Bilaspur High Court: कर्मचारियों की खबर: हाई कोर्ट ने कहा- शासकीय कर्मियों को पदोन्नति से वंचित करना असंवैधानिक, पढ़िए हाई कोर्ट ने क्या सुनाया फैसला
Bilaspur High Court: पदोन्नति की मांग को लेकर एक कर्मचारी की याचिका पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा....

Bilaspur High Court: बिलासपुर। पदोन्नति की मांग को लेकर एक कर्मचारी की याचिका पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है, शासकीय कर्मियों को पदोन्नति से वंचित करना असंवैधानिक है। राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के लिए पदोन्नति का पर्याप्त अवसर सृजित करने के लिए बाध्य है। डिवीजन बेंच ने राज्य शासन को निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ता को ट्रेसर से पदोन्नति देने के लिए नियम में आवश्यक संशोधन कऐ व 6 माह के भीतर याचिकाकर्ता को पदोन्नति का अवसर प्रदान करें।
याचिकाकर्ता भयपाल सिंह कंवर की रायपुर नगर निगम में ट्रेसर के पद पर वर्ष 2003 में नियुक्ति हुई थी। नियुक्ति के समय सेवा भर्ती नियम 2007 प्रचलन में था, जिसके अनुसार ट्रेसर की पदोन्नति सहायक मानचित्रकार के रूप होती थी एवं बाद में 5 प्रतिशत पद उप-अभियंता के पद पर भी पदोन्नति के लिए तय किया गया था। वर्ष 2008 में राज्य शासन ने सेवा भर्ती नियम छ.ग. नगर पालिका (अधिकारीयों एवं कर्मचारीयों की नियुक्ति एवं सेवा की शर्ते) नियम 2018 अधिसूचित किया गया। नए नियमों के प्रभावशील होते ही ट्रेसर का पद समाप्त कर दिया गया एवं ट्रेसर से पदोन्नति का भी प्रावधान भी समाप्त हो गया। जिससे याचिकाकर्ता पदोन्नति के अवसर से पूर्णतः वंचित हो गया।
राज्य शासन द्वारा बनाए गए नए नियम की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता अजय श्रीवास्तव के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा, पदोन्नति के लिए विचार किया जाना कर्मचारी का मूलभूत अधिकार है एवं राज्य शासन कर्मचारी के लिए पर्याप्त पदोन्नति के अवसर सृजित करने के लिए बाध्य है। नए नियम से ट्रेसर का पद समाप्त कर दिया गया है, लिहाजा पदोन्नति का अवसर पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने कहा, नियम बनाना राज्य का विवेकाधिकार है। कर्मचारी के लाभ के लिए नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता है। मामले की सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा,
इस प्रकरण में पूर्व के नियम में ट्रेसर से पदोन्नति का प्रावधान था जिसे नये नियम में पूर्णतः समाप्त कर याचिकाकर्ता को पदोन्नति से वंचित कर दिया गया है पदोन्नति मूलभूत अधिकार नहीं है, किन्तु पदोन्नति के लिए विचार किया जाना कर्मचारी का मूलभूत अधिकार है।
डिवीजन बेंच ने कहा, पदोन्नति कर्मचारियों के कॅरियर में उन्नति और विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पदोन्नति से वंचित करने पर कर्मचारी में हताशा की भावना जागृत होती है। इसलिए राज्य को पर्याप्त पदोन्नति के अवसर उपलब्ध कराना चाहिए। डिवीजन बेंच ने राज्य शासन को निर्देशित किया याचिकाकर्ता को पदोन्नति देने नियमों में जरुरी संशोधन करें। इसके लिए राज्य शासन को कोर्ट ने छह महीने की मोहलत दी है।
