुए राज्य शासन की अपील को खारिज कर दिया और कहा कि कर्मचारियों से इस प्रकार की वसूली न केवल अनुचित है, बल्कि यह संविधान प्रदत्त आर्थिक न्याय के सिद्धांतों के भी विपरीत है।

ब्याज सहित राशि लौटाने का निर्देश

डिवीजन बेंच ने यह भी निर्देश दिया कि यदि कर्मचारियों से पहले ही कोई राशि वसूली गई है, तो उसे 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस किया जाए। कोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि किसी भी कर्मचारी को विभागीय गलती की सजा नहीं दी जा सकती। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वेतन निर्धारण में गलती न हो, और यदि हो भी, तो उसकी भरपाई कर्मचारी की जेब से नहीं की जा सकती।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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