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Chhattisgarh Tarkash 2025: छत्तीसगढ़ के दो पैर वाले पेटू चूहे

Chhattisgarh Tarkash 2025: छत्तीसगढ़ की ब्यूरोक्रेसी और राजनीति पर केंद्रित पत्रकार संजय के. दीक्षित का पिछले 17 बरसों से निरंतर प्रकाशित लोकप्रिय साप्ताहिक स्तंभ तरकश।

Chhattisgarh Tarkash 2025: रोलर युग में कड़ी और चांदा
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By Sanjay K Dixit

तरकश, 11 जनवरी 2025

संजय के. दीक्षित

छत्तीसगढ़ के दो पैर वाले पेटू चूहे

पिछले साल झारखंड की एक खबर बेहद चर्चा में रही...चूहे 800 बोतल शराब गटक डाले तो एक करोड़ का गांजा पीकर मतवाले हो गए। मगर छत्तीसगढ़ के चूहे उनसे आगे निकल गए। बल्कि पेटू भी। राजधानी रायपुर से 100 किलोमीटर दूर कवर्धा में चूहे सात करोड़ के धान खा गए। स्टॉक के मिलान में खुलासा हुआ कि 26 हजार क्विंटल धान गायब है। अकेले चारभाटा केंद्र से ही 22 हजार क्विंटल। अफसरों ने कहा, चूहे खा गए। 22 हजार क्विंटल धान करीब सात करोड़ के होते हैं। याने कवर्धा के चूहे सात करोड़ के धान खा गए। अब आप कहेंगे के ये असंभव है...बेचारे, छोटे मूसक 26 हजार क्विंटल धान कैसे खा सकते हैं? तो आपको यकीन करना होगा...चूहे ही धान चट किए हैं...भले ही वो दो पैर वाले चूहे क्यों न हो। पिछले साल ऐसे ही दो पैर वाले बेईमान चूहों की वजह से धान खरीदी में 8000 करोड़ का नुकसान हुआ था। इन पेटू चूहों के चलते स्थिति ये आ गई है कि दो-एक साल बाद सरकार धान खरीदने की स्थिति में नहीं रहेगी। 38 हजार करोड़ मार्कफेड पर लोन हो गया है। इन चूहों के बड़े पेट का ही नतीजा है कि सूबे में धान का रकबा लगभग उतना ही है, मगर खरीदी नौ गुना बढ़ गई। 2002-03 में 18 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी, पिछले साल यह 149 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया। छत्तीसगढ़ के ये चूहे धान खा-खाकर इतने स्ट्रांग हो गए हैं कि ईडी भी ज्यादा कुछ नहीं कर पा रही। राईस मिलों के चूहे तो और भी खटराल हैं...वे सिर्फ धान को रिसाइकिलिंग कर नहीं खाते बल्कि नोट भी रिसाइकिल कर लेते हैं। सिस्टम से सौदा कर अकाउंट में लेकर कैश में वापसी करने का मसला आखिर ईडी की जांच में आया ही था। मगर फिर बात वहीं पर...चूहे बहुत मजबूत हैं। लास्ट ईयर 10 हजार करोड़ के धान दो पैर वाले चूहे खा गए। तो समझ सकते हैं, 25 साल में कितने हजार करोड़ के धान खाकर वे कितने बड़े माफिया बन गए होंगे।

किधर हैं कलेक्टर?

धान खरीदी के फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने इस बार सरकार ने बड़ी तैयारी की थी। कलेक्टरों की कई बार वीसी हुई। कलेक्टर कांफ्रेंस में भी आगाह किया गया। दावे किए गए इस बार ऐसी टेक्नालॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा कि धान खरीदी में परिंदा पर नहीं मार सकता। ठीक है, परिंदा तो नहीं मगर चूहे जरूर माल हजम कर गए। और इसमें हुआ क्या? चूहों के जरिये सात करोड़ के धान चट करवाने वाले डीएमओ को नोटिस दी गई है। डीएमओ का यह कहना भी गौरतलब है कि हमारे जिले की स्थिति काफी अच्छी है। याने बाकी जिलों की अगर जांच हो जाए तो फिर कयामत आ जाएगी। बहरहाल, जब तक दो-चार बड़े कौवे को मारकर नहीं लटकाया जाएगा, तब तक सरकार के लिए फर्जी धान खरीदी रोकना मुमकिन नहीं होगा। चीफ सिकरेट्री विकास शील खुद भी सिकेट्री फूड रह चुके हैं। कलेक्टरों को तलब कर उनसे टू द प्वाइंट बात करनी चाहिए। कलेक्टर अगर ठान ले तो विभागों के खटराल अधिकारियों की क्या मजाल।

कमिश्नर की रेटिंग डाउन

छत्तीसगढ़ सरकार ने पोलिसिंग में बड़ा रिफार्म करते हुए पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने का फैसला लिया मगर कमिश्नरेट के एरिया में कैंची चल जाने की वजह से इस पद की रेटिंग डाउन हो गई है। पुलिस कमिश्नर के दावेदारों में चार्म सिर्फ फर्स्ट पुलिस कमिश्नर बनने तक रह गया है। बाकी तो सिटी एसपी जैसा ही मामला रहेगा। पुलिस कमिश्नर के बाद दूसरे नंबर का पद ज्वाइंट कमिश्नर का होता है। इस पर डीआईजी लेवल के अधिकारी की पोस्टिंग की जाएगी। मगर सवाल यह है कि डीआईजी रैंक के जो एसपी बड़े जिले संभाल रहे हैं, वे रायपुर कमिश्नरेट में एडिशनल एसपी टाईप काम करना क्यों चाहेंगे। अगर ऐसा हुआ तो ये उनका डिमोशन ही तो होगा। कुल मिलाकर कमिश्नरेट को लेकर पुलिस महकमे में कोई उत्सुकता नहीं है।

ओएसडी की नियुक्ति

जैसा कि विदित है, रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम 23 जनवरी से प्रारंभ हो जाएगा। कमिश्नरेट में उस दिन एक बड़ा जलसा होगा। मुख्यमंत्री समेत सारे मंत्री इस मौके पर मौजूद रहेंगे। उससे पहले कमिश्नरेट की तैयारियों के लिए दो-एक दिन में पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति कर दी जाएगी। हालांकि, अभी उनका पदनाम ओएसडी होगा। ठीक उसी तरह जैसे नए जिले बनते हैं तो कलेक्टर, एसपी को पहले ओएसडी बनाकर भेजा जाता है। ताकि, वे तैयारी वगैरह करा लें। फिर जिस दिन से जिला बनता है, उस रोज उन्हें कलेक्टर, एसपी नियुक्त कर दिया जाता है। उसी तरह रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में भी ओएसडी की नियुक्ति होने वाली है।

फर्स्ट पुलिस कमिश्नर?

जाहिर तौर पर आईजी रैंक के आईपीएस अधिकारी को रायपुर का फर्स्ट पुलिस कमिश्नर बनाया जाएगा। इससे पहले ओएसडी की नियुक्ति होगी। इसके लिए दुर्ग आईजी रामगोपाल गर्ग और बिलासपुर आईजी संजीव शुक्ला का नाम प्रमुख तौर पर चर्चा में है। रामगोपाल साफ-सुथरी छबि के आईपीएस हैं। सीबीआई में सात साल डेपुटेशन पर रह चुके हैं। नियम-कायदे, कानून के जानकार भी हैं। संजीव शुक्ला की छबि भी अच्छी है। वे रायपुर के एसपी रह चुके हैं और छत्तीसगढ़ पुलिस की दृष्टि से काफी अनुभवी हैं। लोकल होने की वजह से उनके अपने कंटेक्ट हैं। उनके माइनस प्वाइंट है कि अगले साल जनवरी में रिटायरमेंट है। याने पोस्टिंग के बाद सिर्फ 11 महीने बचेगा। रामगोपाल गर्ग के साथ एक ड्रॉ बैक है कि रायपुर के लिए नए होंगे। रामगोपाल अगर पुलिस कमिश्नर बनते हैं तो रायपुर को समझने वाले किसी ठीकठाक डीआईजी को ज्वाइंट कमिश्नर बनाया जा सकता है। वो या तो अजातशत्रु हो सकते हैं या फिर शशिमोहन सिंह। या रजनेश सिंह या विजय अग्रवाल। मगर प्रश्न है दसेक साल पहले ये चारों अफसर रायपुर में एडिशनल एसपी रह चुके हैं फिर डीआईजी बनने के बाद एडिशनल एसपीगिरी करने यहां क्यों आएंगे? बहरहाल, बात ओएसडी और नए पुलिस कमिश्नर की तो सरकार में इस पर मंथन चल रहा है कि रामगोपाल और संजीव में से कौन बेहतर रहेगा।

IG यथावत! SSP चेंज

आईपीएस अफसरों की पेंडिंग डीपीसी सोमवार को कंप्लीट हो जाएगी। उसके दो-एक दिन बाद आदेश भी निकल जाएगा। प्रमोशन के बाद नई पोस्टिंग होगी, फिर दुर्ग या बिलासपुर में से कोई आईजी अगर पुलिस कमिश्नर बना तो फिर वहां नए आईजी की नियुक्ति करनी होगी। इसके लिए जल्द ही आईपीएस की एक लिस्ट निकलेगी। इसमें कई जिलों के एसपी भी होंगे। खासकर, जिनका दो साल हो गया है। सबसे अधिक उत्सुकता रायपुर रेंज को लेकर है। पुलिस कमिश्नर बनने के बाद अमरेश मिश्रा आईजी बने रहेंगे। सिर्फ शहर के 21 थाना उनके कार्यक्षेत्र से कम हो जाएंगे। शंकर नगर स्थित रायपुर आईजी ऑफिस भी यथावत रहेगा और उनकी कुर्सी भी। रही बात, रायपुर एसएसपी लाल उमेद सिंह की, तो 22 जनवरी को विदाई के बाद उन्हें अच्छी पोस्टिंग मिलने की चर्चा है...ट्रांसपोर्ट को लेकर भी कुछ सुनने में आ रहा हैं।

मोदीजी की चूक!

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू का नाम न होने की वजह से बीते सोमवार को बिलासपुर में आयोजित नगरीय निकाय का कार्यक्रम निरस्त हो गया। वो भी ऐसे वक्त पर जब पब्लिक आनी शुरू हो गई थी। इश्यू यह रहा कि बिलासपुर के सांसद होने के नाते तोखन साहू का नाम अतिथियों में शामिल नहीं था। बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल भी गोल थे। कुछ दिन पहले बिलासपुर में आयोजित युवा महोत्सव में भी तोखन साहू का नाम प्रोटोकॉल के अनुसार नहीं लिखा गया, इसको लेकर भी तोखन खेमे में बेचैनी थी। असल में, चूक मोदी जी से हुई, जिन्होंने तोखन साहू को अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया। अब डिप्टी सीएम अरुण साव और तोखन साहू एक ही विधानसभा क्षेत्र से हैं। दोनों साहू। एक ही स्कूल के सहपाठी भी। मोदीजी ने अरुण साव की अध्यक्षी में चुनाव होने के बाद भी उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया, उपर से तोखन साहू को प्रोटोकॉल में उपर कर दिया। उधर, बिलासपुर के अफसर भी मजे लेने में कम नहीं...नेहरु चौक पर घर अलॉट कर दिया अगल-बगल। याने सुबह उठने के साथ फुल तनाव। जाहिर है, दोनों में से कोई एक ही साहू आगे जाएगा। केंद्रीय राज्य मंत्री प्रोटोकॉल में राज्य के मंत्री से उपर होता है। अरुण साव भले ही डिप्टी सीएम हैं मगर नेशनल प्रोटोकॉल में डिप्टी सीएम का कोई जिक्र नहीं है। डिप्टी सीएम को मंत्री मानते हुए केंद्रीय मंत्री को उपर रखा गया है। ऐसे में, अगर तोखन साहू किसी कार्यक्रम में पहुंचेंगे तो उनका नाम सबसे उपर लिखा जाएगा। अरुण को यह नागवार गुजरेगा ही। जाहिर है, मोदीजी की इस चूक के चक्कर में बिलासपुर के अधिकारी पिस रहे हैं। अमर, धरम, अरुण और तोखन को अगर टेंशन होगा तो गुस्सा अफसरों पर ही निकलेगा न।

कांक्लेव पर सस्पेंस

चीफ सिकरेट्री विकास शील काम धाम में जितना अनुशासित और कड़क हैं उतने ही अच्छे सिंगर भी हैं। किशोर कुमार उनके फेवरेट हैं और उन्हीं के गाने गाते हैं। आईएएस कांक्लेव में उन्होंने दो गाने गाकर अफसरों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मगर पता नहीं क्यों, उनके अफसरों ने आईएएस कांक्लेव को गोपनीय बनाने में पूरी उर्जा लगा दी। आखिर इतना खौफ क्यों? अफसर भी आखिर इंसान हैं, उन्हें भी जीवन जीने, इंज्वाय करने का अधिकार है। फिर ऐसे कार्यक्रमों से टीम स्पिरिट आती है। सीनियर-जूनियर अफसरों में इंटरेक्शन होता है। इस बार का कांक्लेव इस मायने में भी खास था कि पीएम अवार्ड की तरह सीएम अवार्ड समारोह भी इसमें शामिल था। फिर देश के सर्वोच्च सर्विस में हैं तो उनके प्रति आम आदमी की उत्सुकता भी रहेगी ही। अच्छे काम करने वाले अधिकारियों की मीडिया में सदैव सराहना मिलती है। और ऐसा भी नहीं कि छत्तीसगढ़ के सारे आईएएस ईडी, सीबीआई, एसीबी ब्रांड वाले हैं। अच्छे अधिकारियों की संख्या कहीं अधिक है, फिर भी कांक्लेव पर अगर सस्पेंस बरता गया तो फिर क्या ही कहा जा सकता है।

एक और अफसर डेपुटेशन पर

बलौदा बाजार कलेक्टर दीपक सोनी को भारत सरकार के हेल्थ डिपार्टमेंट में डायरेक्टर की पोस्टिंग मिल गई है। इस महीने के लास्ट तक वे यहां से रिलीव हो जाएंगे। दीपक को उस समय बलौदा बाजार के कलेक्टर का दायित्व सौंपा गया था, जब जिला मुख्यालय हिंसा की चपेट में था। उग्र भीड़ ने कलेक्ट्रेट, एसपी ऑफिस समेत न्यायिक कार्यालयों को फूंक दिया था। उस कठिन परिस्थितियों में दीपक को बलौदा बाजार भेजा गया। और प्रशासनिक सूझबूझ से वे बेकाबू स्थिति को हैंडिल करने में कामयाब रहे। बहरहाल, दीपक सोनी के बाद अब जगदलपुर कलेक्टर एस0 हरीश भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले हैं।

डबल पोस्टिंग

रिटायर आईएएस अधिकारी उमेश अग्रवाल को सरकार ने सूचना आयुक्त बनाया है। जून 2022 में रिटायर होने वाले उमेश को सरकार ने पहले पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण में मेंबर बनाया था। वहां 62 साल एज है, सो वहां से हटने के बाद अब उन्हें सूचना आयुक्त की पोस्टिंग मिल गई। जून 2027 में वे 65 साल के हो जाएंगे, सो डेढ़ साल का उनका कार्यकाल रहेगा। याने सरकार को अगले साल फिर सूचना आयुक्त का विज्ञापन निकालना होगा। अक्खड़ स्वभाव के उमेश अग्रवाल तेज और समझ वाले माने अफसर माने जाते हैं। वैसा अफसर रिटायरमेंट के बाद भी सूचना आयुक्त की पोस्टिंग ग्रहण कर लेगा, इस पर आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है। परिजनों के साथ जंगल में नेचर के बीच बढ़ियां जीवन गुजारते, कहां वे माया-मोह के चक्कर में पड़ वे भीड़ में शामिल हो गए। बहरहाल, सूचना आयोग की नियुक्तियों में नौकरशाही भारी पड़ी। तीन में से सीआईसी और सूचना आयुक्त के दो पद उनके खाते में गए।

अंत में दो सवाल आपसे?

1. छत्तीसगढ़ के मंत्रीजी लोग अपने खटराल पीए को बदल रहे, क्या नितिन नबीन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने का ये इफेक्ट है?

2. आलाकमान के बरदहस्त के बाद भी दीपक बैज भूपेश बघेल को डोमिनेंट कर पार्टी का फेस क्यों नहीं बन पा रहे?

Sanjay K Dixit

संजय के. दीक्षित: रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से एमटेक करने के बाद पत्रकारिता को पेशा बनाया। भोपाल से एमजे। पिछले 30 साल में विभिन्न नेशनल और रीजनल पत्र पत्रिकाओं, न्यूज चैनल में रिपोर्टिंग के बाद पिछले 10 साल से NPG.News का संपादन, संचालन।

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