ब्रेकिंग : हिंसा और उपद्रव के बाद किसान आंदोलन में पड़ी फूट…..कई किसान संगठनों ने आंदोलन खत्म करने की घोषणा की…..राकेश टिकैत पर साधा निशाना

नयी दिल्ली 27 जनवरी 2021। कल ट्रेक्टर रैली के नाम पर हुई हिंसा और उपद्रव के बाद किसान आंदोलन में फूट पड़ता जा रहा है। एक के बाद एक कई संगठन किसान आंदोलन से खुद को अलग करते जा रहे हैं। किसान आंदोलन में शामिल एक बड़ा संगठन राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ ने अपना आंदोलन वापस ले लिया है। संगठन के नेता वीएम सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस ने आंदोलन से हटने का अपना फैसला सुनाया। इस पीसी में वीएम सिंह ने किसान नेता राकेश टिकैत पर कई गंभीर आरोप लगाये। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के बाद अब भारतीय किसान यूनियन (भानु) भी आंदोलन से अलग हो गया है. यानी अब तक दो संगठन किसानों के आंदोलन से अलग हो चुके हैं.

किसान नेता वीएम सिंह ने ऐलान किया है कि उनका संगठन किसानों के आंदोलन से अलग हो रहा है. वीएम सिंह के संगठन का नाम राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ है. ये संगठन अब आंदोलन का हिस्सा नहीं होगा. वीएम सिंह ने कहा कि इस रूप से आंदोलन नहीं चलेगा. हम यहां पर शहीद कराने या लोगों को पिटवाने नहीं आए हैं. उन्होंने भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत पर आरोप लगाए हैं. वीएम सिंह ने कहा कि राकेश टिकैत सरकार के साथ मीटिंग में गए. उन्होंने यूपी के गन्ना किसानों की बात एक बार भी उठाई क्या. उन्होंने धान की बात की क्या. उन्होंने किस चीज की बात की. हम केवल यहां से समर्थन देते रहें और वहां पर कोई नेता बनता रहे, ये हमारा काम नहीं है.

इधर इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के प्रधान महासचिव और ऐलनाबाद से विधायक अभय सिंह चौटाला ने बुधवार को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने किसानों के समर्थन में हरियाणा विधानसभा के स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता को अपना इस्तीफा सौंपा.  अभय सिंह चौटाला ने इससे पहले स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता को ईमेल कर विधायक पद से अपना इस्तीफा भेजा था. उन्होंने कृषि कानूनों के खिलाफ विधायक पद से इस्तीफा दिया.

संयुक्त किसान मोर्चा ने बयान कर जारी दिल्ली हिंसा की निंदा की है. बयान में कहा गया कि संघर्षरत संगठनों ने किसानों से अपील की कि वे धरना स्थलों पर रहें और शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखें. किसान संगठनों ने इस आंदोलन को जारी रखने का संकल्प लिया और असामाजिक तत्वों की निंदा की, जिन्होंने किसानों के आंदोलन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. संगठनों ने सरकार और अन्य ताकतों को इस आंदोलन को नहीं तोड़ने देने का संकल्प लिया है.

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