चेन स्नैचर्स ने ट्रेन से फेंका, फिर भी नहीं मानी हार, 1 पैर से किया माउंट एवरेस्ट फतह

नई दिल्ली 26 अक्टूबर 2019 अब एक ऐसी शख्सियत से आपको परिचय कराते हैं जिनके हौसले के आगे ऊंचे-ऊंचे पर्वत भी छोटे लगने लगते हैं. इनके जज्बे के आगे दर्द भी बेदर्द हो जाते हैं. विश्व में हिन्दुस्तान का मान बढ़ाने वाली भारत की ये लक्ष्मी हैं अरुणिमा सिन्हा.

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मुश्किलों के पहाड़ को जिसने अपने हौसलों से छोटा कर दिया. बेइंतेहां दर्द को जिसने अपनी मुस्कान से बेदर्द कर दिया, वो नाम है अरुणिमा सिन्हा.  2011 में वॉलीबॉल की राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी अरुणिमा को कुछ गुंडो ने चेन स्नैचिंग करते हुए चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया था. पूरी रात असहनीय दर्द के साथ अरुणिमा सिन्हा रेलवे ट्रैक पर पड़ी रहीं.

इस घटना में इन्हें एक पैर गंवाना पड़ा और दूसरे पैर में रॉड लगाई गई. ऐसा लगा जैसे सुनहरे करियर पर ब्रेक लग गया, लेकिन अरुणिमा ने कभी हारना नहीं सीखा था. मन ने ठाना कि कुछ करना है, फिर क्या था महज दो साल के भीतर ही अरुणिमा ने अपने आपको तैयार कर लिया और कृतिम पैर के सहारे दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर दी और उसे फतह कर देश का तिरंगा लहराया.

केवल माउंट एवरेस्ट ही नहीं बल्कि 6 और दुर्गम पहाड़ियों की इन्होंने चढ़ाई की, साल 2015 में इन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया. अरुणिमा का जुनून एक महिला के शिखर पर चढ़ने की कहानी नहीं है बल्कि इनके अटूट विश्वास की दास्तां भी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भारत की लक्ष्मी अरुणिमा के जज्बे और हौसले को सराहा है.

 

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