CG बोर्ड बनाम CBSE, CG के इस जिले में अभिभावकों ने कलेक्टर के नाम लिखा खुला पत्र, सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर हो रहा वायरल

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बिलासपुर। 7 अप्रैल 2026| छत्तीसगढ़ में सीजी बोर्ड के नाम पर सीबीएसई पाठ्यक्रम में एडमिशन और इसके नाम पर पालकों से वसूली जा रही मोटी फीस का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। अभिभावकों के बने वाट्सएप ग्रुप के अलावा सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म पर अब यह बहस का मुद्दा बन गया है। छत्तीसगढ़ बिलासपुर के अभिभावकों ने कलेक्टर संजय अग्रवाल के नाम पर सोशल मीडिया में खुला पत्र लिखा है। इसमें पैरेंट्स के नाम सीबीएसई के नाम पर प्राइवेट स्कूल प्रबंधन द्वारा की जा रही धोखाधड़ी का उल्लेख करते हुए स्कूल की मान्यता समाप्त करने और प्राइवेट स्कूल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
पढ़िए अभिभावकों ने कलेक्टर के नाम खुला पत्र में क्या लिखा है?
बिलासपुर के समस्त अभिभावकों की ओर से यह खुला पत्र अत्यंत पीड़ा और आक्रोश के साथ आपको संबोधित है। पिछले एक माह पूर्व शहर के कुछ नामी निजी स्कूलों में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ था। सीजी बोर्ड की मान्यता लेकर सीबीएसई CBSE के नाम पर प्रवेश दिया जा रहा था। इस गंभीर लापरवाही और धोखाधड़ी का खामियाजा सैकड़ों मासूम बच्चों को भुगतना पड़ा। उन्हें एक ही सत्र में दो बार वार्षिक परीक्षा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह मानसिक और शैक्षणिक उत्पीड़न का भी मामला है। स्थिति इतनी विकट हो गई थी कि अभिभावकों को आधी रात को आपके बंगले का घेराव करना पड़ा। माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर सड़कों पर खड़े रहे, लेकिन आज तक ठोस कार्रवाई के बजाय केवल आश्वासन ही मिला है। यह प्रश्न अब केवल एक घटना का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता का है।
प्रशासनिक शक्ति की दिलाई याद
यदि जिला प्रशासन ठान ले, तो किसी भी स्कूल प्रबंधन की यह हिम्मत नहीं हो सकती कि वह नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाए। लेकिन वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि निजी स्कूल संचालक आज भी बेखौफ हैं।आज भी बिलासपुर में खुलेआम मनमानी जारी है और अत्यधिक फीस वसूली जा रही है। महंगी और अनावश्यक किताबें थोप दी जा रही हैं। यूनिफॉर्म के नाम पर निश्चित दुकानों से खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है,और अभिभावकों को आर्थिक रूप से शोषित किया जा रहा है।
अभिभावकों ने इन मांगों पर दिया जोर
जब एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है, तब भी अब तक कठोर और उदाहरणात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि भविष्य के साथ खिलवाड़ है। हम सभी अभिभावक आपसे मांग करते हैं, फर्जी तरीके से CBSE के नाम पर चल रहे स्कूलों पर तत्काल FIR दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए, जिले के सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची सार्वजनिक की जाए, किताबों, यूनिफॉर्म और फीस की मनमानी पर तत्काल रोक लगे। दोषी स्कूल प्रबंधन के खिलाफ ऐसी कार्रवाई हो, जो पूरे प्रदेश में उदाहरण बने। आज जरूरत केवल आदेशों की नहीं, बल्कि जमीनी कार्रवाई की है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो “शिक्षा का अधिकार” केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा और आम नागरिक का भरोसा प्रशासन से पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
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