ब्रेकिंग:निगम कमिश्नर और कार्यपालन अभियंता हाजिर हों !… संकरी डंप मामले में कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, कहा- निगम ना तो हमारे डायरेक्शन मान रहा और ना नियम…. पर्यावरण संरक्षण मंडल ने नगर निगम से 7 करोड रुपए की पेनल्टी वसूलना प्रस्तावित किया

रायपुर 23 जनवरी 2020।  रायपुर के सकरी के मामले में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश तथा न्यायमूर्ति पीपी साहू की युगल पीठ में मामले मैं नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि यह एक गंभीर मामला है और 16 दिसंबर को हमने कुछ निर्देश दिए थे परंतु ऐसा लग रहा है कि नगर निगम उनमें से कुछ भी नहीं मान रहा है।  कोर्ट ने आदेशित किया है की अगली सुनवाई तिथि को नगर निगम आयुक्त नगर निगम के कार्यपालन अभियंता व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र के साथ उपस्थित हो. पर्यावरण संरक्षण मंडल की तरफ से बताया गया कि उन्होंने निगम पर 7 करोड की पेनल्टी अधिकृत करने का निर्णय लिया है.

गौरतलब है जून माह में नगर निगम रायपुर में रायपुर शहर से निकलने वाले 500 टन कचरे को पर्यावरण संरक्षण मंडल की मनाही के बावजूद डंप करना चालू कर दिया है जिसके विरोध में दायर की गई जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कि 16 दिसंबर को कोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण मंडल को निरीक्षण कर रिपोर्ट देने के लिए आदेशित करने के साथ-साथ नगर निगम को आदेशित किया था कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2016 का पूर्ण पालन किया जावे उसके बावजूद भी नगर निगम ने एक भी नियम का पालन नहीं किया.

याचिकाकर्ता व्यास मुनि द्विवेदी क्षेत्र के सरपंच टी आर सिन्हा, नेमीचंद धिवर और विजय साहू की तरफ से कोर्ट में कुछ फोटो दिखाकर यह बताया गया कि इकट्ठे किए गए कचरे से निकलने वाले पानी से गंदे पानी का तलाब बन गया है और अब वह गंदगी और कीचड़ युक्त पानी बाउंड्री वॉल से बाहर भी निकल रहा है.

पर्यावरण संरक्षण मंडल ने अपने निरीक्षण प्रतिवेदन मैं उल्लेखित किया है की निगम मिक्स कचरे को इकट्ठा कर रहा है जो कि नियमों का खुला उल्लंघन है. पिट नंबर 1 पूरा भर गया है और उसकी ऊंचाई दीवाल से भी ज्यादा हो गई है. पिट नंबर 2 के नीचे जिओ लाइनर नहीं लगाया गया है. कंपोस्ट बनाने के प्लांट के लिए अभी तक सिर्फ पिलर खड़े किए गए हैं और रिफ्यूज्ड डीराइव फ्यूल प्लांट के निर्माण की कोई कार्यवाही नहीं की गई है.

पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधीक्षण अभियंता ए सी मालू सहायक अभियंता देवब्रत मिश्रा और सहायक लीगल अधिकारी प्रियांशी सिंह में 15 बिंदुओं पर अपना जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत कर करके पर्यावरण संरक्षण मंडल को अनुशंसा की है की नगर निगम आयुक्त के विरुद्ध पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, एयर एक्ट और वाटर एक्ट के तहत कोर्ट केस दर्ज करा जाए और निगम आयुक्त से पर्यावरण कंपनसेशन, केंद्रीय पर्यावरण संरक्षण बोर्ड की गाइडलाइंस के अनुसार सॉलि़ड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स का पालन नहीं किए जाने के कारण वसूला जाए. प्रकरण की सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है.

Spread the love