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Chhattisgarh Tarkash 2026: एमडी टू मिनिस्टर

Chhattisgarh Tarkash 2026: छत्तीसगढ़ की ब्यूरोक्रेसी और राजनीति पर केंद्रित पत्रकार संजय के. दीक्षित का पिछले 17 बरसों से निरंतर प्रकाशित लोकप्रिय साप्ताहिक स्तंभ तरकश।

Chhattisgarh Tarkash 2025: रोलर युग में कड़ी और चांदा
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By Sanjay K Dixit

तरकश, 5 अप्रैल 2026

संजय के. दीक्षित

एमडी टू मिनिस्टर

तरकश के पिछले स्तंभ में बिजली कंपनी के एक एमडी के नवाबी ठसन का किस्सा बयां किया था...कैसे वे मंत्रियों की तरह अपने काफिले की पायलेटिंग कराते हैं। अब पता चला है कि एमडी अगला विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्हें किसी ने कह दिया है कि अगर चुनाव जीत गए तो मंत्री पक्का बनोगे...जब ऐसे-वैसे लोग मंत्री बन सकते हैं तो तुम तो पढ़े-लिखे...बड़े इंजीनियर से एमडी पद पर पहुंचे हो। इसके बाद से एमडी के लटके-झटके अभी से मंत्रियों जैसे हो गए हैं। चुनाव लड़ने के लिए उनके मैडम भी खूब निभा रही हैं। जिस इलाके में चुनाव लड़ने की तैयारी है वहां धड़ाधड़ समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। शिविरों में गरीबों के बिजली बिल का बकाया बिल मैडम भुगतान कर देती हैं। पीछे बैठे जेई, एई जेब से मैडम को पैसे निकाल कर देते हैं, और मैडम उसे जमा करा देती हैं। फिर होता है...जय-जयकार। व्हाट एन आईडिया। अफसर रहते नेताओं जैसा जय-जयकार।

अफसर को एक्सटेंशन!

पीसीसीएफ और हेड ऑफ फॉरेस्ट श्रीनिवास राव का रिटायरमेंट का समय नजदीक आ गया है। अगले महीने 31 मई को उनकी सेवानिवृत्ति है। मगर इसी के साथ उन्हें एक्सटेंशन मिलने की अटकलें भी तेज हो गई है। जाहिर है, श्रीनिवास राव भूपेश बघेल सरकार में सात सीनियर अफसरों को सुपरसीड कर हेड ऑफ फॉरेस्ट बने थे। जब वे फॉरेस्ट के हेड बने थे, तब आश्चर्यजनक तौर से वे पीसीसीएफ भी प्रमोट नहीं हुए थे। और दिसंबर 2023 में विष्णुदेव साय की सरकार आने के बाद भी ढाई साल से पिच पर बने हुए हैं, तो उनमें कुछ तो बात होगी। वैसे उनके एक्सटेंशन की अटकलों के पीछे मजबूत पॉलिटिकल बैकिंग बताई जा रही है। श्रीनिवास राव के निकटतम परिजन आंध्रप्रदेश में ऐसे कद्दावर नेता है, जिनके खेमे में दो दर्जन विधायक हैं। उसी गुट के सपोर्ट पर चंद्राबाबू नायडू की सरकार चल रही है और चंद्राबाबू के सपोर्ट पर केंद्र सरकार। तो फिर उनके एक्सटेंशन की खबरों को एकदम से खारिज नहीं किया जा सकता।

माटी पुत्र

श्रीनिवास राव के बाद सीनियरिटी में पहले नंबर पर अरुण पाण्डेय हैं। 94 बैच के आईएफएस अरुण हेड ऑफ फॉरेस्ट के प्रबल दावेदार हैं। मगर श्रीनिवास राव को एक्सटेंशन मिला तो फिर अरुण पाण्डेय को हेड ऑफ फॉरेस्ट बनने की संभावनाएं क्षीण हो जाएंगी। अलबत्ता, श्रीनिवास को अगर एक्सटेंशन न मिला तो फिर हॉफ के लिए मुख्य मुकाबला दो अंबिकापुरिया में होगा। अरुण पाण्डेय और ओपी यादव दोनों अंबिकापुर के रहने वाले हैं। याने दोनों में से कोई भी बने, कोई माटी पुत्र ही हेड ऑफ फॉरेस्ट होगा। बशतें एक्सटेंशन की चकरी न चले।

नो ट्रांसफर

छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक ट्रांसफर पर कुछ दिनों के लिए ब्रेक लग गया है। अब मई के फर्स्ट वीक तक जाकर ही कुछ हो पाएगा। बता दें, सूबे में कलेक्टर, एसपी, डीएफओ, जिला पंचायत सीईओ समेत डिप्टी कलेक्टरों के ट्रांसफर काफी दिनों से अवेटेड है। मगर सरकार ने फैसला किया है कि फिलहाल कोई चेंज नहीं किया जाए। जो होगा अब मई फर्स्ट वीक तक...या हो सकता है 15 मई तक चला जाए। इसकी एक बड़ी वजह पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं। इसमें छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में अफसरों की ड्यूटी लगी है। वेस्ट बंगाल में अप्रैल के अंत में वोटिंग है। सीएम सचिवालय के सूत्रों का कहना है, अफसरों के इलेक्शन से लौटने के बाद ही ट्रांसफर होंगे। याने मई ट्रांसफर का महीना रहेगा। जाहिर है, कई जिलों के कलेक्टर, एसपी, डीएफओ बोरिया-बिस्तर बांध कर प्रतीक्षा कर रहे हैं। मगर उन्हें अभी महीना-डेढ़ महीना और इंतजार करना पड़ेगा।

कमिश्नर रिटायर

रायपुर के डिविजनल कमिश्नर महादेव कावड़े अगले महीने सेवानिवृत्त हो जाएंगे। 31 मई उनका लास्ट डेट रहेगा। इसलिए, रायपुर में नया कमिश्नर भी अपाइंट करना होगा। मई में होने वाली प्रशासनिक सर्जरी में नए रायपुर कमिश्नर भी शामिल होंगे। वैसे, सरकार ने प्रमोटी आईएएस को कमिश्नर बनाने का स्टैंडर्ड सेट कर दिया है। लिहाजा, अत्यधिक संभावना है कोई प्रमोटी आईएएस रायपुर का नया कमिश्नर बनेगा। भले ही वह मंत्रालय के सचिव स्तर का कोई अधिकारी क्यों न हो।

सिंगल ऑफिसर और हनी ट्रेप

बिलासपुर में आईजी लेवल के दो अफसरों को ट्रेप किया गया। ये दोनों सिंगल थे और जाहिर तौर से सिंगल वाले को फंसना-फंसाना ज्यादा आसान होता है। इसलिए, बिलासपुर के नए आईजी ज्वाईनिंग के साथ ही परिवार लेकर बिलासपुर चले गए। ऐसा करना भी चाहिए। बिलासपुर के कप्तान को भी सतर्क रहना चाहिए। बदमाशों, अपराधियों को वे लगातार जेल भेज रहे हैं। वैसे, हनी ट्रेप के शिकार ज्यादा सिंगल अफसर ही होते हैं। सिंगल वाले पर डोरे डालना आसान होता है। बिलासपुर संभाग के एक पूर्व कलेक्टर सिंगल रहने के चलते बाल-बाल बचे। हालांकि, बदनामी तो पूरी हो गई। बस्तर संभाग के एक कलेक्टर भी कब हनी ट्रेप के शिकार होकर मीडिया की सनसनी बन जाएं, कुछ कहा नहीं जा सकता। खतरा मंत्रालय में भी कम नहीं है। कई अफसर परिस्थितियोंवश सिंगल हैं। वहां कई सप्लाई कंपनियों और मेट्रो सिटीज के एनजीओ की कुड़ियां शिकार की तलाश में घूमती रहती हैं। कुल मिलाकर पावर और पैसा जहां है, वहां मधुमक्खियां मंडराएंगी ही। ऐसे अफसरों की पत्नियों को विशेष अलर्ट रहने की जरूरत है। वरना, बाद में पछताने के अलावा कोई चारा नहीं बचता।

नाइंसाफी?

सरगुजा से नक्सलियों का सफाया करने वाले आईपीएस अधिकारी एसआरपी कल्लूरी ऐसे घनचक्कर में फंस गए हैं कि सीनियर होने के बाद उन्हें डीजी बनने में लंबा वेट करना होगा। दरअसल, परिस्थितियां कुछ ऐसी बनी कि 94 बैच में सीनियर होने के बाद भी जीपी सिंह और एसआरपी कल्लूरी डीजी प्रमोशन से चूक गए। जीपी तो लड़-भिड़कर अपना प्रमोशन करा लिए मगर अत्यधिक तेज-तरार्र आईपीएस माने जाने वाले कल्लूरी पता नहीं क्यों ठंडे पड़ गए। और अब आगे उनके लिए कोई स्कोप भी नजर नहीं आता। डीजी के चार ही पद है। दो कैडर, दो एक्स कैडर। इन चार पदों पर इस समय अरुण देव गौतम, पवनदेव, जीपी सिंह और हिमांशु गुप्ता बैठे हैं। गौतम का अगले साल रिटायरमेंट है मगर कहीं पूर्णकालिक डीजीपी बन गए तो फिर उनका कार्यकाल दो साल का हो जाएगा। याने फिर 2028 में रिटायर होंगे। उसके बाद ही कल्लूरी का रास्ता साफ हो पाएगा। तिरूपति वाले बालाजी की कहीं विशेष चकरी चल गई तो फिर बात अलग है....सरकार चाहे तो उन्हें केंद्र से बात कर स्पेशल डीजी बना सकती है।

चंदे से शादी

अभी तक गांवों में अनाथ या गरीबों की बेटियों की शादी लोग जरूर चंदा देकर करा देते थे। मगर प्रभावशाली लोग ऐसा करने लगे तो ये ठीक नहीं। इससे सूबे में एक नई परिपाटी शुरू हो जाएगी। कुछ दिनों पहले एक मंत्री के साथ साये की तरह रहने वाले की शादी हुई, उसमें भी अधिकारियों, सप्लायरों से बड़ा चंदा हुआ। और इस समय फिर ऐसी ही वसूली हो रही है। रायपुर में अफसरों से कहा जा रहा...भले ही परचेजिंग तेज कर दो, मगर इतना चाहिए तो चाहिए। अब इसमें से उपर कितना पहुंचेगा और कितना चेले-चपाटी भाई साहब के नाम पर अंदर कर लेंगे, ये भी बड़ा प्रश्न है। सार यह है कि बड़े लोगों को इन सबको लेकर सजग रहना चाहिए।

बिना एसपी के डीआईजी

छत्तीसगढ़ में राज्य पुलिस सेवा का बड़ा बुरा हाल है। डिप्टी कलेक्टरों में 2013 बैच तक आईएएस अवार्ड हो गया मगर डीएसपी में अभी 2002 बैच में ही मामला अटका हुआ है। नाइंसाफी भी ऐसी कि जो आईपीएस बने, उन्हें एसपी बनने का मौका नहीं मिला। श्वेता राजमणि बिना एसपी बने ही डीआईजी प्रमोट हो गई। हालांकि, सरकार चाहे तो डीआईजी को भी एसपी बना सकती है मगर सिस्टम में समरथ को न दोष गोसाई जैसी स्थिति है। उमेश चौधरी भी आईपीएस बनकर पीएचक्यू में टाईम काट रहे हैं। उधर, मनोज खिलाड़ी कुछ सीनियर आईपीएस अफसरों के जोर लगाने पर जीपीएम जैसे जिले के एसपी बन पाए। जबकि, उनके बाहर से अतिक्रमण करके आए बैचमेट दो-दो, तीन-तीन जिले की कप्तानी कर चुके हैं। कुल मिलाकर रापुसे पर ’दुबर पर दो आसाढ़’ वाली स्थिति है...एक तो आईपीएस अवार्ड में पीछे और उपर से आईपीएस हो गए तो बिना किसी एप्रोच के जिला नहीं मिल पाएगा।

डिप्टी कलेक्टरों के बुरे दिन

डीएसपी की जैसा हाल अब डिप्टी कलेक्टरों का भी होना है। 2013 बैच के 30 में से तीन आईएएस बने हैं। अभी 27 बचे हैं। 2014 बैच में भी 30 डिप्टी कलेक्टर हैं और 2015 बैच में उससे दुगुना। याने 60। हालांकि, आईएएस का कैडर रिवीजन में पद बढ़ गया है फिर भी अब आईएएस अवार्ड होने के लिए काफी पापड़ बेलने पड़ेंगे। हो सकता है कई को एडिशनल कलेक्टर से ही रिटायर होना पड़ जाए। इस समय राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की संख्या बढ़कर 448 पहुंच गई है। इतने छोटे राज्य में कभी इतना ज्यादा अफसर होते नहीं। मगर डिप्टी कलेक्टरों को जनपद सीईओ बनाने के लिए एक बार पद बढ़ाया गया तो फिर बढ़ता चला गया। इसका खामियाजा अब अफसरों को उठाना पड़ेगा।

’उड़ता छत्तीसगढ़’

दुर्ग पुलिस द्वारा हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद करने से हड़कंप मच गया है। हाइड्रोपोनिक गांजा बैंकॉक और हांगकांग के समुद्र में उगाया जाता है। यह इतनी कीमती है कि बाजार रेट इसका एक करोड़ रुपए किलो है। इसके बाद भी छत्तीसगढ़ में इसकी सप्लाई हो रही है तो समझा जाता है कि छत्तीसगढ़ में किस लेवल पर गांजे का इस्तेमाल किया जा रहा है। लोकल गांजा लोवर क्लास के लोग इस्तेमाल करते ही हैं, लोगों को नशे की लत ऐसी लगती जा रही कि बड़े-बड़े लोग सिगरेट में भरकर गांजा पी रहे हैं। दुर्भाग्यजनक यह है कि छत्तीसगढ़ के कुछ युवा नौकरशाहों के नाम भी गांजे का सेवन करने में आ रहा है। वाकई, यह चिंताजनक है। आखिर नई पीढ़ी कहां जा रही है?

अंत में दो सवाल आपसे

1. किस तेज-तर्रार पुलिस अधीक्षक को हटाने के लिए नेताओं और माफियाओं ने नवरात्रि में बकरे की बलि दी है?

2. पूर्णकालिक डीजीपी का फैसला दो-एक दिन में होना है, अरुणदेव गौतम और हिमांशु गुप्ता में से किसके सिर सजेगा पुलिस प्रमुख का ताज?

Sanjay K Dixit

संजय के. दीक्षित: रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से एमटेक करने के बाद पत्रकारिता को पेशा बनाया। भोपाल से एमजे। पिछले 30 साल में विभिन्न नेशनल और रीजनल पत्र पत्रिकाओं, न्यूज चैनल में रिपोर्टिंग के बाद पिछले 10 साल से NPG.News का संपादन, संचालन।

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