जानिए उस महिला आईएएस के बारे में जिनके अपॉइंटमेंट में लिख दिया गया था कि शादी करते ही कर दिया जाएगा निलंबित

NPG डेस्क । आज हम देश की उस महिला आईएएस के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके जॉइनिंग के समय अपॉइंटमेंट लेटर में लिख दिया गया था कि यदि वे शादी करेंगी तो उन्हें निलंबित कर दिया जाएगा। पर फिर उन्होंने अपनी सेवा के दौरान 7 मुख्यमंत्रियों व दो प्रधानमंत्री के साथ काम किया। और देश की सेवा करने पर उन्हें पद्मभूषण सम्मान से भी सम्मानित किया गया। जी हां हम बात कर रहे हैं देश की पहली महिला आईएएस की।
देश की पहली महिला आईएएस अन्ना राजम मल्होत्रा थीं। वे 1951 बैच की आईएएस थीं। अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास की थी। अन्ना राजम मल्होत्रा का जन्म केरल राज्य के एर्नाकुलम जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। वे मलयालम ऑथर पालियों पॉल की पोती थीं। उन्होंने कोझिकोडा से अपनी स्कूलिंग की थी। फिर चेन्नई में मद्रास यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन किया।अन्ना ने उस समय यूपीएससी की तैयारी शुरू की जब लड़किया इस बारे में सोचती भी नही थी। अपनी बेतहाशा मेहनत व विलक्षण प्रतिभा के बल पर उन्होंने अपने पहले अटेम्प्ट में ही सबसे कठिन मानी जाने वाली यह परीक्षा क्रैक कर ली।
परीक्षा का दिलचस्प पहलू यह रहा कि जब वह परीक्षा के तीसरे व आखरी चरण इंटरव्यू में पहुँची तब साक्षात्कार बोर्ड के सदस्यों ने उनकी वरीयता के बारे में जाना। जब उन्हें पता चला कि अन्ना की रुचि भारतीय प्रशासनिक सेवा (ias) मे हैं तब उन्होंने अन्ना को इसके लिए मना करते हुए विदेश सेवा व केंद्रीय सेवाओं में से कोई भी अन्य सेवा चुनने के लिए कहा। उनका मत था कि महिला अभ्यर्थियों के लिए आईएएस सूटेबल नही है और अन्ना को कोई दूसरा विकल्प चुन लेना चाहिए पर अन्ना आईएएस चुनने के लिए अड़ी रहीं। और उन्होंने आईएएस ही चुना। पर जब अन्ना को सर्विस में जॉइनिंग मिली तो उनके अपॉइंटमेंट लेटर पर लिखा था कि " आपकी शादी होने पर आपको निलंबित किया जा सकता है। बावजूद उसके उन्होंने अपने लक्ष्य के लिए हर त्याग करने की ठानी और आईएएस की सर्विस जॉइन कर ली। हालांकि जॉइनिंग के कुछ सालों बाद नियम बदलने पर उन्होंने अपने बैचमेट आरएन मल्होत्रा से शादी कर ली थी।
अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने दो प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी व राजीव गांधी और 7 मुख्यमन्त्रियों के साथ काम किया। 1982 में देश मे एशियाई खेलों के आयोजन के समय वे प्रभारी रहीं और उत्कृष्ट कार्य किया। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय में भी अपनी सेवाएं दी। रिटायरमेंट के बाद होटल लीला वेंचर लिमिटेड के डायरेक्टर के पद पर भी काम किया। उन्हें 1989 में देश की सेवा के लिए पद्मभूषण पुरुस्कार से सम्मानित किया गया। वर्ष 2018 में 91 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।
