काम में सुस्ती दिखाने वाले अफसर अव्वल दर्जे के चोर, प्रधान सचिव विनय कुमार के बयान पर मचा बड़ा बवाल
Bihar News : नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने परियोजनाओं में देरी करने वाले अधिकारियों और इंजीनियरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। BUIDCO की कार्यशाला के दौरान उन्होंने लापरवाह अधिकारियों को फटकार लगाकर चोर कहा।

Bihar Officer Controversial Statement : बिहार में विकास कार्यों में ढ़िलाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने अधिकारियों एवं इंजीनियरों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि तय समय सीमा में काम पूरा न करने वाले ईमानदार नहीं, बल्कि अव्वल दर्जे के चोर हैं। उन्होंने पटना के मौर्य मंडयम में बुडको की कार्यशाला में कहा कि किसी प्रोजेक्ट में देरी इंजीनियरों या अन्य अधिकारियों को वजह से होती और लागत बढ़ती है तो उस अतिरिक्त राशि की वसूली संबंधित अधिकारी की जेब से की जाएगी। उनके बयान पर प्रदेश के अधिकारी गलत बता रहे हैं। उनका कहना है कि अपने जूनियर अधिकारियों को ऐसे संबोधित करना सही नहीं है।
10 मिनटों की फाइल पर 10 दिन क्यों लगते हैं?
प्रधान सचिव विनय कुमार ने कहा कि जो फाइल 10 मिनटों में निपटनी चाहिए, उस पर 10 दिन बैठना भ्रष्टाचार का संकेत है। काम में सुस्ती दिखाना महात्मा होने की निशानी नहीं, बल्कि इसके पीछे अक्सर रिश्वतखोरी या फिर लापरवाही होती है। उन्होंने सवाल किया या कि जब परियोजना की समयसीमा 12 महीने हैं तो उसे 15 महीने क्यों लगते हैं? देरी का असर सीधे परियोजना की लागत एवं गुणवत्ता पर पड़ता है। ठेकेदार का फंड फ्लो रुकने पर वह मजबूरी में घटिया सामग्री का इस्तेमाल करता है। उसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है।
इंजीनियरों के काम के तरीके पर सवाल
प्रधान सचिव विनय कुमार ने तकनीकी खामियों पर नाराजगी जताई। लखीसराय के एक परियोजना का उदाहरण देकर उन्होंने कहा कि डीपीआर बनाने एवं उसे मंजूरी देने वालों ने सामान्य समझ तक का इस्तेमाल नहीं किया। इंजीनियर अब खुद पढ़ना छोड़ चुके और सब कुछ कंसल्टेंट के भरोसे छोड़ रखा है।
प्रधान सचिव ने किन अधिकारियों को चोर कहा?
जो अधिकारी जानबूझकर परियोजना में सुस्ती दिखाते और काम लटकाते हैं, वे अव्वल दर्जे के चोर हैं। उनके कारण समय और जनता के पैसे की बर्बादी होती है। किसी परियोजना की समयसीमा समाप्त होती है और उसकी लागत बढ़ती है तो उस बढ़ी राशि की वसूली सीधे जुड़े अधिकारियों एवं इंजीनियरों के वेतन या संपत्ति से की जाएगी। प्रधान सचिव ने कहा कि अब सिर्फ बहानेबाजी से काम नहीं चलेगा। परियोजना में देरी के लिए नीचे से ऊपर तक के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने बुडको के इंजीनियरों को निर्देश दिया कि वे साइट पर जाकर काम की गुणवत्ता जांचें और गति की निगरानी करें, न कि सिर्फ फाइलों में काम पूरा दिखाएं। प्रधान सचिव की इस कड़ी खरी का उद्देश्य विभाग में व्याप्त सुस्ती और भ्रष्टाचार को खत्म करना है, जिससे शहरी विकास की योजनाएं समय पर आम जनता तक पहुंच सकें।
