Begin typing your search above and press return to search.

Ambedkar Hospital Raipur : मेकाहारा के डॉक्टरों की बड़ी उपलब्धि : 29 वर्षीय युवक की छाती से निकाला दुर्लभ कैंसर का ट्यूमर, एम्स से हुआ था रेफर

Ambedkar Hospital Raipur : रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) के कैंसर सर्जरी विभाग ने एक अत्यंत जटिल ऑपरेशन को अंजाम देते हुए 29 वर्षीय युवक की जान बचाने में सफलता हासिल की है।

Ambedkar Hospital Raipur : मेकाहारा के डॉक्टरों की बड़ी उपलब्धि : 29 वर्षीय युवक की छाती से निकाला दुर्लभ कैंसर का ट्यूमर, एम्स से हुआ था रेफर
X

Ambedkar Hospital Raipur : मेकाहारा के डॉक्टरों की बड़ी उपलब्धि : 29 वर्षीय युवक की छाती से निकाला दुर्लभ कैंसर का ट्यूमर, एम्स से हुआ था रेफर

By UMA

Ambedkar Hospital Cancer Surgery : रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी में चिकित्सा विशेषज्ञों ने एक बार फिर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) के कैंसर सर्जरी विभाग ने एक अत्यंत जटिल ऑपरेशन को अंजाम देते हुए 29 वर्षीय युवक की जान बचाने में सफलता हासिल की है। यह मामला एक दुर्लभ प्रकार के कैंसर मेडियास्टाइनल जर्म सेल ट्यूमर से जुड़ा था, जो मरीज की छाती के बीचों-बीच स्थित था और उसके लिए सांस लेना भी दूभर कर रहा था।

Ambedkar Hospital Cancer Surgery : मरीज का प्रारंभिक इलाज एम्स (AIIMS) रायपुर में चल रहा था। वहां हुई जांच और बायोप्सी में इस गंभीर ट्यूमर की पुष्टि हुई थी। शुरुआत में इस गांठ का आकार 13x18x16 सेंटीमीटर के करीब था, जो न केवल बहुत बड़ा था बल्कि हृदय के पास की महत्वपूर्ण रक्त धमनियों से बुरी तरह चिपका हुआ था। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए एम्स के डॉक्टरों ने पहले कीमोथेरेपी के जरिए ट्यूमर को छोटा करने का प्रयास किया। जून 2025 तक चले छह चक्रों की कीमोथेरेपी के बाद जब गांठ का आकार घटकर 4x3x4 सेंटीमीटर रह गया, तब मरीज को विशेष सर्जरी के लिए मेकाहारा रेफर किया गया।

अम्बेडकर अस्पताल के कैंसर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष गुप्ता ने इस चुनौती को स्वीकार किया। सर्जरी से पहले हृदय रोग और निश्चेतना विभाग के विशेषज्ञों के साथ गहन विचार-विमर्श किया गया, क्योंकि यह गांठ सीधे तौर पर एओर्टिक आर्च और पल्मोनरी ट्रंक जैसी जीवन रक्षक नसों से जुड़ी थी। करीब 4 घंटे तक चले इस मैराथन ऑपरेशन में सर्जन्स ने अत्यंत सूक्ष्मता और कौशल का परिचय देते हुए ट्यूमर को बाएं फेफड़े के एक हिस्से के साथ सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया।

अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर और डीन डॉ. विवेक चौधरी ने इस टीम वर्क की जमकर सराहना की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह दुर्लभ कैंसर मुख्य रूप से 20 से 40 वर्ष के युवाओं को अपना शिकार बनाता है, जिसमें समय पर सर्जरी और कीमोथेरेपी ही जीवन का आधार बनती है। सफल ऑपरेशन के बाद मरीज अब स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। मेकाहारा की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि राज्य में अब उच्च स्तरीय कैंसर उपचार की सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

Next Story