जाति छानबीन हाई पॉवर कमेटी को आदेश जारी करने से रोक : फ़ूड ऑफ़िसर को तात्कालिक राहत..हाइकोर्ट के निर्देश- ''राज्य अपना जवाब पेश करे"

बिलासपुर,18 दिसंबर 2021। हाईकोर्ट ने जाति छानबीन की हाई पॉवर कमेटी को अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता के विरुध्द किसी भी प्रतिकूल आदेश जारी करने से रोक लगा दी है। याचिकाकर्ता के जाति को इस आधार पर हाई पॉवर कमेटी ने अमान्य किया था कि उसके परिजन का मूल निवास उत्तर प्रदेश है और वे सन् पचास से पहले का कोई ऐसा प्रमाण पेश नहीं कर पा रहे हैं जिस प्रमाण का संबंध छत्तीसगढ से हो।
इस मामले को लेकर याचिकाकर्ता जो कि खाद्य विभाग में खाद्य निरीक्षक के पद पर पदस्थ है, उसने हाईकोर्ट में पूर्व में याचिका दायर की थी, तब याचिकाकर्ता ने खाद्य विभाग आयुक्त को पत्र के खिलाफ संरक्षण माँगा था जबकि सत्यापित जाति प्रमाण पत्र के अभाव में सेवा समाप्ति की चेतावनी दी गई थी।हाईकोर्ट ने तब आदेश पर रोक लगाई थी लेकिन जाति छानबीन समिति की हाई पॉवर कमेटी को जाँच करने की छूट दी थी।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दकी और अनादि शर्मा ने बताया "हाई पॉवर कमेटी ने जाँच में पाया कि याचिकाकर्ता के पिता व पूर्वजों की जाति अहिरवार है लेकिन उनके पूर्वज चुंकि उत्तर प्रदेश के हैं इस आधार पर छत्तीसगढ में अजा सूचि में पात्रता नहीं है और जाति प्रमाण पत्र रद्द करने के लिए नोटिस जारी कर दिया.. इस नोटिस के विरुध्द फिर से हाईकोर्ट आए.. हमने कोर्ट को बताया कि,छत्तीसगढ सरकार के 2007 के परिपत्र के अनुसार छत्तीसगढ गठन के बाद ऐसे आबंटित कर्मचारी जिनका प्रदेश से संबंध नहीं रहा है उनके पति पत्नी और संतान को स्थानीय निवासी की परिभाषा में शामिल करने का प्रावधान है"
जस्टिस राजेंद्र सिंह सामंत ने सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता के विरुध्द प्रस्तावित आदेश पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को जवाब के लिए नोटिस जारी किया है।
