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Bilaspur High Court: घरेलू हिंसा अधिनियम के दुरुपयोग को लेकर हाई कोर्ट की सामने आई नाराजगी, डिवीजन बेंच ने JMFC कोर्ट के विवादित आदेश को किया रद्द

Bilaspur High Court: घरेलू हिंसा अधिनियम के दुरुपयो को लेकर हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है।

Bilaspur High Court: घरेलू हिंसा अधिनियम के दुरुपयोग को लेकर हाई कोर्ट की सामने आई नाराजगी, डिवीजन बेंच ने JMFC कोर्ट के विवादित आदेश को किया रद्द
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By Radhakishan Sharma

Bilaspur High Court: बिलासपुर। जेएमएफसी, सूरजपुर द्वारा 26 नवंबर 2024 को पारित आदेश को चुनौती देते हुए बलिया उत्तर प्रदेश निवासी प्रकाश सिंह ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने जेएमएफसी कोर्ट के उस आदेश को रद्द करने की मांग की थी जिसमें जिसमें घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कार्यवाही की गैर-अनुरक्षणीयता के संबंध में वर्तमान याचिकाकर्ताओं के आवेदन को खारिज कर दिया था। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। डिवीजन बेंच ने जेएमएफसी कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए याचिकाकर्ताओं को राहत दी है।

बता दें कि याचिकाकर्ता की पत्नी ने याचिकाकर्ता के अलावा उसकी मां, पिता व बहन के खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज करा दी थी। प्रकाश सिंह के अलावा मां मंजू सिंह, पिता मंगलदेव सिंह व बहन अर्चना सिंह ने एक साथ याचिका दायर की थी।

क्या है मामला

याचिकाकर्ता प्रकाश सिंह का विवाह 27 जून 2018 को नम्रता सिंह के साथ उत्तर प्रदेश के बलिया में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। इस विवाह से दो बच्चे हुए, जिनका नाम है: बड़ा बेटा आरव सिंह, जिसकी उम्र लगभग 6 वर्ष है; और छोटा बेटा अर्नव सिंह, जिसकी उम्र लगभग 4 वर्ष है। पहले बच्चे के जन्म के तुरंत बाद पत्नी का व्यवहार उसके और उसके परिवार के सदस्यों के प्रति अपमानजनक, हिंसक, उदासीन और असंवेदनशील हो गया। दूसरे बच्चे के जन्म के तुरंत बाद पत्नी ने जोर देकर कहा कि बड़े बेटे को उसकी बहन निकिता सिंह को गोद दे दिया जाए, जो अपने पति से अलग होकर अपने मायके में रहती है। उसके इस मांग को मानने से इनकार करने पर पत्नी का व्यवहार और भी अपमानजनक और हिंसक हो गया।

अगस्त 2021 के आसपास, पत्नी वैवाहिक घर छोड़कर बच्चों के साथ दो महीने के लिए अपने मायके बिश्रामपुर चली गई और उसके बाद वापस आने से इनकार कर दिया। याचिका के अनुसार उसने पत्नी को वापस लाने के कई प्रयास किए, लेकिन सभी प्रयासों में असहयोग मिला। 05 मार्च 2022 को,उसने पत्नी को वैवाहिक घर वापस लाने के लिए एक बार फिर बिश्रामपुर गया। तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से, पत्नी 07 मार्च 2022 को बच्चों के साथ इस शर्त पर लौटी कि वह परिवार से सभी संबंध तोड़ लेगा और उसके साथ अलग रहेगा। उसके लौटने के दो दिनों के भीतर,पत्नी ने अपना पहले वाला दुर्व्यवहार फिर से शुरू कर दिया। उसने घर और बच्चों की उपेक्षा की, सार्वजनिक स्थानों पर अनुचित और अपमानजनक व्यवहार किया और बार-बार आत्महत्या करने की धमकी दी। इसके बाद, दोनों पक्षों के बीच कई पुलिस शिकायतें और मुकदमे दायर किए गए।

हाई कोर्ट ने कहा, घरेलू घटना रिपोर्ट में पूर्ण, सटीक और प्रासंगिक विवरण शामिल होना जरुरी

डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा, 19 अक्टूबर.2022 की विवादित घरेलू घटना रिपोर्ट का सरसरी तौर पर अध्ययन करने से स्पष्ट होता है कि यह स्पष्ट रूप से अस्पष्ट है और इसमें पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई है। घरेलू हिंसा की कथित घटनाओं की तिथि, समय, स्थान या तरीके का खुलासा नहीं किया गया है, न ही याचिकाकर्ता से संबंधित किसी कृत्य का उल्लेख किया गया है। दहेज की मांग और शारीरिक या मानसिक क्रूरता से संबंधित आरोप पूरी तरह से अस्पष्ट है, जिनमें किसी विशिष्ट घटना, चोट या किसी विशेष राशि या वस्तु की मांग का कोई संदर्भ नहीं है। इस न्यायालय को याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत इस तर्क में दम लगता है कि विवादित घरेलू घटना रिपोर्ट (डीआईआर) घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम, 2005 की अनिवार्य आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती है। अधिनियम की धारा 9(1)(ख) के तहत, संरक्षण अधिकारी का यह वैधानिक दायित्व है कि वह सुनिश्चित करे कि घरेलू घटना रिपोर्ट में पूर्ण, सटीक और प्रासंगिक विवरण शामिल हों। ऐसा करने में विफलता मामले की जड़ तक जाती है और धारा के तहत कार्यवाही शुरू करने को अमान्य कर देती है। महत्वपूर्ण विवरण प्रस्तुत न करने से मामले की जड़ तक ही समस्या उत्पन्न हो जाती है और अधिनियम की धारा 12 के तहत कार्यवाही शुरू करने का अधिकार समाप्त हो जाता है।

रिकॉर्ड से यह भी पता चलता है कि याचिकाकर्ता की पत्नी ने विभिन्न न्यायालयों में कई कार्यवाही शुरू की हैं, और अधिनियम की धारा 12 के तहत दायर आवेदन में ऐसी कार्यवाही से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया गया है। महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाना और चुनिंदा जानकारी का खुलासा करना किसी भी वादी को न्यायसंगत राहत से वंचित करता है और दुर्भावना के अनुमान को और मजबूत करता है।

ऐसा करना न्यायालयीन प्रक्रिया का दुरुपयोग है

डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है, यह न्यायालय उन कार्यवाहियों को रद्द करने के लिए सशक्त है जो स्पष्ट रूप से दुर्भावना से प्रेरित हों, जिनमें अपराध के आवश्यक तत्व न हों, या जो विधि की प्रक्रिया का दुरुपयोग करती हों। उपरोक्त सिद्धांतों को वर्तमान मामले के तथ्यों पर लागू करते हुए, इस न्यायालय की यह राय है कि घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम, 2005 के तहत विचाराधीन कार्यवाही कानून की दृष्टि से अस्थिर है और इसका जारी रहना उचित नहीं है। ऐसा करना न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा। तदनुसार, रिट याचिका स्वीकार की जाती है

जेएमएफसी कोर्ट के विवादित आदेश को किया रद्द

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल ने अपने आदेश में कहा है, 19 अक्टूबर .2022 की विवादित घरेलू घटना रिपोर्ट और आवेदन, तथा उससे संबंधित सभी कार्यवाही, जो JMFC जेएमएफसी, सूरजपुर की अदालत में लंबित हैं, और जेएमएफसी, सूरजपुर द्वारा 26नवंबर.2024 को पारित विवादित आदेश, जिसमें याचिकाकर्ता का 30 मई 2023 का आवेदन खारिज किया गया था, को निरस्त किया जाता है। हालांकि, यह स्पष्ट किया जाता है कि यह आदेश किसी भी पक्ष को कानून के अनुसार सक्षम सिविल या पारिवारिक न्यायालय के समक्ष उपलब्ध उचित उपायों का पालन करने से नहीं रोकेगा।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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