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फोर्स को चुनौतीः बस्तर में नक्सलियों ने किया कैम्प के सामने फोर्स को टारगेट, आईटीबीपी कैम्प के एकदम सामने घात लगाए माओवादियों ने आईटीबीपी के असिस्टेंट कमांडेंट और एएसआई को मार डाला

फोर्स को चुनौतीः बस्तर में नक्सलियों ने किया कैम्प के सामने फोर्स को टारगेट, आईटीबीपी कैम्प के एकदम सामने घात लगाए माओवादियों ने आईटीबीपी के असिस्टेंट कमांडेंट और एएसआई को मार डाला
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By NPG News

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बस्तर, रायपुर, 20 अगस्त 2021। बस्तर में माओवादियों ने एक बार फिर दुःसाहसिक वारदात को अंजाम देते हुए आईटीबीपी के असिस्टेंट कमांडेंट और एएसआई को मार डाला। आज की घटना इसलिए हैरान करने वाली है कि नक्सलियों ने आईटीबीपी कैंप के एकदम सामने वारदात को अंजाम दिया। इससे पहले ऐसी ही घटना दंतेवाड़ा में हुई थी, एर्राबोर कैंप के गेट के पास नक्सलियों की अंधाधुध फायरिंग से सीआरपीएफ का एक जवान शहीद हो गया था।
आज दोपहर नारायणपुर के कड़ेमेटा इलाके में नक्सलियों ने इस घटना को अंजाम दिया। कड़ेमेटा में इंडियन-तिब्बत बॉर्डर फोर्स का कैंप है। पता चला है, असिस्टेंट कमांडेंट और एएसआई को कैंप के भीतर मोबाइल का नेटवर्क नहीं मिल रहा था। सो, नेटवर्क की तलाश में कैंप से बाहर निकल आए। कैंप से करीब 300 मीटर की दूरी पर वे पहुंचे होंगे कि पहले से घात लगाए बैठे नक्सलियों ने उन पर फायरिंग झोंक दी। नक्सलियों का इससे बड़ा दुःसाहस और क्या होगा कि कैंप सामने होने के बाद भी वे जवानों के एके 47 रायफल और बुलेट प्रुफ जैकेट लूट लिए। एक कैंप में डेढ़ सौ से, दो सौ जवान होते हैं। इसके बावजूद माओवादी घटना को अंजाम देकर चले गए और कैंप के जवानों की तरफ से कोई जवाबी फायरिंग नहीं हुई, ये चौंकाता है और बड़े खतरे का संकेत भी है।
पुलिस अधिकारी भी मानते हैं कि बस्तर के खासकर नारायणपुर, कोंडागांव इलाके में नक्सली घटनाएं बढ़ रही हैं। कड़ेमेटा रोड पर ही पिछले दिनों नक्सलियों ने एक यात्री वाहन को आईडी विस्फोट से उड़ा दिया था।
बस्तर में सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्सेज के 60 हजार से अधिक फोर्स तैनात हैं। इसके बाद भी गुरिल्ला हमलों की वजह से नक्सली अपने मंसूबे में कामयाब हो जा रहे हैं तो इसका एक अहम कारण माओवादियों का खुफिया नेटवर्क मजबूत होना है। नक्सलियों ने खुफिया का ऐसा नेटवर्क तैयार कर लिया है कि फोर्स की एक-एक गतिविधियों पर उनकी नजर होती हैं। कड़ेमेटा कैंप से आईटीबीपी जवान बाहर निकले नहीं कि फायरिंग खोल दिया। इसका मतलब यह है कि नक्सलियों को मालूम था कि जवान कैंप से बाहर कब निकलते हैं।

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