Bilaspur High Court: पुलिस अत्याचार और गैर कानूनी रिमांड खत्म करते हैं जनता का भरोसा, हाई कोर्ट ने पीड़ित होटल संचालक को एक लाख रुपये मुआवजा का दिया निर्देश
Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ भिलाई के एक होटल संचालक को गैर कानूनी रिमांड पर लेने और मारपीट करने को हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने पीड़ित संचालक को 9 प्रतिशत ब्याज की दर से एक लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया हहै। कोर्ट ने राज्य सरकार को छूट दी है, चाहे तो वे राशि दोषी अधिकारियों से वसूली कर सकती है। पढ़िए हाई कोर्ट ने पीड़ित होटल कारोबारी की याचिका पर क्या फैसला सुनाया है।

Bilaspur High Court: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ भिलाई के एक होटल संचालक को गैर कानूनी रिमांड पर लेने और मारपीट करने को हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने पीड़ित संचालक को 9 प्रतिशत ब्याज की दर से एक लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया हहै। कोर्ट ने राज्य सरकार को छूट दी है, चाहे तो वे राशि दोषी अधिकारियों से वसूली कर सकती है।
होटल कारोबारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस की भूमिका पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि गैर कानूनी रिमांड और पुलिस अत्याचार से जनता का भरोसा खत्म होता है। इस तरह के कृत्य को माफ नहीं किया जा सकता। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है गैर कानूनी काम, गैर कानूनी रिमांड और पुलिस अत्याचार से आपराधिक न्याय प्रणाली में जनता के भरोस की नींव को ही खत्म कर देता है।
क्या है मामला
अधिवक्ता धीरज कुमार वानखेड़े के जरिये हाईकोर्ट में पेश याचिका के अनुसार याचिकाकर्ता आकाश कुमार साहू पिता रमाशंकर प्रसाद उम्र लगभग 30 वर्ष निवासी
होटल संचालक आकाश कुमार साहू ने अपने अधिवक्ता धीरज कुमार वानखेड़े जरिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। दायर याचिका में बताया है वह अवंतीबाई चौक, भिलाई, जिला- दुर्ग कोहका में होटल संचालित करता है।
8 सितंबर 2025 को पुलिस अधिकारी कुछ मेहमानों के संबंध में जांच करने के बहाने याचिकाकर्ता के होटल पहुंचे। पुलिस ने होटल रजिस्टर और पहचान दस्तावेजों की जांच की और उसके बाद होटल के एक कमरे में घुस गए। जहां पहले से एक महिला व एक पुरुष रह रहे थे। जिस वक्त पुलिस के अधिकारी होटल में घुसे उनके साथ महिला पुलिस नहीं थी। पुलिस अधिकारियों काे बताया गया कि होटल के कमरे में एक महिला व पुरुष हैं। मेहमानों को कमरे से बाहर लाकर बिना किसी कारण धमकाने लगे। मेहमानों को धमकाने के बाद पुलिस अधिकारी लौट गए, फिर कुछ समय बाद वापस लौटे और होटल स्टाफ पर सोने चांदी के गहने चोरी होने का झूठा आराेप लगाते हुए धमकाने लगे। पुलिस अफसरों को बताया कि होटल परिसर और भीतर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं,इसकी जांच की जा सकती है। सीसीटीवी फुटेज की जांच करने के बाद होटल के मैनेजर से मारपीट करने और होटल संचालक को बुलाने दबाव बनाया।
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में बताया कि जब वह होटल पहुंचा तो पुलिस अधिकारियों ने उसके साथ दुर्व्यवहार करने लगे। स्टाफ के सामने अपमानित किया। उनके परिजनों के खिलाफ अपमानजक और आपत्तिजनक जाति आधारित टिप्पणी भी करने लगे। याचिका के अनुसार पुलिस अफसरों ने उसे हिरासत में ले लिया और मारपीट भी की।
9 प्रतिशत ब्याज के साथ एक हजार रुपये मुआवजा का आदेश
पुलिस अधिकारियों द्वारा कानून से हटकर किए गए कार्य को लेकर डिवीजन बेंच ने गंभीरता से लिया है। डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता होटल संचालक को बतौर मुआवजा एक लाख रुपये 9 प्रतिशत ब्याज के साथ देने का निर्देश राज्य शासन को दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को छूट दी है कि चाहे तो एक लाख रुपये और ब्याज की राशि दोषी पुलिस अधिकारियों से वसूल सकती है।
डिवीजन बेंच की गंभीर टिप्पणी
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा, ऐसी घटनाएं कानून लागू करने वाली मशीनरी की विश्वसनीयता को कम करते है। इस तरह की घटना संवैधानिक शासन में नागरिकों के भरोसे को हिला कर रख देती है। कोर्ट ने राज्य सरकार को पुलिस कर्मियों को मानवाधिकारों के बारे में जागरूक करने, दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा, पुलिस बल के भीतर ऐसी बर्बर प्रथाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए जवाबदेह उपायों को लागू करने गंभीर कदम उठाने की जरुरत है। सरकार को इस दिशा में गंभीरता के साथ सोचना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने इन्हें बनाया गया पक्षकार
याचिकाकर्ता होटल संचालक ने राज्य सरकार, सचिव,गृह विभाग, पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज, पुलिस अधीक्षक दुर्ग, कलेक्टर दुर्ग, एसडीएम भिलाई, स्टेशन हाउस अधिकारी पुलिस स्टेशन- सुपेला, उप पुलिस स्टेशन प्रभारी अधिकारी स्मृति नगर, जिला-दुर्ग, गुरविन्द्र सिंह सिंघु थाना प्रभारी, स्मृति नगर, प्रमोद सिंह असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर, स्मृति नगर पुलिस, आशीष राजपूत कांस्टेबल, हर्षित शुक्ला कांस्टेबल, विवेक सिह कांस्टेबल, अजीत सिह कांस्टेबल, ओंकारेश्वर वैष्णव ड्राइवर, स्मृति नगर पुलिस स्टेशन को पक्षकार बनाया गया।
