हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: निचली अदालत का फैसला रद्द, बालिग लड़की की सहमति से बने संबंध दुष्कर्म नहीं
Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है, अगर लड़की बालिग है और सहमति के आधार पर शारीरिक संबंध बनाए हैं तो इसे दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।

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बिलासपुर 12 मार्च 2026, छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है, अगर लड़की बालिग है और सहमति के आधार पर शारीरिक संबंध बनाए हैं तो इसे दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने इस टिप्पणी के साथ युवक को छात्रा के दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया है। हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया है। निचली अदालत ने युवक को दुष्कर्म के आरोप में 20 साल की सजा सुनाई थी।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में निचली अदालत द्वारा आरोपी युवक को दोषी ठहराने के आदेश को अवैध मानते हुए सजा को निरस्त कर दिया है। हाई कोर्ट के इस फैसले के साथ ही दुष्कर्म के आरोपी युवक को करीब 20 साल बाद राहत मिली है। मामला सरगुजा जिले के धौरपुर थाना क्षेत्र का है।
पढ़िए क्या है पूरा मामला ?
सरगुजा जिले की युवती साल 2000 में 12वीं कक्षा की छात्रा थी और धौरपुर क्षेत्र में किराए के मकान में रहती थी। इसी दौरान लीना राम ध्रुव भी पढ़ाई कर रहा था। दोनों के बीच दोस्ती हुई और बाद में प्रेम संबंध बन गया।
युवती का आरोप है कि युवक उसी मकान में उसके साथ रहने लगा। 8 सितंबर 2000 को उसने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद तकरीबन तीन साल तक वह उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता रहा।
दो महीने तक युवक के घर रही, वह लौटकर वापस नहीं आया
पढ़ाई पूरी होने के बाद दोनों अपने-अपने गांव लौट गए। युवती के अनुसार, दोनों के बीच तय हुआ कि वे हर महीने की 15 और 31 तारीख को मिलेंगे। इसके बाद वह करीब एक सप्ताह तक युवक के घर रही, जहां उसने उसे पत्नी की तरह रखा।
युवती ने आरोप लगाया कि लीना राम ने शादी का झांसा देकर उससे 3 साल तक शारीरिक संबंध बनाए। 16 मई 2003 को वह दोबारा युवक के घर गई और वहीं रुकी। उसने शादी की बात कही, 11 जून 2003 को लीना राम उसे छोड़कर कहीं चला गया और वापस नहीं लौटा। युवती करीब 2 महीने तक उसके घर पर रही, लेकिन युवक नहीं आया।
युवती ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत
लीना राम के गायब होने के बाद युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी लीना ध्रुव के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी सजा
जांच पड़ताल के बाद पुलिस ने युवक के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में चालान पेश किया। मामले की सुनवाई के बाद अंबिकापुर के जिला-सत्र न्यायालय ने आरोपी को दुष्कर्म का दोषी मानते हुए सात साल की सजा और 5000 रुपए अर्थदंड लगाया।
निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में दी थी चुनौती
सत्र न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए आरोपी युवक लीना राम ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में रिवीजन अपील दायर की थी, जिसमें बताया गया कि ट्रायल कोर्ट ने कानून से परे जाकर फैसला दिया है और यह न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा, निचली अदालत का दोषसिद्धि आदेश कानून के अनुरूप नहीं है, लिहाजा निचली अदालत के आदेश को निरस्त किया जाता है।
