भाजपा नेता परेश बागबाहरा ने राहूल गांधी के द्वारा मजदूरों को लेकर बनाए डाक्यूमेंट्री को बताया ड्रामेबाजी

रायपुर 23 मई 2020। भाजपा नेता एवं पूर्व विधायक परेश बागबाहरा ने राहूल गांधी के द्वारा मजदूरों को लेकर बनाए डाक्यूमेंट्री को ड्रामेबाजी बताया है। उन्होने कहा कि मजदूरो को हथियार बना कर, वे वीडियो वार कर मजदूरो के प्रति हमदर्दी जताने की जगह अपनी पार्टी की राजनैतिक मार्केटिंग कर रहै है। उन्होने कहा कि, इससे पहले भी छत्तीसगढ की बेटी कलावती के साथ कांग्रेस पार्टी ने एक डाक्यूमेट्री बनाई थी, उसके बाद कलावती के भविष्य का क्या हुआ ये पूरा छत्तीसगढ जानता है। इसी प्रकार आदरणीय राहूल गांधी जी ने अपने सिर पर झउहाॅ उठाकर फोटोसेशन किया और कहा कि मै मजदूर हूॅ।

उन्होने कहा कि, 1947 की आजादी के बाद, इस देश मे करीब 61 साल तक एक छत्र राज करने वाली कांग्रेस पार्टी की कनफ्यूज्ड इकानामिक पालिसी का ही दूषपरिणाम है, कि आज देश का 75 प्रतिशत आबादी, प्रवासी एवं खस्ता हाल खेतिहर मजदूरो वाला गरीब भारत का निर्माण कर दिया है। उन्होने कहा कि, राहूल गांधी को, अलग अलग ऐंगल में कैमरे लगाकर, मजदूरो की पीडा की फिल्म बनाने की बजाय राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ और माहाराष्ट्र् के प्रवासी मजदूरो को उनके घरो मे भेजने की व्यवस्था करनी चाहिए थी, जिसमे कांग्रेस पूरी तरह असफल रही है। अब अपनी असफलता को छूपाने के लिए, आदरणीय राहूल गांधी जी का कोरोना की इस गंम्भीर महामारी के बीच वीडियो बनाना अत्यन्त गैरजिम्मेदाराना है।

उन्होने कहा कि, कोविड-19 की इस महामारी मे केन्द्र शासन ने मार्च के आखिरी सप्ताह मे ही 1 लाख 75 हजार करोड रुपये मजदूरो की सहायता के लिए राज्य सरकारो को आबंटित कर दिया थे एवं 29 हजार करोड रुपये का स्टेट डिजास्टर रिलीफ फण्ड भी उपलब्ध करा दिया था, ताकि राज्य सरकारे प्रवासी मजदूरो के लिए टेम्परेरी हाउसींग, भोजन, कपडे तथा अन्य आवश्यक वस्तुओ की व्यवस्था करे। उन्होने कहा कि केन्द्र सरकार ने न सिर्फ मजदूरो के लिए मुफ्त राशन आबंन्टीत किया बल्कि कुल एक लाख करोड रुपये मनरेगा (रोजगार गारन्टी) के लिए नगद राशि भी उपलब्ध कराया है।

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