CG BJP Politics: बिलासपुर में झंडा फहराने वाले दूसरे सीएम होंगे विष्णुदेव साय, जानिए क्यों आ रहे यहां?
CG BJP Politics: छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 23 साल के इतिहास में यह दूसरी मर्तबे होगा जब मुख्यमंत्री बिलासपुर में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ के दूसरे सीएम होंगे जो बिलासपुर के पुलिस मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद छत्तीसगढ़ के पहले सीएम अजीत जोगी वर्ष 2001 से लेकर 2003 तक गणतंत्र दिवस के अवसर पर बिलासपुर में ही राष्ट्रीय ध्वज फहराते रहे हैं। पूर्व सीएम अजीत जोगी का बिलासपुर के प्रति लगाव जगजाहिर था। जानिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बिलासपुर में झंडा फहराने क्यों आ रहे हैं।

CG BJP Politics: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 23 साल के इतिहास में यह दूसरी मर्तबे होगा जब मुख्यमंत्री बिलासपुर में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ के दूसरे सीएम होंगे जो बिलासपुर के पुलिस मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद छत्तीसगढ़ के पहले सीएम अजीत जोगी वर्ष 2001 से लेकर 2003 तक गणतंत्र दिवस के अवसर पर बिलासपुर में ही राष्ट्रीय ध्वज फहराते रहे हैं। पूर्व सीएम अजीत जोगी का बिलासपुर के प्रति लगाव जगजाहिर था। 23 बाद न्यायधानी में झंडा फहराने आ रहे मुख्यमंत्री विष्णुदेव के प्रवास और बने कार्यक्रम को लेकर अब अटकलें लगाई जाने लगी है।
सीएम विष्णुदेव साय के प्रवास के इसके पीछे जो बातें आ रही है और जैसाी चर्चा हो रही है वह भी कम दिलचस्प नहीं है। चर्चा तो इस बात की हो रही है, जिले में दिग्गज नेताओं के बीच चरम पर पहुंची गुटीय राजनीति और इसी अंदाज में उभरे मनभेद को उनके प्रवास के पीछे का बड़ा कारण माना जा रहा है। बताते हैं कि सत्ता व संगठन से जुड़े दिग्गज नेता व रणनीतिकार यह कतई नहीं चाहते कि राष्ट्रीय पर्व पर गुटबाजी चरम पर पहुंचे और सार्वजनिक रूप से इसका प्रदर्शन हो।
परंपरा के अनुसार गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजधानी में राज्यपाल राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं और परेड की सलामी लेते हैं। राज्यपाल के राजधानी के कार्यक्रम में उपस्थिति के चलते सीएम को प्रदेश के अन्य जिलों में जाना पड़ता है। जब अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे तब वे अपने कार्यकाल के तीनों टर्म में गणतंत्र दिवस के अवसर पर बिलासपुर के कार्यक्रम में शामिल हुआ करते थे। यह दूसराअवसर होगा जब जगदलपुर या अन्य जिला मुख्यालय जाने के बजाय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय न्यायधानी की ओर रुख कर रहे हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर सीएम के बिलासपुर प्रवास को लेकर अटकलबाजी का दौर आज से शुरू हो गया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने टीएल की मीटिंग में मुख्यमंत्री के प्रवास और उनके अनुरुप गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियों को लेकर मातहत अफसरों को दिशा निर्देश जारी किया है। कलेक्टर के निर्देश के बाद से ही प्रशासनिक अमले तो चर्चा हो रही है, सियासी हलकों में भी अटकलबाजी का दौर शुरू हो गया है।
सत्ताधारी दल से लेकर विपक्ष के दिग्गजों के बीच एक ही बात की चर्चा हो रही है कि आखिर मुख्यमंत्री को बिलासपुर आने की जरुरत क्यों पड़ गई। सीएम के बिलासपुर आने का निर्णय कहें या फिर संगठन का सीधेतौर पर हस्तक्षेप। संगठन के हस्तक्षेप के पीछे का कारण भी पुख्ता है। बीते कुछ दिनों पहले न्यायधानी में सियासीतौर पर जो कुछ घटा, उसकी चर्चा न्यायधानी से लेकर राजधानी या यूं कहें कि छत्तीसगढ़ में चर्चा हो रही है। हुआ भी कुछ ऐसा कि चर्चा होना स्वाभाविक है। आमतौर पर कार्यकर्ता से लेकर आम जनता तक भाजपा की छवि अनुशासन को लेकर बेहतर रही है। अनुशासनित पार्टी और इसी अनुरुप कार्यकर्ताओं का व्यवहार। बीते दिनों जो कुछ सियासत में घटा वह किसी भी नजरिए से ठीक नहीं कहा जा सकता। राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद से लेकर आजतलक जिले की राजनीति में कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है। गुटीय राजनीति चरम पर है। दिग्गजों के बीच मतभेद तो छोड़िए धीरे-धीरे मतभेद मनभेद में बदल गया है। आपसी कटुता और गुटीय संघर्ष इतना कि कार्यकर्ता हैरान हैं कि वे छोटे-छोटे काम को लेकर जाएं तो जाएं कहां। जिले में जिनके हाथों में कमान है,वहां परिवारवाद इस कदर हावी है कि आम कार्यकर्ता के लिए जगह ही नहीं है।
सकरी की सभा और आमंत्रण को लेकर उभरे मतभेद
तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सकरी में आयोजित लोकार्पण व शिलान्यास समारोह की तैयारी पूरी हो गई थी। आमंत्रण पत्र बंट गया था। सभा की शुरुआत होने वाली थी कि एनवक्त पर दिल्ली से फोन आया और कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के बंगले से बिलासपुर नगर निगम कमिश्नर को फोन आया और मंत्री की गैरमौजूदगी में हो रहे कार्यक्रम को लेकर नाराजगी जताई। इसके तत्काल बाद कार्यक्रम को कैंसिल कर दिया गया। हालांकि जनसंपर्क विभाग ने अपने आधिकारी वाट्सएप ग्रुप में कार्यक्रम स्थगित करने के पीछे और कार्यक्रमों को शामिल करने की बात कही गई थी।
युवा महोत्सव के कार्यक्रम के दौरान खुलकर सामने आई कटुता
युवा महोत्सव के तहत पुलिस मैदान कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम स्थल में अतिथियों के लिए की गई बैठक व्यवस्था में पूर्व मंत्री व भाजपा के कद्दावर नेता अमर अग्रवाल के लिए पीछे की कतार में कुर्सी आरक्षित की गई थी। इसे लेकर कार्यक्रम स्थल में ही जमकर विवाद हुआ था। तब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को हस्तक्षेप करना पड़ा था। बीते दो साल के दौरान में जिले में जिस तरह की घटनाएं सत्ताधारी दल में घट रही है,इसके पहले कभी नहीं हुआ।
