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Bilaspur High Court: अवैध उत्खनन का भयावह सच! 400 एकड़ जमीन हो गई बंजर, पढ़िए हाई कोर्ट ने माइनिंग सिकरेट्री से क्या कहा

Bilaspur High Court: जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने खनिज विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा है।

Bilaspur High Court: अवैध उत्खनन का भयावह सच! 400 एकड़ जमीन हो गई बंजर, पढ़िए हाई कोर्ट ने माइनिंग सिकरेट्री से क्या कहा
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इमेज सोर्स-  गूगल, एडिट बाय- NPG News

By Radhakishan Sharma

11February 2026|बिलासपुर| छत्तीसगढ़ की राजधानी से लगे गांव में उत्खनन का एक भयावह सच सामने आया है। अवैध उत्खनन के चलते तकरीबन 400 एकड़ कृषि भूमि बंजर हो गई है। ये जमीन अब खेती के लायक नहीं रह गई है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने खनिज विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई।

अवैध उत्खनन का भयावह सच निसदा गांव में देखा जा सकता है, यहां की तकरीबन 400 एकड़ जमीन बंजर हो गई है। मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने लीज एरिया से बाहर हो रहे उत्खनन पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। बेंच ने माइनिंग सिकरेट्री को शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 26 फरवरी की तिथि तय कर दी है।

क्या है मामाला

आरंग के ग्राम निसदा निवासी ओम प्रकाश सेन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। पीआईएल में बताया है, गांव में ब्लैक स्टोन और चूना पत्थर के उत्खनन के लिए 15 लोगों को लीज दी गई थी। लीजधारकों ने स्वीकृत क्षेत्र से करीब पांच गुना अधिक जमीन पर अवैध कब्जा कर उत्खनन शुरू कर दिया। खनन के दौरान निकलने वाला माइनिंग वेस्ट और पत्थर सीधे महानदी में डंप किए जा रहे हैं। इससे नदी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है और आसपास की लगभग 400 एकड़ कृषि भूमि बंजर होने की कगार पर है।

बिना पर्यावरण अनुमति के कर रहे उत्खनन,नियमों का सीधा उल्लंघन

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया गया है कि तीन साल पहले पर्यावरणीय अनुमति समाप्त हो चुकी है, इसके बावजूद क्षेत्र में बेखौफ उत्खनन और धड़ल्ले से ब्लास्टिंग की जा रही है।

राज्य सरकार ने बताया, दोषियों पर ठोका है 30 करोड़ का जुर्माना

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने डिवीजन बेंच को बताया, कलेक्टर ने अवैध उत्खनन की शिकायत पर खनिज विभाग से जांच कराई थी। जांच में सात लीजधारकों को दोषी पाया गया है। पर्यावरणीय अनुमति खत्म होने के बाद भी उत्खनन करने वाले सात दोषी लीजधारकों पर 30 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने का नोटिस जारी किया गया है। राज्य सरकार के जवाब के बाद डिवीजन बेंच ने पूछा,नदी पर माइनिंग वेस्ट डंप करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। डिवीजन बेंच ने माइनिंग सिरकेट्री को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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