CG विधानसभा बजट सत्र 2026: विधायक चंद्राकर ने उद्योग मंत्री से पूछा कितने गिग वर्करों ने की है आत्महत्या,चंद्राकर के सवालों से घिरे रहे मंत्री....
CG Vidhansabha Budget Session 2026: विधायक अजय चंद्राकर ने देश में स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकइट, रैपिडो (गिग वर्क) जैसी ऑनलाइन सर्विस में काम कर रहे युवाओं और उसकी सुरक्षा को लेकर सवाल किए। चंद्राकर ने पूछा,इस तरह की कितनी कंपनियां छत्तीसगढ़ में काम कर रही है।

इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News
रायपुर।25 फरवरी 2026| विधायक अजय चंद्राकर ने देश में स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकइट, रैपिडो (गिग वर्क) जैसी ऑनलाइन सर्विस में काम कर रहे युवाओं और उसकी सुरक्षा को लेकर सवाल किए। चंद्राकर ने पूछा,इस तरह की कितनी कंपनियां छत्तीसगढ़ में काम कर रही है। कितने छत्तीसगढ़ के युवा काम कर रहे हैं। सर्विस के दबाव में एक्सीडेंट में युवाओं की मौत हो रही है,दबाव ऐसा कि यूथ सुसाइड कर रहे हैं। कोई नियम है भी नहीं। चंद्राकर के इस तीखे सवाल से उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन पूरे समय घिरे रहे। जवाब के बजाय वे केंद्र सरकार के अधिनियम और नियमों का हवाला देते रहे।
अजय चंद्राकर इस तीखे सवाल से मंत्री देवांगन पूरे समय घिरे रहे। आलम ये कि उनको जवाब देते नहीं बन रहा था। चंद्राकर ने पूछा, प्रदेश में स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकइट, रैपिडो (गिग वर्क) इस तरह की कितनी कंपनियां कार्यरत हैं? इन कंपनियों को कार्य करने हेतु अनुमति देने की प्रक्रिया क्या है? इन कंपनियों में कितने गिग वर्कर कार्यरत हैं? उनमें से छत्तीसगढ़ के कितने हैं? क्या इसके संबंध में कोई नियम-निर्देश हैं? (ख) क्या प्रश्नांक (क) गिग वर्करों की भर्ती हेतु शैक्षणिक या अन्य योग्यताएं निर्धारित की गयी हैं? क्या इनके वेतन, श्रमावधि एवं सामाजिक सुरक्षा एवं आर्थिक सहायता हेतु नियम-शर्ते लागू होती हैं? इसकी निगरानी करने के लिये क्या व्यवस्था है एवं किस स्तर के अधिकारी द्वारा इनकी देख-रेख की जाती है?
मंत्री ने दिया ये जवाब
प्रदेश में श्रम विभाग अंतर्गत स्विगी, जोमैटो ब्लिंक इट, रेपिडो जैसे कंपनियां पंजीकृत नहीं है। उप मुख्य श्रमायुक्त (केन्द्रीय) तथा कल्याण आयुक्त (केन्द्रीय) द्वारा इस प्रकार की कंपनी पंजीकृत नहीं होने की जानकारी दी गयी है। उक्त कंपनियों के श्रम विभाग अंतर्गत पंजीयन नहीं होने के कारण इनमें कार्यरत गिग वर्कर की कुल संख्या तथा उनमें से छत्तीसगढ़ के गिग वर्करों की संख्या की जानकारी उपलब्ध नहीं है। श्रम विभाग द्वारा प्रवर्तित श्रम अधिनियम अंतर्गत उक्त कंपनियों को कार्य करने की अनुमति देने संबंधी कोई प्रक्रिया निर्धारित नहीं है। गिग वर्करों की भर्ती हेतु शैक्षणिक या अन्य योग्यताएं, वेतन एवं समयावधि निर्धारित करने का कोई प्रावधान नहीं है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत भारत सरकार श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा गिग एवं प्लेटफार्म वर्करों की सामाजिक सुरक्षा हेतु राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा मण्डल का गठन केन्द्रीय सरकार द्वारा किये जाने का प्रावधान किया गया है।
छत्तीसगढ़ के युवाओं के हो रहे शोषण पर रोक लगाना जरुरी
मंत्री के जवाब के बाद विधायक अजय चंद्राकर ने कहा,यदि इसे अधिनियमित कर दें तो लाखों लोगों को राेजगार मिलेगा, संरक्षण भी मिलेगा। 2020 का उल्लेख किया है तो गिग वर्कर कौन सी श्रेणी में आएंगे संगठित या असंगठित श्रेणी में। 2020 के अधिनियम के बाद अब तक नियम नहीं बने हैं, जब तक अधिनियम नहीं बनेंगे छत्तीसगढ़ के बच्चे शोषण का शिकार होते रहेंगे, कितने गिग वर्कर काम कर रहे हैं किसी को नहीं मालूम। शोषण पर रोक लगाना निहायत जरुरी है। कितनी कंपनिया छत्तीसगढ़ में काम कर रही है सरकार को पता ही नहीं है।
नेता प्रतिपक्ष ने ली चुटकी
नेता प्रतिपक्ष नेता प्रतिपक्ष ने चुटकी लेते हुए कहा, सभापति महोदय, ये लखनलाल से संतुष्ट होने वाले नहीं है आप ही संतुष्टि की कोई दवा दे दीजिए। इस पर मंत्री लखनलाल ने कहा, यह चिंता का विषय है, ये दोनों श्रेणी में नहीं आ रहे हैं। गिग वर्कर के लिए केेंद्र सरकार नया अधिनियम बन रहा है उसका अनुसरण छत्तीसगढ़ में करेंगे। केंद्र के अधीन ही नियम बनाएंगे।
