Begin typing your search above and press return to search.

NPG Explainer: क्यों आमने-सामने आईं बिहार और आंध्र प्रदेश की पुलिस? IPS सुनील नायक की गिरफ्तारी और कोर्ट के आदेश की पूरी कहानी

IPS Sunil Nayak Arrest: बिहार कैडर के IPS सुनील नायक की गिरफ्तारी को सिविल कोर्ट ने अवैध क्यों बताया? क्या है रघुरमा कृष्ण राजू केस? समझें इस विवाद के पीछे के कानूनी और राजनीतिक पहलू।

NPG Explainer: क्यों आमने-सामने आईं बिहार और आंध्र प्रदेश की पुलिस? IPS सुनील नायक की गिरफ्तारी और कोर्ट के आदेश की पूरी कहानी
X
By Ragib Asim

पटना 23 फरवरी 2026: बिहार की राजधानी पटना में सोमवार को जो हुआ उसने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IPS) के गलियारों में हलचल मचा दी है। एक सेवारत आईजी (IG) रैंक के अधिकारी को दूसरे राज्य की पुलिस आती है और उनके घर से उठा लेती है लेकिन कुछ ही घंटों बाद कोर्ट उस गिरफ्तारी को 'अवैध' करार दे देता है। आइये इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे के पीछे की कानूनी पेचीदगियों और पुरानी रंजिशों आसान भाषा में समझते हैं।

क्या है मामला और इसकी शुरुआत कब हुई?

इस विवाद की जड़ें मई 2021 से जुडी हैं जब आंध्र प्रदेश में वाईएस जगन मोहन रेड्डी की सरकार थी। बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी सुनील नायक उस समय प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर आंध्र प्रदेश में थे और सीआईडी (CID) में तैनात थे।

उस दौरान वाईएसआर कांग्रेस के तत्कालीन सांसद रघुरमा कृष्ण राजू ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। सुनील नायक की अगुवाई वाली सीआईडी ने राजू को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया था। राजू का आरोप है कि उस वक्त नायक और अन्य पुलिसकर्मियों ने हिरासत में उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित किया और हत्या का प्रयास किया था।

गिरफ्तारी को कोर्ट ने क्यों 'अवैध' ठहराया?

आंध्र प्रदेश पुलिस जब सुनील नायक को गिरफ्तार कर पटना सिविल कोर्ट ले गई तो वहां उनकी दलीलें टिक नहीं सकीं। कोर्ट ने दो मुख्य आधारों पर ट्रांजिट रिमांड (एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने की अनुमति) देने से मना कर दिया:

पुख्ता दस्तावेजों का अभाव: आंध्र प्रदेश पुलिस यह साबित करने के लिए पर्याप्त कानूनी कागजात पेश नहीं कर सकी कि गिरफ्तारी के लिए सभी नियमों का पालन किया गया है।

गिरफ्तारी की प्रक्रिया: कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति (खासकर एक सेवारत सरकारी अधिकारी) को गिरफ्तार करने से पहले कुछ तय प्रक्रियाओं का पालन करना होता है जो इस मामले में नादारद दिखा।

क्या एक IPS की गिरफ्तारी के लिए विशेष नियम हैं?

आमतौर पर किसी भी सरकारी अधिकारी की गिरफ्तारी के लिए कुछ तय प्रोटोकॉल होते हैं:

  • सूचना: यदि अधिकारी ड्यूटी पर है या किसी वरिष्ठ पद पर है तो संबंधित विभाग के प्रमुख और राज्य सरकार को सूचित करना अनिवार्य माना जाता है।
  • नोटिस: सुप्रीम कोर्ट के 'अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य' मामले के दिशा-निर्देशों के अनुसार, 7 साल से कम सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी से पहले धारा 41A का नोटिस देना जरूरी है। नायक के वकील का दावा है कि ऐसा कोई नोटिस नहीं दिया गया।
  • प्रोटोकॉल: एक आईजी रैंक के अधिकारी के घर पर दूसरे राज्य की पुलिस का बिना स्थानीय पुलिस को ठोस भरोसे में लिए छापा मारना प्रशासनिक मर्यादा के खिलाफ माना जाता है।

क्या यह मामला 'राजनीतिक रंजिश' का है?

सुनील नायक के समर्थकों और वकीलों का कहना है कि यह 'वेंडेटा पॉलिटिक्स' (बदले की राजनीति) है। इसके पीछे के तर्क समझिए:

  • सत्ता परिवर्तन: 2024 में आंध्र प्रदेश में जगन रेड्डी की हार हुई और चंद्रबाबू नायडू (TDP) की सरकार बनी।
  • शिकायतकर्ता का पद: जिस रघुरमा कृष्ण राजू ने केस दर्ज कराया है वे अब टीडीपी में हैं और आंध्र प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष हैं।
  • समय: 2021 के मामले में अचानक 2025-26 में इतनी सक्रियता दिखाना सवाल खड़े करता है।

अब आगे क्या होगा?

कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी को अवैध बताने के बाद फिलहाल सुनील नायक को बड़ी राहत मिली है। लेकिन कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है:

  • आंध्र पुलिस का रुख: आंध्र प्रदेश पुलिस अब ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है या नए सिरे से दस्तावेज़ तैयार कर कानूनी नोटिस भेज सकती है।
  • बिहार सरकार की भूमिका: बिहार पुलिस एसोसिएशन और राज्य सरकार इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपना सकती है क्योंकि यह उनके कैडर के अधिकारी के सम्मान और सुरक्षा का सवाल है।
  • प्रशासनिक दरार: इस घटना ने बिहार और आंध्र प्रदेश के पुलिस विभागों के बीच एक अविश्वास की स्थिति पैदा कर दी है।

कौन हैं सुनील कुमार नायक?

एम. सुनील नायक मूल रूप से आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने 12 दिसंबर 2005 को भारतीय पुलिस सेवा (IPS) जॉइन की थी। उन्हें बिहार कैडर अलॉट हुआ जिसके बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बिहार के विभिन्न जिलों में पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में की।

आईपीएस सुनील नायक का प्रोफाइल

  • नाम,एम. सुनील नायक (M. Sunil Nayak)
  • बैच: 2005 बैच, बिहार कैडर
  • मूल निवास: गुंटूर, आंध्र प्रदेश
  • वर्तमान पद: आईजी (IG), बिहार फायर सर्विस
  • शिक्षा/प्रवेश: 12 दिसंबर 2005 (IPS जॉइनिंग)

Inter-Cadre डेपुटेशन

सुनील नायक के करियर में एक बड़ा मोड़ साल 2019 में आया। व्यक्तिगत कठिनाइयों और पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने अपने गृह राज्य आंध्र प्रदेश जाने की इच्छा जताई थी।

  • अवधि: केंद्र सरकार ने उन्हें 3 साल के लिए आंध्र प्रदेश कैडर में डेपुटेशन पर भेजने की अनुमति दी थी।
  • कार्यकाल: उनका यह डेपुटेशन 7 जनवरी 2020 से शुरू हुआ था।

आंध्र प्रदेश में सीआईडी की कमान

आंध्र प्रदेश में अपनी तैनाती के दौरान सुनील नायक सीआईडी (CID) के डीआईजी (DIG) के पद पर रहे। उस समय राज्य में वाईएस जगन मोहन रेड्डी की सरकार थी। इसी दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच की। रघुरमा कृष्ण राजू की गिरफ्तारी का चर्चित मामला भी इसी कार्यकाल के दौरान हुआ जो आज उनके लिए कानूनी मुसीबत का कारण बना हुआ है।

बिहार वापसी और वर्तमान पद

आंध्र प्रदेश में अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद सुनील नायक वापस अपने कैडर यानी बिहार लौट आए। अभी वे पटना में बिहार फायर सर्विस विभाग में आईजी (IG) के पद पर तैनात हैं।

Ragib Asim

Ragib Asim is a seasoned News Editor at NPG News with 15+ years of excellence in print, TV, and digital journalism. A specialist in Bureaucracy, Politics, and Governance, he bridges the gap between traditional reporting and modern SEO strategy (8+ years of expertise). An alumnus of Jamia Millia Islamia and Delhi University, Ragib is known for his deep analytical coverage of Chhattisgarh’s MP administrative landscape and policy shifts. Contact: [email protected]

Read MoreRead Less

Next Story