CBI रेड, ममता का धरना और अब राज्यसभा: कौन हैं राजीव कुमार? जिन्हें दीदी ने बनाया अपना 'सांसद' उम्मीदवार
Rajiv Kumar: तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने र्व पुलिस महानिदेशक (DGP) आईपीएस राजीव कुमार को राज्यसभा चुनावों के लिए उम्मीदवार बनाया है. राजीव कुमार पश्चिम बंगाल कैडर के 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. राजीव कुमार महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं. वह विधानसभा पुलिस कमिश्नरेट और कोलकाता पुलिस आयुक्त रह चुके हैं.

फोटो - इंटरनेट
Rajiv Kumar: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए अपने चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है. जिसमे पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) आईपीएस राजीव कुमार का नाम भी शामिल है. राजीव कुमार 31 जनवरी को DGP के पद से रिटायर हुए थे. वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी अधिकारी माने जाते हैं.
किन्हें बनाया गया राज्यसभा चुनाव का उम्मीदवार
जानकारी के मुताबिक़, ममता बनर्जी ने शुक्रवार 27 फरवरी को राज्यसभा की 4 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की. जिसमे बाबुल सुप्रियो, पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी और बंगाली फिल्म अभिनेत्री कोयल मल्लिक का नाम शामिल है.
सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाला नाम पूर्व आईपीएस आईपीएस राजीव कुमार है. जिसके बाद से उम्मीदवारों के नाम पर सवाल उठाये जा रहे हैं. वहीँ, ममता बनर्जी के करीबी होने के साथ ही राजीव कुमार का नाम बंगाल की राजनीती और प्रशासनिक में काफी चर्चित है. तो चलिए जानते हैं पूर्व आईपीएस राजीव कुमार कौन है.
कौन है पूर्व आईपीएस राजीव कुमार
नाम- राजीव कुमार
जन्म- 31 जनवरी 1966
बैच- 1989 बैच, पश्चिम बंगाल कैडर
मूल निवासी- चंदौसी, उत्तर प्रदेश
रिटायर्ड- 31 जनवरी 2026
राजीव कुमार पश्चिम बंगाल कैडर के 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. राजीव कुमार महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं. वह विधानसभा पुलिस कमिश्नरेट, पश्चिम बंगाल का पुलिस महानिदेशक, कोलकाता पुलिस आयुक्त रह चुके हैं. सीआईडी के एडीजी भी रह चुके हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इतने करीबी है की शारदा चिटफंड विवाद में CBI पूछताछ करना चाहती थी तो ममता बनर्जी धनरे पर बैठ गयी थी. तो चलिए विस्तार में जानते हैं.
राजीव कुमार जा जन्म 31 जनवरी 1966 में हुआ. मूल रूप से उत्तर प्रदेश के चंदौसी के रहने वाले हैं. 12वी के आईआईटी-रुड़की से कंप्यूटर विज्ञान में इंजीनियरिंग स्नातक की डिग्री हासिल की. उसके बाद उन्होंने यूपीएसएसी की तैयारी की और 1989 में यूपीएसएसी परीक्षा पास करके आईपीएस बन गए.
शारदा चिटफंड में नाम आया था सामने
पश्चिम बंगाल में वो कई बड़े पदों में रहने के साथ कई बड़े विवादों में उनका नाम सामने आ चूका है. 2013 के शारदा चिटफंड घोटाले के बाद 2019 में काफी चर्चा में आये थे. राजीव कुमार के खिलाफ शारदा और रोजेवैली चिटीफंड घोटाले में सबूत के साथ छेड़छाड़ करने व साक्ष्य नष्ट करने का आरोप लगा था. शारदा चिटफंड में निवेश करने वाले कई लाख लोग आर्थिक रूप से तबाह हो गए थे. तब राजीव कुमार विधाननगर पुलिस आयुक्त थे. राजीव कुमार पर आरोप था कि उन्होंने शारदा चिटफंड के मालिक सुदीप्तोसेन के सभी उपकरणों को खत्म कर दिया था. अगर सीबीआई को सेन के कार्यालय से इलेक्ट्रॉनिक फाइल में मिल जाती है तो ममता बनर्जी को सेन के साथ जेल में होने का दावा सीबीआई ने किया था.
राजीव कुमार की गिरफ्तारी पर CBI के खिलाफ धरने पर बैठी थी ममता
इस मामले की जांच के लिए राज्य सरकार की तरफ से एसआईटी बनाई गई थी. सीबीआई राजीव कुमार को गिरफ्तार करने भी पहुंच गई थी. तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गिरफ्तारी के खिलाफ धरने पर बैठ गई थीं. कुमार उस वक्त कोलकाता के पुलिस आयुक्त थे.
चुनाव आयोग ने DGP के पद से हटाया था
वहीँ, ममता के करीबी होने की वजह से 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने राजीव कुमार को कोलकाता पुलिस आयुक्त पद से हटा दिया था. इतना ही 2024 में भी राजीव कुमार जब पश्चिम बंगाल के डीजीपी थे तब भारतीय निर्वाचन आयोग ने महानिदेशक की कुर्सी से हटा दिया था. हालाँकि बाद में दोबारा पश्चिम बंगाल का डीजीपी नियुक्त किया गया था. डीजीपी उनकी आखरी पोस्टिंग थी, 31 जनवरी 2026 को वो रिटायर हो गए थे.
