IAS Priyanka Shukla: काहे माने, तुम्हारी बात…कउनो कलेक्टर हो का ! और देखिये वो बनी कलेक्टर

IAS Priyanka Shukla: जशपुर। बात होगी साल 2007 की ! एक युवा मेडिकल छात्रा.. डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी कर, एक मेडिकल कैंप में थी। एक महिला रोज़ कभी पति को ले आती, कभी बच्चे को, तो कभी ख़ुद को। मामला बस इतना था कि पानी को उबाल कर पीना था, वो हाँ, बोलती पर वैसा करती नहीं। और हफ़्ता ना बीतता वो फिर हाज़िर.. कि "डाक्टराईन मेडम दवा दो"... संयोग कुछ ऐसा हुआ कि डॉक्टरों का दल उस महिला की बस्ती जा पहुँचा। उस युवा महिला चिकित्सक ने उस महिला को देखा कि.. वो बस कहती रही कि पानी उबाल के पी रही हूँ, पर वो पानी उबाल नहीं रही थी। युवा महिला चिकित्सक भड़की और डाँटते हुए कहा.. "तुम समझती क्यों नही.. पानी क्यों नहीं उबालती" उस महिला ने जवाब में कह दिया..
"काहे माने तुम्हारी बात.. कउनो कलेक्टर हो"
और ये बात डाक्टर मैडम को चुभ गई। नर्सरी से लेकर मेडिकल कॉलेज तक हमेशा फ़र्स्ट आने वाली मेडिकल स्नातक उस युवा ने उसके बाद यूपीएससी का एग्जाम दिया और दूसरे अटैम्प में परीक्षा क्लियर कर गयी।
एकेडमी में भी प्रशिक्षण के दौरान परीक्षाओं को बेहतरीन तरीक़े से देते हुए वो महिला रैंकिंग के पायदान में नंबर पाँच पर आ गयी।
वहीं मेडिकल स्नातक जिसे उस महिला ने खीज कर तंज किया था, वो आईएएस सलेक्ट हुई और कलेक्टर बनी। वो जशपुर कलेक्टर है जिसका नाम है ..डॉक्टर प्रियंका शुक्ला..
प्रियंका ने एनपीजी से कहा -
"दरअसल यह मेरे पापा का कहना था कि..तुम कलेक्टर बनो, उनकी प्रेरणा सपोर्ट तो था ही, पर उस महिला की बात भी कोई कमतर नहीं थी। उसने अपनी ग़लती पकड़ाने पर खीज में कहा,लेकिन बात वो लग गई.."
प्रियंका शुक्ला की मुलाक़ात तो उस महिला से दोबारा तो नहीं हुई..अलबत्ता इंजीनियर रहे पिता अपनी बिटिया के कलेक्टर के रूप में जशपुर ज्वाइन करने पर जशपुर आए और भाव भरी आँखों से देर तक डॉ प्रियंका शुक्ला ज़िलाधीश वाला बोर्ड देखते रहे और उसके बाद उन्होंने उस बोर्ड की तस्वीर खींची और अपने करीबी दोस्तों को भेजते हुए लिखा -
"मेरी बेटू ने मेरा सपना सच कर दिया"
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