Bilaspur High Court News: शिक्षिका के बेटे ने आरक्षक पिता की मौत के बाद मांगा बाल आरक्षक पद पर अनुकंपा नियुक्ति, हाई कोर्ट ने खारिज कर दी याचिका, कहा....
Bilaspur High Court News:आरक्षक पिता की मौत के बाद नाबालिग बेटे ने बाल आरक्षक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति मांगी थीं। हाई कोर्ट ने कहा...

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9 February 2026|बिलासपुर। हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति की मांग करते हुए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, मृतक शासकीय सेवक के परिवार का कोई भी सदस्य पहले से सरकारी नौकरी में है, तो दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता नहीं होगी। जस्टिस संजय के. अग्रवाल की सिंगल बेंच ने पुलिस विभाग के निर्णय को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी है।
सूरजपुर में पदस्थ आरक्षक (चालक) युवराज सिंह की सेवा के दौरान 18 दिसंबर 2018 को मृत्यु हो गई थी। मृत्यु के बाद उनकी पत्नी पार्वती बाई ने पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति की मांग करते हुए आवेदन पेश किया था। सूरजपुर पुलिस अधीक्षक ने 4 अक्टूबर 2019 को इस आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मयंक की मां पहले से ही पंचायत शिक्षिका के रूप में सरकारी सेवा में स्कूल शिक्षा विभाग में हो कार्यरत है। शिक्षा विभाग में उनका संविलियन चुका है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि पुलिस विभाग में नियुक्तियां 'छत्तीसगढ़ पुलिस रेगुलेशन' के नियम 60 के तहत है, इसलिए सामान्य प्रशासन विभाग का वह नियम यहां लागू नहीं होना चाहिए जो परिवार में सरकारी सदस्य होने पर नियुक्ति रोकता है। राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने कहा, शिक्षा विभाग भी राज्य शासन का ही हिस्सा है, इसलिए अलग मापदंड नहीं अपनाए जा सकते।
हाई कोर्ट ने कहा- सर्कुलर में स्पष्ट प्रावधान
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद कहा कि राज्य शासन के 29 अगस्त 2016 के सर्कुलर के नियम 60 बाल अर्दली की नियुक्ति के लिए प्राथमिकता की बात तो करता है, लेकिन इसका अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता से सीधा संबंध नहीं है। हाई कोर्ट ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता की मां पहले से नियमित सरकारी कर्मचारी हैं, इसलिए याचिकाकर्ता को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती।
