सड़क हादसे में पीड़ितों को हाई कोर्ट के फैसले से मिलेगी राहत, कोर्ट ने कहा, डेडलाइन के आधार पर बीमा कंपनियां दावा नहीं कर सकेंगी खारिज...

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Bilaspur High Court: सड़क हादसों के पीड़ितों और परिजनों के लिए हाई कोर्ट का फैसला राहत देने वाला है। आमतौर पर यह शिकायत मिलती है, क्षतिपूर्ति के लिए दावा करने में विलंब होने पर बीमा कंपनियों क्लेम देने से साफताैर पर इंकार कर देती है। अब ऐसा नहीं होगा।

बिलासपुर ।10 अप्रैल 2026| सड़क हादसों के पीड़ितों और परिजनों के लिए हाई कोर्ट का फैसला राहत देने वाला है। आमतौर पर यह शिकायत मिलती है, क्षतिपूर्ति के लिए दावा करने में विलंब होने पर बीमा कंपनियों क्लेम देने से साफताैर पर इंकार कर देती है। अब ऐसा नहीं होगा। पीड़ितों और परिजनों को राहत देते हुए हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, समय सीमा के आधार पर बीमा कंपनियां पीड़ितों को क्षतिपूर्ति देने से मना नहीं कर सकती। पीड़ितों को तकनीकी कारणों का हवाला देकर न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता।

बीमा कंपनियों की याचिकाएं हाई कोर्ट ने की खारिज

श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, चोलामंडलम एमएस. जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी,बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, मैग्मा एचडीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, इफको टोक्यो नरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और वाहन मालिकों ने 40 से अधिक सिविल रिवीजन याचिकाएं लगाई थीं, इसमें तर्क दिया था, मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 166 (3) के तहत समय सीमा बीत जाने के बाद क्लेम के आवेदनों की सुनवाई का अधिकार ट्रिब्यूनल के पास नहीं है।

हाई कोर्ट ने बीमा कंपनियों के तर्कों को खारिज करते हुए कहा है, पीड़ितों को केवल समय सीमा जैसी तकनीकी कारणों से न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। हालांकि बीमा कंपनी और आवेदकों को यह छूट रहेगी कि सुप्रीम कोर्ट के आगामी फैसले को ट्रिब्यूनल के सामने रख सकें।

ट्रिब्यूनल को सुनवाई जारी रखने दिया निर्देश, आदेश को लेकर ये क्या

हाई कोर्ट ने मोटर दुर्घटना क्लेम ट्रिब्यूनल्स को निर्देश दिया है, वे इन याचिकाओं पर कानून के अनुसार सुनवाई जारी रखें। चूंकि यह कानूनी मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए हाई कोर्ट ने कहा है, जब तक शीर्ष अदालत से अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक ट्रिब्यूनल कोई अंतिम आदेश पारित नहीं करेगा।

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