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ये बिहार है... यहां स्कूलों तक के नाम जातियों में बंटे, देखकर रह जाएंगे दंग

Bihar Top News : बिहार का नाम आते ही जाति जहन में आती है। यहां जाति से अछूता स्कूल और मोहल्ले भी नहीं हैं। इनके नाम भी जातियों पर हैं।

ये बिहार है... यहां स्कूलों तक के नाम जातियों में बंटे, देखकर रह जाएंगे दंग
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By Ranjan Kumar

Bihar Caste Discrimination: उत्तर भारत में बिहार ऐसा राज्य है, जहां की सिर्फ राजनीति में जाति की गहरी पैठ नहीं है। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूलों में भी जाति घुसी है। दर्जनों ऐसे स्कूल हैं, जिनके नाम में सीधे तौर पर जाति लिखी है। मोहल्लों का नाम जाति पर है।

मध्य विद्यालय तुलसीपुर, यादव टोला, भागलपुर, प्राथमिक विद्यालय रूकनपुरा (मुसहरी), पटना और प्राथमिक विद्यालय रुपसपुर हरिजन टोला, पटना। इन तीनों स्कूलों के नाम में स्पष्ट रूप से जाति लिखी है। इन स्कूलों में सभी जातियों के बच्चे पढ़ते हैं। मगर, नाम ऐसा कि एक ही जाति दर्शाती है। कई दफा बच्चे उस स्कूल का नाम बताते हुए संकोच करते हैं। वे पूरा नाम बताने के बजाए सिर्फ गांव का नाम बताते हैं। जैसे–रूपसपुर स्कूल, तुलसीपुर स्कूल।


बच्चों की मनोस्थिति पर पड़ता है बुरा असर

राजधानी पटना के रूपसपुर में जातिसूचक नाम प्राथमिक विद्यालय रुपसपुर हरिजन टोला है। हमने लोगों से स्कूल के नाम को लेकर बात की।कुमार चंदन रवि का कहना है कि ऐसे नाम से बच्चों के दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। उनके मन में जाति वाला भाव आता है। जाति की जगह सरकार स्वतंत्रता सेनानी, गांव से वीर शहीदों के नाम पर स्कूल का नाम रखे। यह सराहनीय होगा। बच्चों को जाति वाली भावना इन स्कूल से आनी शुरू हो जाती है।

स्कूल के नाम में किस तरह जुड़े जातिसूचक शब्द?

राज्य में डोम टोला, मुसहरी टोला, पासवान टोला, पंडित टोला, भूमिहार टोला, ब्राह्मण टोला, यादव टोला, मोची टोला नाम से काफी संख्या में सरकारी स्कूल हैं। पटना निवासी शिक्षाविद डॉ. लक्ष्मीकांत सजल इसके पीछे की वजह स्थानीय आबादी को बताते हैं। इन स्कूल के आसपास जिस जाति की संख्या अधिक थी, उसी जाति से जोड़कर स्कूल के नाम रख दिए गए। ग्रामीण इलाकों में टोले के नाम जाति से जोड़कर स्कूल के नाम रखे जाने का चलन है। जैसे यादव टोला में स्कूल के नाम में यादव टोला जुड़ा।


हरिजन स्कूल नामकरण के पीछे की कहानी

जिन स्कूलों के नाम में अनुसूचित जाति शब्द हैं, संभव है पहले वे हरिजन स्कूल के नाम से प्रसिद्ध रहे। राज्य सरकार ने हर 5 किलोमीटर के दायरे में एक हाईस्कूल, 3 किलोमीटर में एक मिडिल स्कूल और 1 किलोमीटर में एक प्राइमरी स्कूल खोलने का फैसला किया था। शिक्षा विभाग के अनुसार सरकार के इस फैसले के आधार पर स्कूल खोले गए। मगर, कई जगह यह परेशानी आई कि स्कूल दलित बस्ती से दूर थे, जिस चलते इस समाज के कम बच्चे पढ़ने जाते थे। सरकार ने इस परेशानी को दूर करने को ऐसे दलित बस्ती के पास स्कूल खोले। जब इन स्कूलों को नाम दिए जा रहे थे, तब अनुसूचित जाति शब्द प्रयोग में नहीं था। हरिजन शब्द प्रचलन में था। इस कारण स्कूलों का नाम हरिजन विद्यालय रखा गया। अब इन स्कूलों के नाम बदलकर अनुसूचित जाति विद्यालय किए गए हैं। शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर जातिसूचक (हरिजन) शब्द बदला था।

क्या है सरकार की योजना?

सरकार स्कूलों के नाम से जातिसूचक शब्द हटाने जा रही। इसके लिए कार्य जारी है। विभाग के स्थापना शाखा की तैयारी पूरी है। मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद स्कूलों के नाम बदल दिए जाएंगे। बता दें, बिहार सरकार सभी स्कूल (बुनियादी समेत) का नाम राजकीय करने जा रही। स्कूलों के नाम का पहला शब्द राजकीय होगा। उसके बाद गांव का नाम, जिस व्यक्ति ने जमीन दी उसका नाम, उस गांव से कोई शहीद हुए हों तो उनका नाम जोड़े जाने का प्रस्ताव है।

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