Bilaspur High Court: दो व्यवस्कों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रिश्ते को नहीं कहा जा सकता रेप, हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ दायर चार्जशीट को किया रद्द…
Bilaspur High Court: दुष्कर्म के आरोप में फंसे एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि दो व्यस्कों के बीच चले आ रहे लंबे रिश्ते को बाद में सिर्फ इसलिए रेप माना जा सकता, रिश्ता बाद में टूट गया हो।इस टिप्पणी के साथ याचिकाकर्ता पर दायर आरोप पत्र को रद्द कर दिया है।

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06 फरवरी 2026| बिलासपुर। दुष्कर्म के आरोप में फंसे एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि दो व्यस्कों के बीच चले आ रहे लंबे रिश्ते को बाद में सिर्फ इसलिए रेप माना जा सकता, रिश्ता बाद में टूट गया हो।इस टिप्पणी के साथ याचिकाकर्ता पर दायर आरोप पत्र को रद्द कर दिया है। आपराधिक कार्रवाई जारी रखने की अनुमति देने से कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग होने व न्याय का उल्लंघन होने के कारण हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के विरूद्ध जारी आरोप पत्र को रद्द कर दिया है।
क्या है मामला
भिलाई निवासी महिला ने मार्च 2020 में याचिकाकर्ता के खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा कि, आरोपी वर्ष 2005 से उससे शारिरिक संबंध बना रहा है। विरोध करने पर नुकसान पहुंचाने की धमकी देता है। महिला की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 376 व 506 के तहत अपराध दर्ज कर मामला ट्रायल कोर्ट में पेश किया था। पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देते हुए आरोपी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा के सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने कहा, महिला खुद मानती है कि, वह उसके साथ लंबे समय तक रिश्ता जारी रखा, भले ही उसे जाति के अंतर और उसकी शादीशुदा हालात जैसी सामाजिक और निजी रुकावटों के बारे में पता था। इन बातों से साफ़ पता चलता है कि, रिश्ता पूरी जानकारी और सहमति से जारी रखा गया था, न कि शुरू से ही किसी धोखे के आधार पर। कोर्ट ने कहा, लंबे समय तक सहमति से बने रिश्ते के बाद शादी का वादा पूरा न करना, रेप का अपराध नहीं बनता है। कोर्ट ने कहा, आपराधिक कार्यवाही जारी रखने की अनुमति देने से कानून की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग होगा और न्याय का उल्लंघन होगा।
हाई कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्प्णी
मामले की सुनवाई के बाद सिंगल बेंच ने अपने फैसले में लिखा है, याचिकाकर्ता और महिला तकरीबन 15 साल से रिलेशनशिप में थीं, जिसकी शुरुआत 2005 के आसपास हुई थी। इस दौरान, महिला ने खुद माना है कि, वह एक से ज्यादा बार आरोपी के साथ रही, उसके नियमित संपर्क में रही और उसके साथ शारीरिक संबंध भी बनाए। इतने सालों में उसने कभी भी पुलिस या किसी दूसरी अथॉरिटी से कोई शिकायत नहीं की। रिश्ते का लंबा समय, आपसी मुलाकातों की बात मानना, और तुरंत कोई शिकायत न होना साफ़ तौर पर दिखाता है कि, रिश्ता अपनी मर्जी से था और सहमति पर आधारित था। दो वयस्कों के बीच लंबे और लगातार रिश्ते को बाद में सिर्फ इसलिए रेप नहीं माना जा सकता, क्योंकि रिश्ता आखिरकार खत्म हो गया या खराब हो गया। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ दायर आरोप पत्र को रद्द कर दिया है।
