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Bilaspur Highcourt News: हाईकोर्ट ने कहा अवैध संबंध को नहीं माना जा सकता आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण का मामला, पति और गर्लफ्रेंड को दोषमुक्त करने के खिलाफ की गई अपील खारिज

Bilaspur Highcourt News:अवैध संबंधों के चलते आत्महत्या के मामले में हाईकोर्ट ने मृतिका के पति और गर्लफ्रेंड को दोषमुक्त करने के सत्र न्यायालय के फैसले के खिलाफ लगी याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अवैध संबंध नैतिक रूप से गलत है पर इससे आत्महत्या के लिए उकसाने का सीधा संबंध साबित नहीं हो रहा है। इस आधार पर ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया गया है।

CG Highcourt News
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By Radhakishan Sharma

Bilaspur Highcourt News: बिलासपुर। पति के अवैध संबंध से तंग आकर पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी। मामले में मृतिका के पति और गर्लफ्रेंड के खिलाफ आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण के मामले में धारा 306 का अपराध कायम किया गया था। सत्र न्यायालय ने पति और गर्लफ्रेंड को दोष मुक्त कर दिया था। जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपील की गई थी। सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा कि अवैध संबंध नैतिक रूप से गलत माने जा सकते हैं। पर जब तक आत्महत्या के लिए सीधा और स्पष्ट संबंध साबित ना हो 306 के लिए दोषी नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ की गई अपील हाई कोर्ट में खारिज कर दी गई।

यह था मामला

अभियोजन के अनुसार, कुंती की शादी वर्ष 2011 में रवि कुमार गायकवाड से हुई थी। संतान न होने, कम दहेज और अशिक्षित होने को लेकर प्रताड़ना के आरोप लगाए गए। साथ ही पति के कथित तौर पर एक महिला मित्र से अवैध संबंध होने की बात कही गई। 4 जून 2017 को कुंती की मृत्यु के बाद पति और महिला मित्र के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया। सत्र परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष प्रताड़ना या उकसावे का कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सका। अदालत ने माना कि आप साबित नहीं हुई इसलिए पति और उसकी गर्लफ्रेंड को दोष कर दिया गया। यह फैसला 22 जुलाई 2022 को महासमुंद सत्र न्यायालय ने दिया।

दोषमुक्ति के खिलाफ पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय श्याम अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल पति के अवैध संबंध को आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं माना जा सकता। अदालत में कहा कि इस अपराध में सजा के लिए प्रत्यक्ष उकसावा,गंभीर मानसिक क्रूरता और ठोस साक्ष्यों का होना जरूरी है। इसी आधार पर मृतिका के पति और उसकी गर्लफ्रेंड को धारा 306 से दोषमुक्त किया गया।

मृतिका ने छोड़ा था सुसाइड नोट

हाईकोर्ट के समक्ष मृतका का डायरी नोट भी रखा गया। अदालत ने कहा कि नोट से यह जाहिर होता है कि मृतका पति से प्रेम करती थी और महिला मित्र से नाराज थी, लेकिन किसी प्रकार के उकसावे या प्रत्यक्ष प्रताड़ना का उल्लेख नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि अवैध संबंध नैतिक रूप से गलत हो सकते हैं, लेकिन जब तक आत्महत्या से उनका सीधा और स्पष्ट संबंध साबित न हो, धारा 306 आईपीसी लागू नहीं होती। इनके आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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