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रिक्शेवाले का बेटा बना सेल टैक्स आफिसर...3 साल की उम्र में चल बसी माँ... जनरल स्टोर में काम, फिर टेलरिंग कर पास की CGPSC

रिक्शेवाले का बेटा बना सेल टैक्स आफिसर...3 साल की उम्र में चल बसी माँ... जनरल स्टोर में काम, फिर टेलरिंग कर पास की CGPSC
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By NPG News

बिलासपुर 30 अक्टूबर 2021। अगर आपको यह लगता है कि सफलता रातों-रात मिलती है तो आपकी यह सोच गलत है. क्योंकि इसमें एक दो दिन नहीं, बल्क‍ि वर्षों की मेहनत लगी होती है। और एक सफल व्यक्त‍ि के पीछे सिर्फ उसकी मेहनत नहीं होती, बल्क‍ि कई लोगों की होती है. इसमें एक पिता का भूमिका सबसे अहम है। ऐसे ही बिलासपुर के रहने वाले एक पिता हैं, जिन्होंने अपने बेटे को पढ़ाने और बनाने के लिए अपना जीवन कुर्बान कर दिया। बिलासपुर के रहने वाले एक रिक्शा चालक कुलदीप कैवर्त्य हैं और रिक्शा चलाते-चलाते और अपने परिवार का भरण-पोषण मुश्क‍िलों से करते हुए उन्होंने अपने बेटे विजय कैवर्त्य को सेल टैक्स आफिसर बना दिया।


दरअसल बिलासपुर के एक रिक्शा चालक के पुत्र ने अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए टेलर का काम कर अपना खर्च निकाला। कल जारी हुए पीएससी के नतीजों में उन्हें 21 वा रैंक प्राप्त हुआ। तीन साल की उम्र में अपनी मां को खोने वाले विजय के पिता कुलदीप ऑटो रिक्शा चालक हैं। कुलदीप के घर की माली हालत शुरू से ही ठीक नही रही थी,पर उन्होंने अपने पुत्र को मेहनत की महत्ता समझाई। वे यथा सम्भव बच्चे की जरूरत पूरी करने की कोशिश करते थे व बच्चे को पढ़ने के लिये प्रेरित करते थे। बच्चे विजय ने भी पिता के संघर्षों को देखते हुए उसी जुनून से बचपन से ही मेहनत की।

जनरल स्टोर में किया काम, उसके बाद टेलरिंग

तखतपुर मे रहने वाले विजय ने आर्थिक दिक्कतों के कारण कक्षा 5 वी से ही पढ़ाई के साथ साथ स्कूल से आने के बाद जनरल स्टोर में नौकरी करनी शुरू कर दी। तखतपुर के ही गायत्री ज्ञान मन्दिर में ही विजय ने प्राथमिक से ले कर 8 वी तक कि पढ़ाई की। तो वही 9 वी से 12 वी तक कि पढ़ाई बालक हाईस्कूल में की। विजय ने 8 वी तक तो जनरल स्टोर में काम किया उसके बाद 9 वी कक्षा में आने के बाद विजय ने टेलरिंग की काम सीखना शुरू कर दिया। टेलरिंग कर अपना खर्चा निकालते हुए विजय ने 12 वी तक कि परीक्षा पास की व उसके बाद सीवीरमन यूनिवर्सिटी कोटा से मेकेनिकल ब्रांच से इंजीनियरिंग में 83 प्रतिशत ला कर बीई की डिग्री हासिल की। इसी तरह विजय ने दसवीं में 89 प्रतिशत व 12 वी की परीक्षा 88.4 प्रतिशत अंको के साथ पास की। इंजीनियरिंग करने के दौरान भी कालेज से आ कर विजय टेलरिंग का काम किया करते थे इस तरह उन्होंने बीई की डिग्री पूरी की। विजय ने बताया कि अपनी पढ़ाई का खर्चा निकालने के लिये मैने जनरल स्टोर में काम करने के अलावा 10 साल टेलरिंग की है।

5 घण्टे पढ़ाई, तीन बार निकला प्री

विजय ने टेलरिंग करने के साथ ही 5 घण्टे पढ़ाई कर पीएससी की तैयारी की। विजय 2017 से पीएससी दिला रहे हैं। 17,18,19 को प्री क्वालीफाई कर मेंस दिलाया पर इंटरव्यू में नही पहुँच सके। इस वर्ष हुए परीक्षा में प्री के साथ ही मेंस क्लियर कर इंटरव्यू में पहुँचे और 21 वा रैंक ला कर सेल टैक्स सहायक आयुक्त के पद पर चयनित हुए। विजय ने कहा कि अपनी तैयारी को देखते हुए सफलता मिलना निश्चित लग रही थी। इसके साथ ही विजय कहते हैं कि यदि आप कोई लक्ष्य बना कर दृढ़ निश्चय कर लो तो फिर भले ही उसे पूरा होने में सालों लग जाये पर पूरा जरूर होगा।

किताबो के खर्च के लिये रोज बनाते थे तीन शर्ट

विजय का शासन के प्रतिभावान बच्चो के लिये चलाये जा रहे फ़्री वेव्हर स्किम के तहत इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिये चयन हुआ था। इस योजना में होता यह हैं कि शासन इंजीनियरिंग, फार्मेसी,में प्रतिभावान बच्चो को निःशुल्क शिक्षा देने की योजना के तहत हर ब्रांच में एडमिशन लेने वाले शुरू के 10 परसेंट बच्चो को ट्यूशन फीस माफ रहती है। इस योजना के तहत विजय का 4 सालों का 2.50 लाख रुपये फीस माफ हुआ था,पर आने जाने व किताबो समेत खुद के खर्च के लिये विजय ने टेलरिंग का काम जारी रखा। रोज शाम 5 बजे कालेज से आने के बाद विजय फ्रेश हो व नाश्ता कर के तखतपुर के एम साहब टेलर के यहां शाम 6 बजे पहुँच जाते थे। विजय शाम 6 से ले कर रात 9 तक तीन घण्टो में रोजाना तीन शर्ट बनाते थे। इस तरह से अपना खर्च निकाल कर विजय ने अपनी पढ़ाई पूरी की व सफलता हासिल की।

तीन बहनों का अकेला भाई हैं विजय

विजय तीन बहनो का अकेला भाई हैं, जिनमे दो बहनें बड़ी व एक बहन विजय से छोटि हैं। बडी बहनों की शादी हो चुकी हैं। विजय ने बताया कि तीन वर्ष की उम्र में माँ को खोने के बाद बड़ी दीदी स्वाति ने ही उन्हें मां का प्यार दिया। घर की माली हालत खराब होने के कारण उनकी दिदी स्वाति व जीजा बलराम कैवर्त्य ने भी पढ़ाई व घर खर्च के लिये आर्थिक सहयोग दिया। चयन की खबर मिल कर बहन स्वाति फुट फुट कर रोते हुए भाई को गले लगा लिया और भाव विभोर हो कर कहने लगी कि यह मेरा बेटा नही भाई हैं। बहन स्वाति ने बताया कि मैने हमेशा अपने भाई को बड़े पद और चयन के लिये प्रेरित किया है और मुझे विश्वास था कि यह एक दिन जरूर अधिकारी बनेगा।

निःशुल्क कोचिंग

विजय की प्रतिभा को देखते हुए बिलासपुर के पटेल ट्यूटोरियल्स ने विजय को निःशुल्क कोचिंग प्रदान की। 2016 में इंजीनियरिंग करने के बाद विजय ने 16 से 17 तक पटेल में कोचिंग की। विजय बताते हैं कि सुबह 7 बजे से बिलासपुर के गांधी चौक स्थित पटेल ट्यूटोरियलस में क्लास शुरू हो जाती थी। हॉस्टल का खर्च वहन न कर पाने की वजह से मैं बिलासपुर मे न रह कर तखतपुर से ही आना जाना करता था। इसके लिये सुबह 5.30 बजे ही तखतपुर से ऑटो से या अन्य साधनों से बिलासपुर जाता व 11 बजे क्लास खत्म होने के बाद वापस आता था। इस दौरान दो से तीन बार साधन बदलना पड़ता था। विजय ने बताया कि कोचिंग के डीसी पटेल सर व तिवारी सर के साथ ही अन्य सर ने मुझे अच्छा सपोर्ट किया व मार्गदर्शन दिया। और कोचिंग की फीस भी नही ली। पर आने जाने का खर्च निकालने के लिये इस दौरान भी टेलरिंग किया करता था।

एक शर्ट बनाने के मिलते थे 100 रुपये

24 वर्षीय विजय पिछले 10 सालों से टेलरिंग का काम कर रहे है।विजय ने बताया की उसे कोई फिक्स वेतन दुकान से नही दिया जाता था,बल्कि काम के हिसाब से पैसे दिए जाते थे। जिसमें एक शर्ट बनाने के 100 रुपये,एक ब्लॉउज बनाने के भी 100 रुपये व इसके अलावा एक लेडिस शूट बनाने के 150 रुपये मिलते थे। विजय के अनुसार दीवाली के चलते अभी काम ज्यादा था और वह टाइम पर डिलवरी देने व एक्स्ट्रा इनकम के लिये ओवर टाइम कर रहा था। टेलरिंग करते समय ही उसे रिजल्ट घोषित होने व अपने चयन की सूचना मिली।कुलदीप ने करेंट अफेयर्स से टच में रहने के लिये व्हाट्सऐप जरूर इस्तेमाल किया पर वो तैयारी के दौरान फेसबुक से दूर रहे।

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