बस्तर IG का अल्टीमेटम: मुख्यधारा में लौटने का यह आखिरी मौका, जंगलों में खात्मे की तैयारी तेज

बस्तर IG का अल्टीमेटम: मुख्यधारा में लौटने का यह आखिरी मौका, जंगलों में खात्मे की तैयारी तेज
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फोटो सोर्स-गूगल, एडिटेड बाय- NPG न्यूज़

बस्तर में सुरक्षाबलों ने माओवादियों के खात्मे की तैयारी कर ली हैं। IG सुंदरराज पी ने माओवादी संगठन को अल्टीमेटम देते हुए मुख्यधारा में लौटने का आखिरी मौका दिया है। देखिए, ये पूरी रिपोर्ट…

जगदलपुर|11 अप्रैल 2026| छत्तीसगढ़ के बस्तर में अब माओवादियों का नेटवर्क अंतिम दौर पर पहुंच चुका है, लेकिन अभी भी कुछ ऐसे माओवादी मौजूद हैं जो हथियार डालने को तैयार नहीं हैं। माओवादियों का ये सख्त व्यवहार सुरक्षाबलों को कड़ी चुनौती दे रहा हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, माओवादी कमांडर पापाराव के जगदलपुर में और PLGA इंचार्ज सोढ़ी केसा के तेलंगाना में आत्मसमर्पण के बाद बस्तर में सक्रिय माओवादियों की संख्या तेजी से कम हुई है। इसके बाद भी कुछ कट्टर कैडर अंडरग्राउंड रहकर सक्रिय नजर आ रहे हैं, वहीं, दूसरी ओर सुरक्षा बल भी माओवादियों के खिलाफ हाई अलर्ट मोड में हैं।

बस्तर IG का सख्त संदेश

जिले में हालातों को देखते हुए बस्तर IG सुंदरराज पी ने सख्त संदेश देते हुए कहा कि बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर और सुकमा बॉर्डर में अब गिनती के माओवादी ही बचे हैं और उनके पास मुख्यधारा में लौटने का यह आखिरी मौका है। बस्तर IG ने आगे कहा कि अगर बचे हुए माओवादियों ने सरेंडर नहीं किया, तो सुरक्षा बलों की कार्रवाई और तेज कर दी जाएगी।

वहीं, तेलंगाना के DGP शिवधर रेड्डी ने भी माओवादियों से सरेंडर करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि साल 2024 में तेलंगाना मूल के 125 लोग माओवादी संगठन का हिस्सा थे, लेकिन अब उनकी संख्या महज 5 रह गई है।

अंतिम सांसें गिन रहा माओवाद

साफतौर पर ये कहा जा सकता है कि बस्तर में माओवादी ढांचा अब अपने अंतिम चरण में है, लेकिन अब भी कुछ माओवादी आत्मसमर्पण और मुठभेड़ के बीच खड़े हैं। इस दौरान आने वाला समय बहुत अहम माना जा रहा है, जिसमें ये तय होगा कि बचे हुए माओवादी मुख्यधारा में लौटेंगे या नहीं? और अगर उनका फैसला मुख्यधारा में ना लौटना हुआ, तो सुरक्षाबलों का सामना कैसे करेंगे?

बता दें कि छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र लंबे समय से माओवादियों का गढ़ रहा है। घने जंगल और सीमावर्ती इलाकों के चलते माओवादी संगठन ने सालों तक अपनी पकड़ बनाए रखी थी, लेकिन अब वो समय आ गया है जिसमें माओवादी संगठन पूरी तरह खतरे में हैं।

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