लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, नौकरी के बदले जमीन घोटाले में नहीं रद्द होगी FIR, जानिए आज अदालत में क्या हुआ

लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, नौकरी के बदले जमीन घोटाले में नहीं रद्द होगी FIR, जानिए आज अदालत में क्या हुआ
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Land For Job Case Update : चर्चित नौकरी के बदले जमीन घोटाले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने केस में एफआईआर रद्द करने को लेकर लालू यादव की याचिका खारिज कर दी है।

Lalu Prasad Yadav Land For Job Case Update News: बिहार के पूर्व सीएम और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने आज लालू प्रसाद यादव की एक याचिका को खारिज कर दिया। इसमें उन्होंने चर्चित नौकरी के बदले जमीन घोटाले (Land For Job Scam) केस में अपने और परिवार के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। वैसे, कोर्ट ने इसी मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को थोड़ी राहत दी है।

जस्टिस एमएम सुंदरेश, एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि लालू प्रसाद यादव को सुनवाई के दौरान निचली अदालत में पेश होने की जरूरत नहीं होगी। निचली अदालत को मामले के गुण-दोष की जांच करने का अधिकार दिया।

जनवरी में तय हुए थे आरोप

बता दें, हाल में दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू के स्पेशल कोर्ट ने जनवरी में लालू प्रसाद यादव समेत बाकी आरोपियों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए उनके खिलाफ आरोप तय कर दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि जमीन के बदले नौकरी घोटाले में लालू यादव, उनके परिवार के आरोपी सदस्यों एवं बाकी आरोपियों ने सोची-समझी साजिश की तरह काम किया। जमीन के बदले नौकरी घोटाले में राउज एवेन्यू की स्पेशल कोर्ट ने लालू प्रसाद समेत 41 लोगों पर आरोप तय कर दिए थे।

नौकरी के बदले जमीन घोटाला है क्या?

नौकरी के बदले जमीन घोटाला चर्चित घोटाला है। यह तब किया गया, जब लालू प्रसाद यादव यूपीए सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री थे। आरोप है कि लालू प्रसाद यादव और उनके सहयोगियों ने रेलवे में नौकरी दिलाने के एवज में लोगों से जमीन लिखवाई थी। मामले में केंद्रीय एजेंसियों ने जांच शुरू की थी। इस साल जनवरी में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती समेत 41 लोगों पर आरोप तय कर दिए थे।

साल 2004 से 2009 के बीच रची गई साजिश

सीबीआई ने कहा है कि घोटाले की साजिश साल 2004 से 2009 के बीच रची गई। तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर स्थित रेलवे के अलग-अलग जोनों में बिहार के लोगों को ग्रुप-डी के पदों पर नियुक्त किया था। आरोप है कि इस नौकरी के बदले में उन आवदेकों या उनके परिवारों ने अपनी जमीन तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों और एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दी। इसे बाद में उनके परिवार के सदस्यों ने कब्जे में लिया। केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि लगभग सभी मामलों में नौकरी देने से पहले जमीनें ट्रांसफर की गईं। अधिकतर मामलों में गिफ्ट डीड तैयार कर ली गई थी।

लालू के करीबी भोला यादव ने गांवों में जाकर की थी घोषणा

सीबीआई ने आरोप पत्र में दावा किया है कि जब लालू यादव रेल मंत्री थे, तब उनके करीबी भोला यादव ने गांव में जाकर कहा था कि नौकरी दिलाने के एवज में अपनी-अपनी जमीन लालू परिवार के नाम कीजिए। सीबीआई ने मामले में सिर्फ लालू और उनके बेटों-बेटियों को भी आरोपी बनाया है। खासकर पाटलिपुत्र सांसद मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ चार्जशीट में आरोप दर्ज हैं कि उन्हें भी नाम मात्र की कीमत पर जमीन मिली थी।

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