ब्यूरोक्रेट्स और बंगला….संजय दीक्षित के तरकश के तीर

8 मार्च 2020
ब्यूरोक्रेट्स को आमतौर पर बढ़ियां बंगला…..बढ़ियां गाड़ी का बड़ा चार्म रहता है। जब-जब ठेका, सप्लाई वाला कोई विभाग या माल-मसाला वाली पोस्टिंग मिलती है, उनके बंगले का इंटिरियर बदल जाता है। ऐसे नौकरशाहों के लिए एक बैड न्यूज है। सारे नौकरशाहों को सजा-संवरा बंगला छोड़कर साल भर के भीतर नया रायपुर जाना होगा। दरअसल, राजधानी के चुनिंदा पत्रकारों से बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि नया रायपुर तभी बस पाएगा, जब सीएम, मंत्री और अधिकारी वहां जाएं। सीएम बोले, मैं भी साल भर के भीतर नया रायपुर चला जाउंगा। उनसे पूछा गया कि चीफ सिकरेट्री नया रायपुर चले गए हैं…क्या अन्य अफसरों को भी आप वहां जाने के लिए कहेंगे क्या, सीएम सख्ती से बोले…जब मैं चला जाउंगा तो उन्हें जाना ही पडे़गा। हालांकि, अफसर बड़े चतुर होते हैं….पोस्टिंग को लेकर संजीदा भी। वो भी जब सीएम भूपेश हों। सो, देखियेगा अफसरों में नया रायपुर जाने के लिए किस तरह होड़ मचेगी।

सिक्यूरिटी प्राब्लम

सिक्यूरिटी प्राब्लम नहीं होता तो सीएम भूपेश बघेल अभी तक नया रायपुर शिफ्थ हो गए होते। उन्होंने अफसरों से कहा था कि दो-तीन मकानों को जोड़कर सीएम हाउस तैयार कर दिया जाए, वे जाएंगे तभी और लोग भी नया रायपुर जाना शुरू करेंगे। लेकिन, सिक्यूरिटी ने मना कर दिया। पत्रकारों से सीएम बोले….मुझे बंगले का कोई प्रेम नहीं है….अभी तक मैंने इस सीएम हाउस के सभी कमरों को भी नहीं देखा है।

मरीन ड्राइव का सौदा

पिछली सरकार ने नया रायपुर में एक होटल वाले को झील बेच दिया….और अभी तेलीबांधा तालाब जो मरीन ड्राइव के रूप में आकर्षण का केंद्र बन चुका है, अफसरों ने उसे कामर्सियल यूज के लिए मुंबई की प्रायवेट पार्टी को सौंप दिया है। वहां अब रिसोर्ट समेत 150 दुकानों का एक काम्पलेक्स बनने जा रहा है….इसके अलावा और भी बहुत कुछ…। राजधानी में वैसे ही आमोद-प्रमोद के लिए कुछ है नहीं। यही वजह भी है कि मरीन ड्राईव बनते ही हिट हो गया था। बाहर से कोई गेस्ट आए तो लोग उसे मरीन ड्राईव दिखाने ले जाते हैं….छुट्टियों के दिन चौपाटी की भीड़ देखते बनती है। सुबह-शाम लोग दूर-दूर से मॉर्निंग वॉक के लिए आते हैं। यहां तक कि सरकारी गेस्ट हाउस पहुना में रुकने वाले गेस्ट भी मरीन ड्राइव पहुंच जाते हैं। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया को भी वहां कई बार वॉक करते देखा गया है। ऐसी जगह पर अगर व्यावसायिक काम होने लगेगा तो क्या होगा, आप समझ सकते है। रायपुर के कुछ सुधि लोग इसको लेकर सीएम से मिलने वाले हैं। हालांकि, सीएम तालाब और नदी-नालों को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। इसलिए, हो सकता है कि उनकी नोटिस में आने पर मरीन ड्राइव धन माफियाओं के हाथ में जाने से बच जाए।

मुकेश भी चलें दिल्ली

सुबोध सिंह के बाद अब आईएएस मुकेश बंसल भी डेपुटेशन पर दिल्ली जा रहे हैं। राज्य सरकार की एनओसी के बाद भारत सरकार ने उन्हें पोस्टिंग दे दी है। मुकेश कृषि और पंचायत मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के पीएस बनाए गए हैं। सुबोध और मुकेश, दोनों कर्मठ और रिजल्ट देने वाले अधिकारी माने जाते हैं। छत्तीसगढ़ में ऐसे अधिकारियों की कमी है। लेकिन, यह भी सही है कि भारत सरकार में अच्छी जगहों पर अफसरों के होने का लाभ स्टेट को मिलता है। शुक्र है, दिल्ली में छत्तीसगढ़ के अफसरों की पोस्टिंग अच्छी मिल रही है। पिछले महीने ही रोहित यादव पीएमओ में ज्वाइंट सिकरेट्री बनाए गए। मुकेश को भी पोर्टफोलियो अच्छा मिल गया है। नरेंद्र सिंह तोमर के पास न केवल दो अहम विभाग हैं बल्कि प्रधानमंत्री के काफी विश्वस्त भी हैं।

ओल्ड सीएम सचिवालय

मुकेश बंसल के डेपुटेशन पर जाने के बाद पिछली सरकार के सीएम सचिवालय के सारे अफसर अब प्रतिनियुक्ति पर होंगे। एसीएस टू सीएम एन बैजेंद्र कुमार तो पिछली सरकार की विदाई से साल भर पहिले सीएमडी बनकर एनएमडीसी चले गए थे। पीएस टू सीएम अमन सिंह संविदा पर रहे। इसलिए, उनकी नियुक्ति स्वयमेव खत्म हो गई। सिकरेट्री टू सीएम सुबोध सिंह हाल ही में भारत सरकार गए हैं। ज्वाइंट सिकरेट्री टू सीएम रजत कुमान जनगणना में हैं। वे भी सेंट्रल डेपुटेशन है। और अब मुकेश बंसल। हालांकि, ऐसा जोगी सरकार के अवसान के बाद भी हुआ था। जोगी सरकार में सिकरेट्री टू सीएम रहे सुनिल कुमार भी डेपुटेशन पर भारत सरकार चले गए थे। इसका ये मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि सीएम सचिवालय में काम करने वालों के लिए सरकार बदलने पर खतरा बढ़ जाता है या उनके लिए आगे कोई चांस नहीं रहता। आखिर, वही सुनिल कुमार लौटकर रमन सरकार में ही सीएस बने थे।

पहले विदाई, फिर वेलकम

सूबे के चीफ सिकरेट्री रह चुके आईएएस अजय सिंह की विदाई अच्छी नहीं रही। आयकर छापे की चटपटी खबरों में नौकरशाही ऐसी लीन रही कि किसी का ध्यान ही नहीं रहा कि सबसे सीनियर आईएएस 37 साल की सेवा के बाद रिटायर हो रहे हैं। लेकिन, अजय सिह ने भी अपना जलजला दिखा दिया…रिटायरमेंट के चार दिन के भीतर उसी योजना आयोग में पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग करवा ली, जहां से वे रिटायर हुए थे। वो भी विषम राजनीतिक हालत में। जब लोग मानकर चल रहे थे कि अब होना भी होगा तो बजट सत्र के बाद ही कुछ हो सकता है। इसमें ये भी एक संयोग रहा कि जिस आयोग से चार दिन पहले उन्हें विदाई दी गई, वहीं चौथे दिन फिर वेलकम हुआ।

राम भरोसे खुफिया पुलिस

आयकर छापे में भले ही कुछ नहीं निकला, मगर सूबे की खुफिया पुलिस की जरूर टेस्ट हो गई। बताते हैं, सीआरपीएफ के हथियारबंद जवान एयरपोर्ट के सामने जैनम मंदिर में सुबह चार बजे से पहुंच गए थे। एयरपोर्ट पर आईटी अफसरों के लिए एक साथ 40, 40 इनोवा गाड़ियां लाइन से खड़ी रही और खुफिया पुलिस को भनक तक नहीं लग पाई। किसी ने यह भी पता करने की 40 गाड़ियों में शैक्षणिक पर्यटन भिलाई लिखा है, तो इसके मायने क्या हैं। जबकि, खुफिया पुलिस को रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जैसी जगहों पर ज्यादा अलर्ट रहने कहा जाता है। इस विभाग को सरकार आखिर 9 करोड़ रुपए इसी बात के लिए देती है। सरकार इस पैसे का कोई आडिट या हिसाब भी नहीं लेती। बहरहाल, आप समझ सकते हैं, खुफिया पुलिस की क्या स्थिति है। राम भरोसे मान लीजिए।

बेचारे मरकाम

अरुण कुमार मरकाम ओएसडी टू सीएम जरूर हैं, लेकिन उस टाईप के नहीं। तीन-पांच से दूर रहने वाले। मगर आयकर छापे के दौरान मीडिया की आपाधापी के शिकार अरुण भी हो गए। खबरें चलने लगी मरकाम के घर पहुंची आईटी टीम। कुछ ने तो बकायदा उनके घर की फोटो भी लगा दी। बाद में, पता चला अरुण के यहां आईटी टीम गई ही नहीं थी। चलिये, अरुण का नाम भी बड़े लोगों में शामिल हो गया। आईटी का रेड छोटे-मोटे लोगों के यहां तो पड़ता नहीं।

एक का विरोध, एक पर मौन?

कुशाभाउ ठाकरे पत्रकारिता विवि के कुलपति बलदेव शर्मा की नियुक्ति को लेकर राजभवन और राज्य सरकार के बीच ठन गई है। शर्मा के ज्वाईनिंग के दिन भी एनएसयूआई ने जमकर प्रदर्शन किया। लेकिन, उन्हीं के साथ पं0 सुंदरलाल शर्मा विवि के कुलपति वंश गोपाल सिंह की नियुक्ति पर सिस्टम मौन है। जबकि, सिंह को पिछली सरकार ने कुलपति बनाया था। संघ से जुड़े सिंह की खाकी हाफ पैंट वाली फोटो भी आ चुकी है। इसके बावजूद, वंश गोपाल सिंह कंफर्ट जोन में हैं, तो सवाल उठते हैं।

सस्पेंशन वीक

विधानसभा के बजट सत्र का यह दूसरा सप्ताह अधिकारियों, कर्मचारियों के सस्पेंशन के नाम रहा। इस दौरान विभिन्न मामलों में करीब दर्जन भर अधिकारियों, कर्मचारियों को सदन में निलंबन की घोषणा की गई। सीएम के निर्देश पर बलरामपुर रेप कांड में थाने के टीआई समेत सात पुलिसकर्मी निलंबित हुए, वहीं एक्सप्रेस-वे में ईई समेत आधा दर्जन इंजीनियरों पर गाज गिरी। पंचायत और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने भी कई को सस्पेंड किया।

अंत में दो सवाल आपसे

1. क्या कुछ बड़े निगम-आयोगों में जल्द ही नियुक्तियां कर सरकार कुछ नेताओं को होली गिफ्ट दे सकती है?
2. केटीयू वीसी सर्च कमेटी के तीन में से दो लोग सरकार और विवि से जुड़े थे, इसके बाद भी आरएसएस से संबंद्ध दावेदारों के नाम उपर में कैसे आ गए?

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