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ब्रेकिंग : “मुठभेड़ नहीं वो युद्ध था” मुख्यमंत्री ने बीजापुर हमले में इंटेलिजेंस फेल्योर व चूक से किया इनकार… बोले- राकेट लांचर व गोलीबारी के बीच चार घंटे तक मुकाबला साधारण काम नहीं….आपरेशंस रहेंगे जारी, 2 कैंप जरूर बनायेंगे

रायपुर 4 अप्रैल 2021। “बीजापुर में मुठभेड़ नहीं…युद्ध था…आमने-सामने की लड़ाई चल रही थी…चार घंटे तक राकेट लांचर और गोलीबारी चल रही थी, ये कोई मामूली बात नहीं हैं” …..असम से रायपुर लौटे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शहीद जवानों की शहादत को नमन भी किया और घायल जवानों की जाबांजी को सैल्यूट भी किया। रायपुर पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने एयरपोर्ट पर ही आला अधिकारियों से चर्चा की और नक्सल हमले को लेकर अफसरों से हालात की जानकारी ली।

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में घटना का ब्योरा देते हुए बताया कि बीजापुर के तर्रेम में बड़ी नक्सली घटना हुई है। हिड़मा की मौजूदगी की सूचना मिली थी, जिसके बाद 2000 जवानों की 5 टुकड़ी को आपरेशंस पर भेजा गया था। चार टुकड़ी सकुशल लौट गयी थी, जबकि आखिरी टुकड़ी, जिसमें सीआरपीएफ, एसटीएफ और डीआरजी के जवान थे, उस पर नक्सलियों ने छुपकर हमला किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस एरिया में आपरेशंस के लिए जवान निकले थे, वो नक्सलियों का गढ़ है। वहां छुपकर हमला किया गया, जिसमें जवानों ने मजबूती के साथ मुकाबला किया, ये मुठभेड़ नहीं युद्ध था, जिसमें सामने से गोलियां-बम और राकेट लांचर चल रहे थे। लेकिन 4 घंटे के मुकाबले में कार्डिनेशन इतना तगड़ा था कि जवान ना सिर्फ खुद निकलकर बाहर आये, बल्कि हथियार भी लाये और अपने साथी घायल जवान को भी लेकर आये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलियों को भी बड़ा नुकसान हुआ है। चार ट्रैक्टर में नक्सली घायल जवान और मारे गये नक्सली को लेकर गये हैं। मुख्यमंत्री ने किसी भी तरह की चूक के इनकार किया है। उन्होंने कहा कि ये चूक नहीं है, हमारे जवान घेरने निकले थे, किसी कैंप पर हमला नहीं हुआ है, जिसे चूक कहा जाये।

मुख्यमंत्री ने इंटेलिजेंस फेल्योर की बात से भी इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उस इलाके में दो कैंप बनाया जा रहा है, जिसकी नक्सलियों में बौखलाहट है, लेकिन हम इस महीने दो कैंप बनायेंगे। आपरेशंस चलेंगे और नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दिया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार के वक्त नक्सली हमले का जिक्र करते हुए कहा कि वो कोई राजनीतिक बातें नहीं कह रहे हैं, लेकिन पहले कैंपों पर हमले होते थे, घेरने के लिए जवान नहीं निकलते थे। अब सामने की लड़ाई हो रही है और नक्सली आखिरी दौर की लड़ाई लड़ रहे हैं।

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