Economic Survey 2026: क्या सच में 25,000 कमाते हैं डिलिवरी बॉय? सरकारी रिपोर्ट ने खोल दी सच्चाई!
Economic Survey 2026: Economic Survey 2026 के मुताबिक भारत में 40 प्रतिशत गिग वर्कर्स 15,000 से कम कमाते हैं। 25,000 कमाई के दावों और सरकार के रुख पर पूरी रिपोर्ट।

Economic Survey 2026: इकनोमिक सर्वे 2026 ने गिग इकॉनमी को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक भारत में करीब 40 प्रतिशत गिग वर्कर्स की मासिक कमाई 15,000 से भी कम है। यह आंकड़ा फूड डिलिवरी प्लेटफॉर्म्स से जुड़ी उस दलील पर सवाल खड़े करता है, जिसमें दावा किया गया था कि डिलिवरी पार्टनर हर महीने 25,000 तक कमा सकते हैं।
हाल ही में Zomato के संस्थापक Deepinder Goyal ने कहा था कि उनके प्लेटफॉर्म पर डिलिवरी पार्टनर अगर दिन में 8–10 घंटे और हफ्ते में छह दिन काम करें, तो 25,000 तक की कमाई संभव है। लेकिन Economic Survey 2026 के आंकड़े इस दावे से मेल नहीं खाते।
आर्थिक सर्वे में क्या कहा गया?
आर्थिक समीक्षा के अनुसार भारत में गिग वर्कर्स का एक बड़ा हिस्सा कम आय पर निर्भर है। सर्वे में साफ कहा गया है कि 40 प्रतिशत गिग कर्मचारी 15,000 से कम कमाते हैं जबकि बड़ी संख्या ऐसी भी है जिनकी आय अस्थिर और काम के घंटों पर निर्भर रहती है। सरकार ने इस स्थिति को देखते हुए न्यूनतम प्रति घंटा या प्रति कार्य आय तय करने और वेटिंग टाइम के लिए मुआवजे जैसे नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत बताई है।
केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने संसद में इकनोमिक सर्वे पेश करते हुए कहा कि गिग और रेगुलर रोजगार के बीच लागत असमानता को कम करना जरूरी है, ताकि प्लेटफॉर्म आधारित श्रमिकों को भी उचित मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा मिल सके।
कौन होते हैं गिग वर्कर्स?
गिग वर्कर्स वे कर्मचारी होते हैं जो ई-कॉमर्स, फूड डिलिवरी, क्विक कॉमर्स और राइड-हेलिंग जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए काम करते हैं। हाल के वर्षों में श्रम संहिताओं (Labour Codes) के तहत इन्हें औपचारिक मान्यता मिली है जिससे सामाजिक सुरक्षा के दायरे का विस्तार हुआ है और वेलफेयर फंड जैसी व्यवस्थाएं सामने आई हैं।
10 मिनट डिलिवरी के खिलाफ आवाज
सर्वे में यह भी बताया गया है कि फूड डिलिवरी और क्विक कॉमर्स से जुड़े गिग कर्मियों ने हाल में बेहतर भुगतान, सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों और 10 मिनट की डिलिवरी समयसीमा हटाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए। इन मांगों को केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय के सामने उठाया गया जिसके बाद सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों को तेज डिलिवरी के दावों पर पुनर्विचार करने को कहा।
तेजी से बढ़ रही गिग इकॉनमी
Economic Survey के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 में जहां गिग वर्कर्स की संख्या करीब 77 लाख थी, वहीं 2024-25 में यह 55 प्रतिशत बढ़कर 1.2 करोड़ हो गई है। अनुमान है कि 2029-30 तक यह संख्या कुल कार्यबल के 6.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है और GDP में लगभग 2.35 लाख करोड़ का योगदान दे सकती है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2026 ने साफ कर दिया है कि गिग इकॉनमी में कमाई को लेकर किए जा रहे बड़े दावे जमीनी हकीकत से काफी अलग हैं। 25,000 की मासिक आय हर डिलिवरी पार्टनर के लिए संभव नहीं है। ऐसे में न्यूनतम आय, सामाजिक सुरक्षा और काम की शर्तों को लेकर ठोस नीतिगत कदम उठाना अब जरूरी होता जा रहा है।
