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हाई कोर्ट का फैसला: एसपी द्वारा जारी विभागीय जांच कार्रवाई पर रोक: हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा....

Bilaspur High Court: हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है, आपराधिक प्रकरण और विभागीय जांच साथ-साथ नहीं चला सकते। इस टिप्पणी के साथ ही हाई कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए एसपी द्वारा जारी विभागीय जांच कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

Bilaspur High Court
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फोटो सोर्स- NPG News

By Radhakishan Sharma

बिलाससपुर।21 फरवरी 2026| हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है, आपराधिक प्रकरण और विभागीय जांच साथ-साथ नहीं चला सकते। हाई काेर्ट ने याचिकाकर्ता पुलिस आरक्षक के विरुद्ध एसपी द्वारा जारी विभागीय जांच कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

पीके मिश्रा पुलिस विभाग में जिला-बलौदाबाजार में आरक्षक के पद पर पदस्थ है। पदस्थापना के दौरान 28 मार्च 2025 को उनके विरूद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 331 (6), 310 (2) के तहत पुलिस थाना-खरोरा में अपराध पंजीबद्ध किया गया। इसके पश्चात् 08 जून 2025 को न्यायालय में थाना प्रभारी ने चालान पेश किया। इसी बीच 09 मई 2025 को पुलिस अधीक्षक, बलौदाबाजार-भाटापारा द्वारा आपराधिक प्रकरण में लगाए गए समान आरोपों पर उनके विरूद्ध विभागीय आरोप पत्र जारी कर विभागीय जांच कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई।

एसपी की कार्रवाई को चुनौती देते हुए आरक्षक पीके मिश्रा ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं वर्षा शर्मा के माध्यम से हाई कोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर की गई। मामले की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं वर्षा शर्मा सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया एवं अन्य विरूद्ध नीलम नाग एवं अन्य, कैप्टन एम.पाल एन्थेनी विरूद्ध भारत गोल्ड माइन्स लिमिटेड एवं अन्य, अविनाश सदाशिव भोसले विरूद्ध यूनियन ऑफ इंडिया के मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्ववर्ती फैसले में कहा है, यदि किसी शासकीय कर्मचारी के विरूद्ध आपराधिक मामला न्यायालय में विचाराधीन है, एवं समान आरोपों पर उसे आरोप पत्र जारी कर विभागीय जांच कार्यवाही संचालित की जा रही है। दोनों मामलों में अभियोजन साक्षी समान है। ऐसी स्थिति में प्राकृतिक न्याय के तहत् सर्वप्रथम अभियोजन साक्षियों का परीक्षण आपराधिक मामले में किया जाना चाहिये। ऐसा ना करने पर संबंधित न्यायालय में चल रही संपूर्ण आपराधिक कार्यवाही दूषित हो जाती है।

अधिवक्ता पांडेय ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता के मामले में आपराधिक मामले एवं विभागीय जांच कार्यवाही में अभियोजन साक्षी समान है। ऐसी स्थिति में न्यायालय में चल रही संपूर्ण आपराधिक कार्यवाही दूषित हो जाएगी। अधिवक्ता के तर्कों से सहमति जताते हुए व सुप्रीम कोर्ट के पूर्ववर्ती नियमों का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के विरुद्ध चल रही विभागीय कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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