ब्रेकिंग : निकाय चुनाव में राइट टू रिकॉल का अधिकार नहीं होगा जनता को… नये अध्यादेश से हटाया गया… पार्षदों की खर्च सीमा भी तय की गयी… पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने उठाये सवाल

रायपुर 30 अक्टूबर 2019। नगरीय निकाय के नये अध्यादेश से होने वाले चुनाव में इस दफा कई नये प्रयोग किये जायेंगे। इस बार के नगरीय निकाय चुनाव में राइट टू रिकॉल को खत्म कर दिया गया है। पहले नगरीय निकाय के चुनाव में जनता के पास ये अधिकार था कि वो राइट टू रिकॉल के जरिये किसी भी निकाय जनप्रतिनिधि के कामकाज से असंतुष्ट रहने पर उन्हें वापस बुला सकते हैं। लेकिन नये अध्यादेश में जनता को ये अधिकार नहीं रहेगा। नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया के मुताबिक राइट टू रिकाल को निकाय चुनाव में खत्म कर दिया गया है। हालांकि किसी महापौर या अध्यक्ष को अब अविश्वास प्रस्ताव के जरिये हटाया जा सकता है।

खर्च की सीमा भी तय 

नगरीय चुनाव में खर्च की सीमा भी निर्धारित कर दी गयी है। नगर पंचायत में ये खर्च 50 हजार रुपये की होगी, वहीं नगर निगम में ये खर्च 1 लाख रुपये तक की होगी।

मंत्री शिव डहरिया के मुताबिक चुनाव में जनता पार्षद चयन करेगी और पार्षद अध्यक्ष और महापौर का चयन करेंगे। हालांकि राइट टू रिकाल के अधिकार को हटाये जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने एतराज जताया है। रमन सिंह ने कहा है कि ….

“लोकतंत्र में राइट टू रिकॉल जनता का बड़ा अधिकार है, जहां जनप्रतिनिधि के मन में ये डर रहता था कि अगर वो बेहतर काम नहीं करेंगे तो जनता उन्हें हटा सकती है, लेकिन राइट टू रिकाल को खत्म किया गया है, हमें लगता है कि ये सरकार का सही कदम नहीं है”

 

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