रेलवे अफसर पर भड़के हाई कोर्ट ने कहा- एक ही मुद्दे पर बार-बार याचिका दायर करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग...

रेलवे अफसर पर भड़के हाई कोर्ट ने कहा- एक ही मुद्दे पर बार-बार याचिका दायर करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग...
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इमेज सोर्स- NPG News

Bilaspur High Court: रिश्वत लेते सीबीआई के हाथों रंगे हाथ पकड़ाए रेलवे अफसर पर नाराजगी जताते हुए हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने कहा, एक बार जब किसी मुद्दे पर अदालत का निर्णय साफ हो गया है तब दोबारा उसी मुद्दे को नहीं उठाया जा सकता। याचिका को रद्द करते हुए हाई कोर्ट ने कहा, एक ही मुद्दे पर बार-बार याचिका दायर कर न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

बिलासपुर।13 अप्रैल 2026| रिश्वत लेते सीबीआई के हाथों रंगे हाथ पकड़ाए रेलवे अफसर पर नाराजगी जताते हुए हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने कहा, एक बार जब किसी मुद्दे पर अदालत का निर्णय साफ हो गया है तब दोबारा उसी मुद्दे को नहीं उठाया जा सकता। याचिका को रद्द करते हुए हाई कोर्ट ने कहा, एक ही मुद्दे पर बार-बार याचिका दायर कर न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में फंसे दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के एक अधिकारी की याचिका पर जस्टिस संजय एस अग्रवाल व जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने रेलवे अफसर की याचिका को खारिज कर दिया है। डिवीजन बेंच ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, विभागीय जांच के लिए अपनी पंसद के अधिकारी के लिए लड़ना और एक ही मसले पर बार-बार याचिका दायर कर कानूनी प्रक्रिया का सीधेतौर पर दुरुपयोग है। रेलवे अफसर की याचिका को रद्द करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा, भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में जांच समय पर पूरी होनी चाहिए ताकि जनता का संस्थागत प्रक्रियाओं पर भरोसा बना रहे।

पढ़िए क्या है मामला?

SECR दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में पदस्थ सहायक मंडल बिजली इंजीनियर पीयूष मिश्रा को 1 अगस्त 2015 को CBI ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। सीबीआई की कार्रवाई के बाद रेलवे ने 3 अगस्त 2016 को उसके खिलाफ मेजर पेनल्टी की चार्जशीट जारी की। रिश्वत के मामले में सीबीआई के हत्थे चढ़े अधिकारी ने जांच को लंबा खींचने के लिए रेलवे के ही रिटायर्ड अफसर एमवीडी. सत्यनारायण को डिफेंस असिस्टेंट बनाने की मांग की। रेलवे ने उनकी मांग को खारिज कर दिया। तब अफसर ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में मामला दायर किया। मामले की सुनवाई के बाद अधिकरण ने 2019 में उनकी मांग खारिज कर दी। अधिकरण के फैसले के बाद भी रेलवे अफसर द्वारा बार-बार आवेदन दायर करना और याचिका दायर कर जारी रखा। इस मामले में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने 12 नवंबर 2025 को आवेदन एक बार भी फिर खारिज कर दिया। अधिकरण के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

अफसर बाधा डालने की रणनीति अपना रहे

याचिका की सुनवाई जस्टिस संजय एस. अग्रवाल और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने कहा, जब मांग एक बार कानूनी तौर पर याचिका खारिज हो चुकी है, तो रेज ज्यूडिकाटा सिद्धांत के अनुसार उसी मुद्दे पर बार-बार याचिकाएं लगाना गलत है। वर्ष 2016 में जारी हुई चार्जशीट के बाद 10 साल बीत चुके हैं, लेकिन अफसर की बाधा डालने वाली रणनीति के कारण जांच अब तक पूरी नहीं हुई। अधिकारी अपनी पसंद के ही व्यक्ति को सहायक नियुक्त करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। यह कोई कानूनी अधिकार नहीं बल्कि नियमों के अधीन मिलने वाली सुविधा है।

पढ़िए क्या है रेज ज्यूडिकाटा सिद्धांत

रेज ज्यूडिकाटा सिद्धांत के अनुसार एक ऐसा मामला जिसका फैसला पहले ही सुनाया जा चुका है। यह सिद्धांत इस सार्वजनिक नीति पर आधारित है, मुकदमेबाजी का एक अंत होना चाहिए और एक ही विवाद को बार-बार न्यायालय में नहीं लाया जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने इसी सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा, जब किसी तथ्य या कानून के सवाल पर दो पक्षों के बीच कोर्ट फैसला सुना दे तो किसी भी पक्ष को भविष्य में उसी मामले को दोबारा उठाने की छूट नहीं दी जाती।

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