अपने गुरु को भगवान का दर्जा दिलवाने सुप्रीम कोर्ट पहुंचा शिष्य, अदालत ने कहा खुद मानो भगवान और लगाया 1 लाख का जुर्माना

एनपीजी डेस्क। अपने गुरु को भगवान मानने के लिए एक शिष्य ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका लगा दी। याचिका में मांग की गई कि "योर ऑनर मेरे गुरु श्री श्री अनुकूल चंद्र ठाकुर को परमात्मा मानने का आदेश जारी कीजिये" जिस पर अदालत ने फटकार लगाते हुए कहा कि आप खुद ही उन्हें भगवान मानिए। साथ ही याचिका खारिज करते हुए जनहित याचिका का दुरुपयोग करने पर एक लाख का जुर्माना भी याचिकाकर्ता पर थोप दिया।
उपेंद्र नाथ दलाई ने अपने गुरु श्री श्री अनुकूल चन्द्र ठाकुर को परमात्मा मानने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। उनका कहना था कि उनके गुरु ने देश व समाज के लिए बहुत कुछ कार्य किया है, अतः उनके गुरु को भगवान का दर्जा देने के लिए अदालत आदेश जारी करे। अपनी याचिका में दलाई ने बीजेपी, आरएसएस, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, गुरुद्वारा बंगला साहिब, इस्कॉन समिति, बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया, नेशनल क्रिश्चिएन काउंसिल आदि को भी पार्टी बनाया था. याचिकाकर्ता का कहना था कि इन सभी का पक्ष लेकर उनके गुरु को परमात्मा का दर्जा दिया जाए।
आज प्रकरण की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एमआर शाह व जस्टिस सीटी रविकुमार की डिवीजन बैंच में हुआ। अदालत में याचिकाकर्ता उपेंद्र नाथ दलाई ने हिंदी में तर्क रखते हुए कहा कि श्री श्री अनुकूल चन्द्र ठाकुर परम पिता की प्रेरणा से उत्तपन्न हुए हैं और उन्होंने देश व समाज के लिए बहुत काम किये है। इसलिए उन्हें परमात्मा के रूप में मान्यता दी जाए। जिस पर अदालत ने कहा कि आप ही उन्हें परमात्मा मानो पर दूसरे पर उन्हें परमात्मा मानने का विचार क्यो थोप रहें। यह एक धर्म निरपेक्ष देश है, जहां सभी को अपनी धार्मिक मान्यताएं मानने का हक है। बैंच ने कहा कि " ऐसा कभी होता है क्या भैया, आप ही भगवान मानो उन्हें,सबको इस देश मे पूरा अधिकार है, जिसको जो भी धर्म मानना है माने। साथ ही याचिका को पब्लिसिटी स्टंट बताते हुए खारिज कर दिया। और जनहित याचिका का दुरुपयोग करने पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी थोंप दिया।
जुर्माना थोंपने पर याचिकाकर्ता ने अदालत से गुजारिश करते हुए जुर्माना माफ़ करने की मांग की। जिस पर अदालत ने कहा कि "हम यहां लेक्चर सुनने नही सुनाने के लिए बैठे हैं" हमने वैसे भी कम जुर्माना लगाया है, किसी को अधिकार नही कि जनहित याचिका का दुरुपयोग करे, अब लोग ऐसा करने से पहले कम से कम 4 बार सोचेंगे।" साथ ही 4 हफ़्तों के अंदर सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जुर्माने की रकम जमा करवाने के निर्देश दिए।
