Bilaspur Highcourt News:इसलिए पत्नी को नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता, हाईकोर्ट ने खारिज की पत्नी की याचिका
Bilaspur Highcourt News: फैमिली कोर्ट द्वारा गुजारा भत्ता पाने की याचिका खारिज करने के खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि गुजारा भत्ता पाने की पहली शर्त यह है कि पति ने पत्नी को अलग रहने के लिए मजबूर किया हो या फिर पति से अलग रहने का कोई ठोस सबूत हो की वह किन परिस्थितियों में पति से अलग रहने को मजबूर है। ऐसा कोई कारण उपलब्ध नहीं होने पर पत्नी की गुजारा भत्ता पाने की याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है।

Bilaspur Highcourt News: बिलासपुर। भरण– पोषण से जुड़े एक केस में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बिना किसी ठोस और न्याय संगत कारण के यदि पत्नी अपने पति से अलग रह रही है तो वह गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं हो सकती। गुजारा भत्ता पाने के लिए पहले उसे न्याय संगत तथा ठोस कारण बताना होगा। इस अहम टिप्पणी के साथ चीफ जस्टिस ने पत्नी की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है ।
अंबिकापुर की रहने वाली महिला का विवाह 24 फरवरी 2019 को जमशेदपुर निवासी युवक के साथ सिक्ख रीति-रिवाजों से हुआ था। पत्नी का आरोप था कि विवाह के एक साल बाद ही ससुराल वालों ने उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। शादी में 30 तोला सोना और लाखों का सामान देने के बावजूद उसे मायके से पैसे लाने के लिए मजबूर किया जाता था। ननद और ससुराल वालों का के हस्तक्षेप के कारण घर में अक्सर विवाद होता था। इसके अलावा पत्नी ने पति पर चरित्र हनन करने, बांझपन का झूठा आरोप लगाने और इलाज न कराने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। आरोप लगाया कि नवंबर 2024 में पति उसे इलाज के बहाने मायके छोड़ गया और वापस नहीं ले गया।
7-8 दुकानों और मॉल का मालिक है पति
पत्नी ने फैमिली कोर्ट में पेश किए गए मामले में दावा किया था कि उसका पति जमशेदपुर में 7-8 दुकानों और एक मॉल का मालिक है, जबकि उसके पास आय का कोई साधन नहीं है। इसे देखते हुए उसे गुजारा भत्ता देने के निर्देश देने की मांग की गई थी। पति कोर्ट में पेश नहीं हुआ, जिसके कारण मामले में एकतरफा सुनवाई हुई। हालांकि फैमिली कोर्ट ने सबूतों के अभाव में 18 नवंबर 2025 को याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि पत्नी अलग रहने का कोई पर्याप्त कारण साबित नहीं कर पाई है।
हाई कोर्ट ने कहा- ठोस आधार के बिना गुजारा भत्ता नहीं:–
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि गुजारा भत्ता पाने की पहली शर्त यह है कि पति ने पत्नी को अलग रहने के लिए मजबूर किया हो या उसके पास अलग रहने का कोई वाजिब कारण हो। याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सकी कि वह किन परिस्थितियों में अलग रहने को मजबूर हुई। हाई कोर्ट ने इस आदेश की कॉपी संबंधित फैमिली कोर्ट को आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं।
क्या है बीएनएसएस की धारा 144:–
इस मामले में पत्नी याचिकाकर्ता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस, 2023 की धारा 144 के तहत गुजारा भत्ता की मांग की थी। यह पहले लागू सीआरपीसी की धारा 125 के समान है। यह कानून पत्नी, बच्चों और माता-पिता को गुजारा भत्ता का अधिकार देता है, जिससे वे निराश्रित न रहें। कानून के अनुसार पत्नी को गुजारा भत्ता तभी मिलता है जब वह यह साबित कर दे कि पति ने उसे उपेक्षित किया है या साथ रखने से मना किया है ।यदि पत्नी बिना किसी पर्याप्त कारण के अलग रह रही है, तो कानूनन वह गुजारा भत्ता की हकदार नहीं मानी जाती ।
